
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इनोप्रोम इंडिया 2026 में भारत के इस्पात मंत्रालय ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया और रूस के साथ रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की।
मुख्य बातें
- इनोप्रोम इंडिया 2026 का आयोजन 9 से 11 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है।
- इस्पात मंत्रालय ने हॉल 1 में ‘एक साथ मिलकर आगे बढ़ना – अनंत प्रगति के लिए’ थीम पर पवेलियन बनाया।
- सेल, एनएमडीसी, मॉयल और मेकॉन जैसे प्रमुख सरकारी उपक्रमों ने अपनी तकनीकी क्षमता दिखाई।
- भारत के इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक और रूसी उप-मंत्री मिखाइल यूरिन ने उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की।
- कोकिंग कोल, निकेल, विशेष इस्पात और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी।
इनोप्रोम इंडिया 2026 औद्योगिक प्रदर्शनी के दौरान भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के हॉल 1 में ‘इंडिया स्टील पवेलियन’ का भव्य शुभारंभ किया है। यह प्रदर्शनी रूस की सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रदर्शनी मानी जाती है, जिसका आयोजन भारत में 9 से 11 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने वैश्विक इस्पात निर्माण क्षेत्र में अपनी बढ़ती ताकत और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
इनोप्रोम इंडिया 2026 का आयोजन कहां और क्यों हो रहा है?
इनोप्रोम इंडिया 2026 प्रदर्शनी का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 9 से 11 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। रूस की इस प्रमुख औद्योगिक प्रदर्शनी के हॉल 1 में इस्पात मंत्रालय ने ‘इंडिया स्टील पवेलियन’ बनाया है। इसका उद्देश्य भारतीय इस्पात उद्योग की क्षमताओं को दर्शाना और भारत-रूस के बीच धातु क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।
इस वर्ष ‘इंडिया स्टील पवेलियन’ को ‘एक साथ मिलकर आगे बढ़ना – अनंत प्रगति के लिए’ विषय पर तैयार किया गया है। यह पवेलियन भारत के इस्पात क्षेत्र के विकास की पूरी कहानी बयां करता है। इसमें देश की बुनियादी उत्पादन क्षमताओं से लेकर विशेष प्रकार के उन्नत इस्पात निर्माण की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस प्रदर्शनी में भारत और रूस के बीच धातुकर्म, अनुसंधान और तकनीकी साझेदारी की मौजूदा स्थिति और भविष्य के अवसरों की विस्तृत झलक देखने को मिल रही है।
इंडिया स्टील पवेलियन में कौन-सी सार्वजनिक कंपनियां शामिल हैं?
इस्पात मंत्रालय के अधीन आने वाले देश के प्रमुख केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) ने इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है। हॉल 1 में लगे पवेलियन में इन उपक्रमों ने आधुनिक विनिर्माण और खनन तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया है।
प्रदर्शनी में भाग ले रही मुख्य भारतीय सार्वजनिक कंपनियां इस प्रकार हैं:
- भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL): देश की सबसे बड़ी एकीकृत इस्पात उत्पादक कंपनी ने अपनी विनिर्माण क्षमता और रेल तथा रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष इस्पात तकनीक का प्रदर्शन किया।
- राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC): भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक ने पर्यावरण-अनुकूल खनन तकनीकों और कच्चे माल के प्रसंस्करण क्षमता को सामने रखा।
- मॉयल लिमिटेड (MOIL): मैंगनीज अयस्क उत्पादन में अग्रणी इस कंपनी ने इस्पात निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण घटकों की उपलब्धता पर जोर दिया।
- मेकॉन लिमिटेड (MECON): धातुकर्म और इंजीनियरिंग परामर्श क्षेत्र की इस अग्रणी संस्था ने डिजाइन और हरित इस्पात प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया।
इनोप्रोम इंडिया 2026 में भारत और रूस के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
प्रदर्शनी के समानांतर ही भारत मंडपम के हॉल 2 में ‘इस्पात की मूल्य श्रृंखला में भारत-रूस सहयोग’ विषय पर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सत्र का आयोजन हुआ। इसका आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से भारत-रूस व्यवसाय संवाद के अंतर्गत किया गया।
इस उच्चस्तरीय सत्र की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंड्रिक और रूसी संघ के उद्योग तथा व्यापार उप-मंत्री मिखाइल यूरिन ने की। बैठक में दोनों देशों के इस्पात और खनन क्षेत्र के शीर्ष अधिकारियों और उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया। सेल, एनएमडीसी, मॉयल और मेकॉन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों (CMD) ने रूसी धातुकर्म कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत की।
बातचीत का मुख्य केंद्र इस्पात निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की सुरक्षा रहा। भारत वर्तमान में अपने इस्पात संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल (कोक बनाने योग्य कोयला) के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है। रूस के पास कोकिंग कोल और निकेल के विशाल भंडार मौजूद हैं। बैठक में दोनों पक्षों ने इन कच्चे माल की सुगम आपूर्ति श्रृंखला बनाने और लंबी अवधि के समझौतों पर गहन मंथन किया।
यह भी जानें: इस्पात क्षेत्र में भारत-रूस साझेदारी का महत्व
भारत वर्तमान समय में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक देश है। देश में हो रहे बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार, राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि के कारण इस्पात की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भारत ने वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करने का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा है।
इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीक का आधुनिकीकरण और कच्चे माल की नियमित आपूर्ति बेहद जरूरी है। रूस के पास धातुकर्म और भारी उद्योग के लिए उन्नत तकनीक और प्रचुर प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। भारत और रूस के बीच यह सहयोग दोनों देशों की पूरक शक्तियों को एक साथ लाता है। भारत के पास विशाल बाजार और निर्माण क्षमता है, जबकि रूस के पास कच्चा माल और तकनीकी विशेषज्ञता है।
भारतीय इस्पात उद्योग पर इसका क्या असर होगा?
इस द्विपक्षीय वार्ता से भारतीय बुनियादी ढांचा और इस्पात उद्योग कई तरह से लाभान्वित होगा:
पहला असर कच्चे माल की लागत पर पड़ेगा। यदि रूस से कोकिंग कोल और निकेल की नियमित और सस्ती आपूर्ति सुनिश्चित होती है, तो भारतीय इस्पात उत्पादकों की लागत में कमी आएगी। इससे घरेलू बाजार में इस्पात की कीमतें स्थिर बनी रह सकती हैं।
दूसरा बड़ा असर विशेष इस्पात और टिकाऊ उत्पादन पर देखने को मिलेगा। भारत में ऑटोमोबाइल, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले ‘स्पेशल स्टील’ की मांग बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच तकनीक के आदान-प्रदान से भारत में ही विशेष इस्पात का निर्माण आसान होगा। साथ ही, कम कार्बन उत्सर्जन वाली हरित इस्पात (Green Steel) प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त शोध से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: इनोप्रोम इंडिया 2026 प्रदर्शनी का आयोजन कहां किया जा रहा है?
उत्तर: इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 9 से 11 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है।
प्रश्न: इंडिया स्टील पवेलियन में कौन-कौन से भारतीय उपक्रम शामिल हुए?
उत्तर: इसमें इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले प्रमुख उपक्रम सेल (SAIL), एनएमडीसी (NMDC), मॉयल (MOIL) और मेकॉन (MECON) ने भाग लिया है।
प्रश्न: भारत-रूस इस्पात बैठक की सह-अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक और रूस के उद्योग एवं व्यापार उप-मंत्री मिखाइल यूरिन ने की।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






