
क्रिकेट मैच के दौरान बारिश आने पर स्कोर का फैसला करने वाले डकवर्थ लुईस नियम की पूरी प्रक्रिया और इसके काम करने का तरीका हिंदी में जानें।
मुख्य बातें
- डकवर्थ लुईस नियम (DLS) का उपयोग सीमित ओवरों के क्रिकेट में बारिश से मैच छोटा होने पर लक्ष्य तय करने के लिए किया जाता है।
- यह नियम दो मुख्य संसाधनों—बचे हुए ओवर और बचे हुए विकेट—के आधार पर काम करता है।
- इस गणितीय पद्धति को फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने तैयार किया था, जिसे बाद में स्टर्न ने अपडेट किया।
- मैच का फैसला तभी संभव है जब दोनों टीमें कम से कम निर्धारित न्यूनतम ओवर खेल लें।
क्रिकेट में डकवर्थ लुईस नियम (Duckworth-Lewis-Stern Method) वह गणितीय तरीका है जिसके जरिए बारिश या अन्य कारणों से बाधित होने वाले सीमित ओवरों के मैचों का परिणाम निकाला जाता है। जब मैच तय समय से कम ओवरों का रह जाता है, तब यह नियम दोनों टीमों के पास बचे हुए संसाधनों के आधार पर एक नया लक्ष्य निर्धारित करता है।
डकवर्थ लुईस नियम क्या है?
डकवर्थ लुईस नियम एक सांख्यिकीय प्रणाली है जो क्रिकेट मैच में किसी भी टीम की पारी के दौरान बचे हुए ओवरों और सुरक्षित हाथों में बचे विकेटों की संख्या का आकलन करती है। क्रिकेट मैच में रन बनाने के लिए दो ही चीजें सबसे महत्वपूर्ण होती हैं—बचे हुए ओवर और हाथ में बचे विकेट। जब बारिश के कारण खेल रोकना पड़ता है, तो ये दोनों संसाधन कम हो जाते हैं। यह नियम गणना करके बताता है कि घटे हुए ओवरों में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को जीत के लिए कितने रन बनाने चाहिए।
यह नियम क्रिकेट में क्यों लाया गया?
नब्बे के दशक से पहले बारिश से प्रभावित मैचों के नतीजे निकालने के लिए ‘औसत रन रेट नियम’ या ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स मेथड’ का इस्तेमाल किया जाता था, जो कि पूरी तरह से सही नहीं माने जाते थे। इन पुराने तरीकों में अक्सर लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को फायदा या नुकसान हो जाता था। इस समस्या को दूर करने के लिए दो ब्रिटिश गणितज्ञों, फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने इस प्रणाली को विकसित किया। बाद में इसमें प्रोफेसर स्टीवन स्टर्न ने कुछ और सुधार किए, जिसके बाद इसका नाम DLS (Duckworth-Lewis-Stern) हो गया।
डकवर्थ लुईस नियम कैसे काम करता है?
यह प्रणाली पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि किसी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के पास कितने संसाधन बचे हैं। प्रत्येक टीम को मैच की शुरुआत में 100 प्रतिशत संसाधन मिलते हैं, जिसमें 50 ओवर और 10 विकेट शामिल होते हैं। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है और विकेट गिरते हैं या ओवर बीतते हैं, संसाधनों का प्रतिशत कम होता जाता है।
मान लीजिए, पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने 30 ओवर में 4 विकेट पर 180 रन बनाए और अचानक बारिश आ गई। आगे खेल संभव नहीं हो पाया। अब दूसरी पारी शुरू होने पर ओवर घटाकर 20 कर दिए जाएंगे। DLS साफ्टवेयर यह गणना करेगा कि 30 ओवर में 4 विकेट खोने वाली टीम के पास कितने संसाधन बचे थे और 20 ओवर के मैच में दूसरी टीम के पास क्या संसाधन हैं। इसके आधार पर एक नया ‘पार स्कोर’ (Par Score) यानी बराबरी का स्कोर तय किया जाता है। यदि दूसरी टीम उस स्कोर से आगे निकल जाती है, तो वह विजयी घोषित होती है।
पार स्कोर और डीएलएस स्कोर का गणित
पार स्कोर वह न्यूनतम स्कोर होता है जो बारिश से बाधित मैच में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को किसी खास ओवर तक पहुंचना ही होता है। यदि बारिश की वजह से मैच बीच में ही रोकना पड़े और डीएलएस स्कोर निकाला जाए, तो अंपायर इसी पार स्कोर से तुलना करते हैं। अगर पीछा करने वाली टीम पार स्कोर से आगे है, तो वह जीत जाती है। यदि वह पीछे रह जाती है, तो उसे हारा हुआ मान लिया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? क्या डकवर्थ लुईस नियम केवल वनडे मैचों में लागू होता है?
उत्तर। नहीं, यह नियम एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) और टी20 (T20) दोनों प्रकार के सीमित ओवरों के क्रिकेट मैचों में लागू किया जाता है।
प्रश्न? डीएलएस नियम लागू होने के लिए न्यूनतम कितने ओवर का खेल जरूरी है?
उत्तर। मैच का परिणाम निकालने के लिए आमतौर पर दोनों टीमों को कम से कम 5-5 ओवर (टी20 में) या 20-20 ओवर (वनडे में) खेलने की आवश्यकता होती है, हालांकि प्रतियोगिता के नियमों के आधार पर इसमें बदलाव हो सकता है।
प्रश्न? क्या यह नियम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर द्वारा संचालित होता है?
उत्तर। हाँ, वर्तमान समय में इस पूरी गणना को एक विशेष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए तुरंत पूरा किया जाता है, जिससे मैदानी अंपायरों को सटीक लक्ष्य मिलने में मदद मिलती है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, खेल के नियम समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा संशोधित किए जा सकते हैं। आधिकारिक जानकारी के लिए आईसीसी की वेबसाइट देख सकते हैं।
यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






