शुक्रवार, अक्टूबर 23, 2026

एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026: अब किसान अन्नदाता के साथ बनेंगे ऊर्जादाता

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एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 के पूर्व समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसान अब खेती के साथ बिजली बेचकर भी आय कमाएंगे।

मुख्य बातें

  • 7वां एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 का आयोजन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा।
  • पीएम-कुसुम योजना के तहत लगभग 29 लाख पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा चुका है।
  • भारत ने पिछले वर्ष 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी है।
  • पुणे स्थित बीएआईएफ केंद्र में 30 फसलों पर 17 सौर प्रणालियों का परीक्षण किया जा रहा है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन के पूर्व समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि देश का अन्नदाता अब ऊर्जादाता भी बन रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, सरकार पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में कृषि-वोल्टेइक ऊर्जा के लिए एक समर्पित घटक जोड़ने जा रही है। इससे किसानों को खेती के साथ-साथ बिजली उत्पादन से भी आमदनी हासिल करने का अवसर मिलेगा। इस परियोजना में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि भूमि का मालिकाना हक पूरी तरह किसानों के पास ही सुरक्षित रहे।

एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 कब और कहाँ आयोजित होगा?

एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 का आयोजन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के नीति निर्माता, शोधकर्ता, उद्योगपति और किसान हिस्सा लेंगे। उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस सम्मेलन के आधिकारिक लोगो और टीज़र का अनावरण किया। इसके साथ ही “फार्म टू फोर्क इनोवेशन को बढ़ावा देना” विषय पर आधारित एग्रीवोल्टिक्स पिच हब की भी घोषणा की गई, जिसमें नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) को ज्ञान भागीदार बनाया गया है।

किसानों को कैसे मिलेगा तीन स्रोतों से मुनाफा

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एक किसान एक ही एकड़ भूमि से कुल तीन अलग-अलग स्रोतों के माध्यम से आय अर्जित कर सकता है। इसमें मुख्य रूप से फसल की बिक्री से होने वाली कमाई, विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्काॅम) को अतिरिक्त सौर बिजली बेचने से मिलने वाला पैसा और डीजल के उपयोग पर होने वाली बचत शामिल है। भारत में 85 प्रतिशत से अधिक किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं जो दो हेक्टेयर से कम भूमि पर खेती करते हैं। कृषि-ऊर्ध्वाधर तकनीक के माध्यम से किसानों को फसल उगाने और सौर ऊर्जा उत्पादन में से किसी एक को चुनने की मजबूरी नहीं होगी, बल्कि वे एक ही जमीन पर दोनों काम एक साथ कर सकेंगे।

पीएम-कुसुम योजना और सौर ऊर्जा की प्रगति

सरकार की विभिन्न सौर पहलों से ग्रामीण इलाकों में तेजी से बदलाव आ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) के तहत लगभग 29 लाख पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा चुका है।
  • भारत ने पिछले वर्ष कुल 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो कई विकसित देशों की कुल स्थापित बिजली क्षमता से अधिक है।
  • विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा का योगदान पिछले वर्ष 16.3 गीगावाट रहा, जिसमें पीएम-कुसुम का हिस्सा 7.6 गीगावाट था।
  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से छत पर सौर ऊर्जा लगाने से 8.7 गीगावाट का उत्पादन हुआ है जिससे 56 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं।
  • देशभर में कौशल विकास अभियान के तहत लगभग 70,000 सूर्य मित्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

एग्रीवोल्टिक्स तकनीक और शोध की जरूरत

विभिन्न फसलों, मौसम और भौगोलिक क्षेत्रों के हिसाब से सबसे उपयुक्त तकनीक चुनने के लिए कृषि-वोल्टेइक क्षेत्र में व्यापक शोध की आवश्यकता है। पुणे स्थित बीएआईएफ (BAIF) के ग्रामीण नवाचार केंद्र का उदाहरण देते हुए मंत्री ने बताया कि शोधकर्ता वर्तमान में 30 विभिन्न फसलों पर 17 सौर प्रणालियों का परीक्षण कर रहे हैं। इससे यह तय करने में मदद मिलती है कि फसल की ऊंचाई, पैनल का अंतराल और व्यावसायिक मॉडल का सही संयोजन क्या होना चाहिए। इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर फसल-वार डेटा संकलन पर जोर दिया जा रहा है ताकि लागत को कम किया जा सके।

वैश्विक दक्षिण के लिए एक नया मॉडल

भारत का यह कृषि-वोल्टेइक अनुभव वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के उन तमाम विकासशील देशों के लिए बेहद प्रासंगिक साबित हो सकता है जहाँ किसानों के पास छोटे खेत हैं और बिजली ग्रिड अभी भी विकास के दौर से गुजर रहे हैं। भारत के पास व्यापक भौगोलिक दायरा है, जो किफायती और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का बड़ा अवसर देता है। आगामी एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन में इन सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा, जिससे कृषि और सौर ऊर्जा के एकीकरण को वैश्विक स्तर पर एक नई दिशा मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 का आयोजन कहाँ होगा? उत्तर। यह सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।

प्रश्न? पीएम-कुसुम योजना के तहत अब तक कितने पंप सौर ऊर्जा से संचालित हुए हैं? उत्तर। इस योजना के तहत लगभग 29 लाख पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा चुका है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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