
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में सीआईआई सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत में अपशिष्ट प्रबंधन और रीसाइक्लिंग ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सम्मेलन को संबोधित किया।
- भारत में अब तक विनियमित अपशिष्ट श्रेणियों के अंतर्गत लगभग 499.60 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) ढांचे के तहत 86,043 से अधिक उत्पादक और 4,880 रीसाइकलर पंजीकृत हैं।
- कचरा प्रबंधन के नियमों के तहत प्लास्टिक, बैटरी, ई-कचरा, पुराने टायर और ठोस कचरे समेत नौ तरह के अपशिष्टों के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के चक्रीय अर्थव्यवस्था यानी सर्कुलर इकोनॉमी पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित किया। पीआईबी के अनुसार, उन्होंने देश में रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार, उद्योग जगत और शहरी स्थानीय निकायों के बीच आपसी समन्वय को बेहद जरूरी बताया है।
सर्कुलर इकोनॉमी क्या है और यह क्यों जरूरी है?
सर्कुलर इकोनॉमी एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जिसमें संसाधनों का बार-बार उपयोग किया जाता है, कचरे को कम किया जाता है और उत्पादों के जीवनचक्र को बढ़ाया जाता है। भारत सरकार इस दिशा में लगातार नीतिगत सुधार कर रही है ताकि पारंपरिक रेखीय अर्थव्यवस्था से हटकर टिकाऊ विकास को गति दी जा सके।
श्री यादव ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कानूनी ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसके तहत कुल नौ श्रेणियों के कचरे के लिए विशेष नियम तय किए गए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य उत्पादों के उपयोग के बाद रीसाइक्लिंग, पुन: उपयोग और संसाधनों की रिकवरी करना है।
अपशिष्ट प्रबंधन और ईपीआर ढांचे के आंकड़े
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के ठोस परिणाम भी सामने आने लगे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार:
- विनियमित अपशिष्ट श्रेणियों के अंतर्गत अब तक लगभग 499.60 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) ढांचे के तहत देश भर में 86,043 से अधिक उत्पादक पंजीकृत हैं।
- इस ढांचे के अंतर्गत पंजीकृत रीसाइकलर्स की संख्या 4,880 से अधिक हो चुकी है।
- प्लास्टिक, बैटरी, ई-कचरा, पुराने टायर, इस्तेमाल हुआ तेल और निर्माण कचरे सहित नौ प्रकार के कचरे शामिल हैं।
उद्योग जगत और स्थानीय निकायों की भूमिका
पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल नियमों के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ यानी LiFE पहल का पालन करना होगा, जो संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की वकालत करती है। उन्होंने डिजिटल अनुपालन और ईपीआर बाजार संचालन से जुड़ी उद्योग जगत की चिंताओं को दूर करने के लिए खुले संवाद पर जोर दिया।
ठोस कचरा प्रबंधन नियमों पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि कचरे को गीले, सूखे, सैनिटरी और विशेष ध्यान देने योग्य श्रेणियों में अलग करना आवश्यक है। शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिरता और तकनीक अपनाने से लेगेसी वेस्ट यानी पुराने कचरे के पहाड़ों को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? सर्कुलर इकोनॉमी सम्मेलन का आयोजन कहाँ किया गया था?
उत्तर। यह सम्मेलन नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित किया गया था।
प्रश्न? ईपीआर ढांचे के तहत कितने रीसाइकलर पंजीकृत हैं?
उत्तर। विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व ढांचे के तहत 4,880 से अधिक रीसाइकलर पंजीकृत हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






