
मणिपुर के इम्फाल पश्चिम की रहने वाली 37 वर्षीय नर्सिंग पेशेवर लीना ने राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना के तहत समर्थित केंद्र से नई जिंदगी पाई है।
मुख्य बातें
- लीना (बदला हुआ नाम) मणिपुर के इम्फाल पश्चिम की रहने वाली 37 वर्षीय नर्सिंग पेशेवर हैं।
- उन्होंने 9 मई 2024 को इम्फाल पश्चिम स्थित स्नेहा भवन से उपचार और पुनर्वास सहायता प्राप्त की थी।
- राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना और एनएपीडीडीआर योजना के तहत यह मदद दी गई।
- लीना अब एक नर्सिंग व्याख्याता के रूप में अपना करियर फिर से शुरू कर चुकी हैं।
नशा मुक्ति के जरिए समय पर उपचार, परामर्श, परिवार का स्नेह और निरंतर पुनर्वास सहायता लोगों को नशीले पदार्थों की लत से उबरने में मदद करती है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, मणिपुर के इम्फाल पश्चिम की रहने वाली 37 वर्षीय नर्सिंग पेशेवर लीना ने नशा मुक्ति की राह अपनाकर अपने जीवन को फिर से संवार लिया है। पति से अलग होने के बाद उपजे अकेलेपन और तनाव के कारण उन्होंने नशे का सहारा लेना शुरू कर दिया था। नर्सिंग में एमएससी की डिग्री होने के बावजूद इस लत ने उनके मानसिक स्वास्थ्य और करियर को गहरी चोट पहुंचाई थी।
नशा मुक्ति और स्नेहा भवन की भूमिका
राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना के तहत मणिपुर के इम्फाल पश्चिम स्थित स्नेहा भवन केंद्र ने लीना को नशा मुक्ति की राह दिखाई। 9 मई 2024 को उन्हें इस केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें चिकित्सा देखभाल, स्वास्थ्य निगरानी, व्यक्तिगत परामर्श, समूह चिकित्सा और मनोसामाजिक सहायता दी गई। मादक पदार्थों के इस्तेमाल में अंकुश लगाने की योजना यानी एनएपीडीडीआर के समर्थन से चलने वाले इस केंद्र ने उन्हें जीवन कौशल शिक्षा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों से जोड़ा।
नशा मुक्ति के बाद कैसे बदला लीना का जीवन
नशा मुक्ति के बाद लीना के जीवन में सकारात्मक व्यावहारिक परिवर्तन आए और उन्होंने भावनाओं के आवेग संभालने के स्वस्थ तरीके सीखे। व्यवस्थित और मददगार माहौल ने उन्हें अनुशासन और भावनात्मक स्थिरता हासिल करने में मदद की। आज वह एक नर्सिंग व्याख्याता के रूप में अपने पेशेवर जीवन में लौट चुकी हैं। उनकी नियमित आय का स्रोत बहाल हो गया है और आर्थिक स्वतंत्रता मिलने से उनके जीवन की समग्र गुणवत्ता में बड़ा सुधार आया है।
नशा मुक्ति अभियान और एनएपीडीडीआर योजना की जानकारी
भारत सरकार मादक पदार्थों के सेवन के खतरे से निपटने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाती है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना और एनएपीडीडीआर योजना के तहत देश भर में ऐसे पुनर्वास केंद्रों को सहायता दी जाती है। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को चिकित्सीय सहायता के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श देना है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।
आम आदमी पर इस नशा मुक्ति पहल का असर
इस तरह की पहल समाज के उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है जो अपने किसी सदस्य की नशे की लत से जूझ रहे हैं। पेशेवर देखभाल और पारिवारिक सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति गंभीर मानसिक और शारीरिक संकट से बाहर निकल सकता है। लीना की यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही समय पर सही सलाह मिलने से अंधेरे जीवन को फिर से रोशन किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? लीना को किस नशा मुक्ति केंद्र से सहायता मिली थी। उत्तर। उन्हें इम्फाल पश्चिम स्थित स्नेहा भवन केंद्र से उपचार मिला था।
प्रश्न? यह सहायता किस योजना के तहत दी गई थी। उत्तर। यह मदद राष्ट्रीय नशा मुक्ति कार्य योजना और एनएपीडीडीआर के तहत दी गई थी।
प्रश्न? लीना अब क्या काम कर रही हैं। उत्तर। वह अपनी पुरानी नौकरी पर लौट चुकी हैं और अब एक नर्सिंग व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






