
भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के दौरान देश का कुल सॉफ्टवेयर निर्यात 221.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया है जिसमें अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार 2025-26 में सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात 8.2 प्रतिशत बढ़कर 221.4 अरब डॉलर हो गया।
- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) 54.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा।
- सॉफ्टवेयर सेवाओं का मुख्य हिस्सा यानी 91.7 प्रतिशत ऑफ-साइट मोड के जरिए प्रदान किया गया।
- अमेरिकी डॉलर (USD) 72.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे प्रमुख चालान मुद्रा रही।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (ITES) के वार्षिक सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत का सॉफ्टवेयर निर्यात 221.4 अरब डॉलर (लगभग 19,55,947 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है।
सॉफ्टवेयर निर्यात 2025-26
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं का कुल निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 8.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 221.4 अरब डॉलर हो गया। इस सर्वेक्षण के लिए कुल 7,569 सॉफ्टवेयर निर्यात करने वाली कंपनियों से संपर्क किया गया था जिनमें से 2,363 कंपनियों ने अपने आंकड़े दर्ज कराए।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार इस सर्वेक्षण में शामिल इन कंपनियों ने कुल अनुमानित सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा कवर किया है। कंप्यूटर सेवाओं ने इस दौरान देश के कुल सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा अपने नाम किया जिसमें आईटी सेवाएं प्रमुख रहीं।
कंपनियों और सेवाओं की श्रेणी
निजी लिमिटेड कंपनियों ने 2025-26 के दौरान 9.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज करते हुए सॉफ्टवेयर निर्यात में अपना दबदबा बनाए रखा। सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों और सीमित देयता भागीदारी (LLP) फर्मों ने भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- कंप्यूटर सेवाओं का कुल निर्यात 153.4 अरब डॉलर रहा, जिसमें आईटी सेवाओं की हिस्सेदारी 147.0 अरब डॉलर थी।
- बीपीओ (BPO) सेवाओं का कुल निर्यात 56.0 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
- इंजीनियरिंग सेवाओं का निर्यात बढ़कर 12.0 अरब डॉलर हो गया।
- सॉफ्टवेयर उत्पादों का विकास 6.4 अरब डॉलर रहा।
प्रमुख गंतव्य देश और मुद्रा
अमेरिका भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार बना रहा जिसकी कुल हिस्सेदारी 54.1 प्रतिशत (119.7 अरब डॉलर) दर्ज की गई। इसके बाद यूरोपीय देशों की हिस्सेदारी 31.8 प्रतिशत रही जिसमें ब्रिटेन की प्रमुख भूमिका रही।
भारतीय सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए अमेरिकी डॉलर (USD) मुख्य चालान मुद्रा बनी रही जिसकी हिस्सेदारी 72.6 प्रतिशत थी। इसके बाद यूरो (EUR), भारतीय रुपया (INR) और पाउंड स्टर्लिंग (GBP) का स्थान रहा। अधिकांश सॉफ्टवेयर सेवाएं यानी 91.7 प्रतिशत ऑफ-साइट मोड के जरिए पहुंचाई गईं।
विदेशी सहयोगियों का कारोबार
भारतीय कंपनियों की विदेशी सहायक इकाइयों द्वारा स्थानीय स्तर पर किया जाने वाला सॉफ्टवेयर कारोबार 2025-26 में बढ़कर 17.9 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष 13.9 अरब डॉलर था। इसमें भी अमेरिका और ब्रिटेन प्रमुख बाजार बने रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? वर्ष 2025-26 में भारत का सॉफ्टवेयर निर्यात कितना रहा?
उत्तर। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 2025-26 में भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात 8.2 प्रतिशत बढ़कर 221.4 अरब डॉलर हो गया।
प्रश्न? सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए सबसे बड़ा देश कौन सा है?
उत्तर। संयुक्त राज्य अमेरिका 54.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारतीय सॉफ्टवेयर निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






