
राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने 10 दिनों में चलाए 6 अभियानों के तहत 13 तस्करों को गिरफ्तार कर दुर्लभ वन्यजीव और उनके अवशेष जब्त किए।
मुख्य बातें
- डीआरआई ने बीते 10 दिनों में 6 प्रमुख अभियानों के तहत वन्यजीव तस्करी पर कार्रवाई की।
- कार्रवाई में 13 तस्कर गिरफ्तार किए गए और तेंदुए की खाल, तारा कछुए, पैंगोलिन के शल्क जब्त हुए।
- कुल 180 जीवित भारतीय तारा कछुए, 12 टोके गेको, 24 किलो पैंगोलिन शल्क और 500 ग्राम बाघ की हड्डियां बरामद की गईं।
- ओडिशा, कर्नाटक, मेघालय, मध्य प्रदेश और असम के वन विभागों के साथ मिलकर यह कार्रवाई पूरी की गई।
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ देशव्यापी मुहिम को तेज करते हुए राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने बड़ी सफलता हासिल की है। खुफिया जानकारी के आधार पर डीआरआई की टीमों ने पिछले 10 दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में छह विशेष अभियान चलाए। इन अभियानों के दौरान 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में संरक्षित जीवों के अवशेष व जीवित वन्यजीव बरामद किए गए।
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ डीआरआई ने क्या कार्रवाई की?
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने बीते 10 दिनों में देशव्यापी अभियान चलाकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान 2 तेंदुए की खाल, 180 जीवित भारतीय तारा कछुए, 12 जीवित टोके गेको, 24 किलोग्राम पैंगोलिन के शल्क और 500 ग्राम बाघ की हड्डियां जब्त की गईं।
राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई ओडिशा, कर्नाटक, मेघालय, मध्य प्रदेश और असम में स्थानीय वन विभागों तथा वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के समन्वय से पूरी की गई। इस एकीकृत कार्रवाई ने अंतर-राज्यीय अवैध व्यापार नेटवर्क को छिन्न-भिन्न कर दिया है।
वन्यजीव तस्करी अभियानों का विवरण और राज्यों में हुई जब्ती
डीआरआई की टीमों द्वारा चलाए गए इन छह अभियानों में विभिन्न दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियों के जीव जब्त किए गए। 07 सितंबर 2026 को ओडिशा के कोरापुट जिले के जयपुर में अधिकारियों ने एक व्यक्ति को रोककर जांच की। उसके कब्जे से एक तेंदुए की खाल बरामद हुई। तेंदुए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित हैं। पकड़े गए व्यक्ति और तेंदुए की खाल को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कोरापुट राज्य वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया।
उसी दिन यानी 07 सितंबर 2026 को दूसरा अभियान बेंगलुरु के गांधीनगर इलाके में संचालित किया गया। वहां डीआरआई अधिकारियों ने एक संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी ली, जिसमें कपड़ों के छह कवर्स के भीतर छिपाए गए 180 जीवित भारतीय तारा कछुए मिले। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने प्रजाति की पहचान की पुष्टि की। इन कछुओं के खोल पर आकर्षक तारा आकृति होती है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय पालतू बाजारों में इनकी बहुत मांग रहती है। आरोपी को गिरफ्तार कर कछुओं को जब्त कर लिया गया।
पूर्वोत्तर राज्यों में पैंगोलिन शल्क और टोके गेको की जब्ती
पूर्वोत्तर भारत में 07 सितंबर 2026 को मेघालय के री-भोई जिले में मावहाटी की ओर जा रहे एक बोलेरो वाहन को रोका गया। वाहन की तलाशी में तीन थैलों में भरे 14.68 किलोग्राम सूखे पैंगोलिन के शल्क बरामद हुए। पैंगोलिन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I और सीआईटीईएस (CITES) के परिशिष्ट I में सूचीबद्ध हैं। इनकी तस्करी मुख्य रूप से पार पारंपरिक दवाओं के निर्माण के लिए की जाती है। जब्त शल्क, वाहन और आरोपी को नोंगपोह के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर को सौंपा गया।
इससे पहले 05 सितंबर 2026 को असम के केओखाली में डीआरआई ने दो लोगों को रोककर 12 जीवित टोके गेको छिपकलियां बरामद कीं। टोके गेको कानून की अनुसूची I और सीआईटीईएस के परिशिष्ट II में शामिल है। इसका उपयोग भी पारंपरिक दवाओं और विदेशी पालतू व्यापार में होता है। आरोपियों और छिपकलियों को बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग के रेंज वन अधिकारी को सौंपा गया।
असम के कार्बी आंगलोंग जिले में 28 अगस्त 2026 को एक गाड़ी को रोककर तीन लोगों को पकड़ा गया। उनके पास से लगभग 9 किलोग्राम पैंगोलिन शल्क और 500 ग्राम बाघ की हड्डियां, खोपड़ी व दांत बरामद हुए। यह मामला बोकोलिया के वन रेंज अधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए स्थानांतरित किया गया।
मध्य प्रदेश में तेंदुए की खाल और तस्कर गिरोह का भंडाफोड़
05 और 06 सितंबर 2026 को डीआरआई ने मध्य प्रदेश के सीधी वन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। सीधी जिले में महिंद्रा थार गाड़ी में यात्रा कर रहे दो लोगों से एक तेंदुए की खाल बरामद हुई। आगे की पूछताछ में गिरोह के दो अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया। उनके पास से शिकार और अवैध बिक्री के साक्ष्य मिले। सभी चार आरोपियों को सीधी वन विभाग के हवाले कर दिया गया।
तस्करी की प्रमुख मदें और बरामदगी सूची
डीआरआई द्वारा बीते 10 दिनों के अभियानों में जब्त की गई कुल सामग्री का विवरण इस प्रकार है:
- तेंदुए की खाल: 2 थान खालें (ओडिशा के कोरापुट और मध्य प्रदेश के सीधी से)।
- भारतीय तारा कछुए: 180 जीवित कछुए (बेंगलुरु, कर्नाटक से)।
- टोके गेको छिपकली: 12 जीवित छिपकलियां (केओखाली, असम से)।
- पैंगोलिन के शल्क: लगभग 24 किलोग्राम कुल शल्क (14.68 किग्रा मेघालय और 9 किग्रा असम से)।
- बाघ के अवशेष: 500 ग्राम हड्डियां, खोपड़ी और दांत (कार्बी आंगलोंग, असम से)।
- कुल गिरफ्तारियां: विभिन्न अभियानों में पकड़े गए 13 तस्कर।
यह भी जानें: वन्यजीव संरक्षण कानून और सीआईटीईएस का महत्व
भारत में दुर्लभ जीवों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 लागू है। इस कानून की अनुसूची I में रखे गए जीवों को कानूनन उच्चतम सुरक्षा दी जाती है। तेंदुए, बाघ, तारा कछुए और पैंगोलिन इसी श्रेणी में आते हैं। इनके अंगों की बिक्री, खरीद या परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित है और ऐसा करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लुप्तप्राय जीवों के व्यापार को नियंत्रित करने के लिए सीआईटीईएस (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) काम करता है। राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) भारत के वित्त मंत्रालय के तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की प्रमुख जांच संस्था है। डीआरआई वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और राज्य वन विभागों के साथ मिलकर सीमाओं पर अवैध व्यापार को रोकने का काम करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? डीआरआई की इस हालिया कार्रवाई में कुल कितने आरोपी पकड़े गए हैं?
उत्तर। राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने देशभर में चलाए गए 6 अलग-अलग अभियानों के तहत कुल 13 तस्करों को गिरफ्तार किया है।
प्रश्न? भारत में वन्यजीवों की अवैध तस्करी रोकने के लिए कौन सा कानून लागू है?
उत्तर। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दुर्लभ जीवों के शिकार, परिवहन और व्यापार को सख्त कानूनी अपराध घोषित किया गया है।
प्रश्न? तारा कछुए और पैंगोलिन की तस्करी मुख्य रूप से क्यों की जाती है?
उत्तर। तारा कछुओं को उनके खूबसूरत खोल के कारण विदेशी पालतू बाजार में और पैंगोलिन के शल्क को पारंपरिक दवाओं के निर्माण के लिए तस्करी किया जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






