
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने कार्यस्थल और जन-भागीदारी में सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए 17 सितंबर 2026 से अभियान शुरू किया है।
मुख्य बातें
- ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने 17 सितंबर 2026 से ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का आरंभ किया।
- विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने स्वच्छता को आचरण और सामूहिक उत्तरदायित्व का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
- अभियान में प्लास्टिक अपशिष्ट और ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक कचरा) के सुरक्षित व उत्तरदायी निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों को अनुपयोगी वस्तुओं के रीसायकल और पुनः उपयोग के निर्देश दिए गए।
स्वच्छता ही सेवा पहल की औपचारिक शुरुआत 17 सितंबर 2026 को ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) द्वारा की गई। इस राष्ट्रव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन, सफाई तथा जनसेवा की भावना को सुदृढ़ बनाना है। विभाग ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यस्थल परिसर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
स्वच्छता ही सेवा अभियान एक राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर के सरकारी मंत्रालयों, सार्वजनिक स्थानों और समुदायों में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना है। भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के तहत प्लास्टिक कचरे और ई-वेस्ट के सही निपटान, सर्कुलर इकोनॉमी को अपनाने तथा स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह पहल केवल दफ्तरों की ऊपरी सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। इसका लक्ष्य लोगों में कचरा न फैलाने और अपशिष्ट को सही जगह फेंकने की प्रवृत्ति विकसित करना है। विभाग का मानना है कि जब तक हर नागरिक सफाई व्यवस्था में खुद योगदान नहीं देगा, तब तक टिकाऊ बदलाव संभव नहीं है।
सचिव नरेंद्र भूषण ने दिया सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
अभियान के अवसर पर भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने सफाई और सार्वजनिक सहभागिता पर विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता का दायरा केवल अपने निजी स्थान को साफ रखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन सभी साझा स्थानों की देखरेख करना हमारी जिम्मेदारी है जिनका उपयोग समाज करता है।
नरेंद्र भूषण ने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता को अपने दैनिक आचरण में शामिल करेगा, तभी इस अभियान का वास्तविक परिणाम दिखाई देगा। उन्होंने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे केवल सफाई कर्मचारियों के भरोसे रहने के बजाय खुद कचरा न फैलाने, अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखने और कचरे के उत्तरदायी प्रबंधन में भागीदारी निभाएं। इससे स्वस्थ भारत के निर्माण में मदद मिलेगी।
स्वच्छता ही सेवा के तहत ई-वेस्ट और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर जोर
इस वर्ष के अभियान में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) और प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। आधुनिक कार्यालयों और घरों में बड़ी मात्रा में खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्लास्टिक की वस्तुएं जमा हो जाती हैं। यदि इनका सही तरीके से निपटान न किया जाए, तो ये पर्यावरण के लिए बड़ा संकट बन सकते हैं।
भूमि संसाधन विभाग ने अपने कार्मिकों को सलाह दी है कि वे अपने कार्यालयों और घरों में पड़ी पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं की पहचान करें। इसके बाद उन वस्तुओं की मरम्मत, रीसायकल या उत्तरदायी निस्तारण के उपाय तलाशें। इस प्रक्रिया से सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती मिलती है और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होता है।
सर्कुलर इकोनॉमी और अपशिष्ट निस्तारण का नया मॉडल
अपशिष्ट प्रबंधन में सर्कुलर इकोनॉमी का अर्थ कचरे को संसाधन में बदलना है। इस प्रक्रिया में वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका दोबारा उपयोग किया जाता है या उन्हें रीसायकल करके नई वस्तुएं बनाई जाती हैं। भूमि संसाधन विभाग ने प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जो इस मॉडल की उपयोगिता को दर्शाते हैं।
विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्लास्टिक के कचरे को कम से कम उत्पन्न करना और उसे सही रीसायकल चैनल तक पहुंचाना प्राथमिक कर्तव्य होना चाहिए। जब पुरानी सामग्री का रीसायकल होता है, तो नए कच्चे माल की आवश्यकता कम हो जाती है और ऊर्जा की बचत होती है।
भूमि संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली और सामाजिक जिम्मेदारी
ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत आने वाला भूमि संसाधन विभाग (DoLR) मुख्य रूप से देश में भूमि सुधार, डिजिटल लैंड रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम और जलागम (वाटरशेड) विकास परियोजनाओं के संचालन के लिए जाना जाता है। विभाग का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संसाधनों के कुशल प्रबंधन और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
ऐसे विभाग द्वारा स्वच्छता अभियान का नेतृत्व करना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक कार्यकुशलता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। स्वच्छ कार्यस्थल से कर्मचारियों की कार्यक्षमता में सुधार होता है और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होती है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान की मुख्य विशेषताएं
- 17 सितंबर 2026 से अभियान का देशव्यापी आगाज।
- कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियानों का नियमित आयोजन।
- ई-वेस्ट और प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण और रीसायकल पर विशेष ध्यान।
- कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा दैनिक जीवन में कचरा कम उत्पन्न करने की आदतों को अपनाना।
- सार्वजनिक स्थलों की सफाई में अधिकारियों की सीधी भागीदारी और जन-जागरूकता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: भूमि संसाधन विभाग ने स्वच्छता ही सेवा अभियान कब शुरू किया? उत्तर: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने 17 सितंबर 2026 से स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत की है।
प्रश्न: स्वच्छता ही सेवा अभियान का मुख्य ध्यान किन कचरा श्रेणियों पर है? उत्तर: इस अभियान में विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे और इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के सुरक्षित और उत्तरदायी प्रबंधन पर बल दिया जा रहा है।
प्रश्न: इस अभियान में सर्कुलर इकोनॉमी की क्या भूमिका है? उत्तर: सर्कुलर इकोनॉमी के तहत अनुपयोगी वस्तुओं की मरम्मत, रीसायकल और पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है ताकि कचरा कम उत्पन्न हो और पर्यावरण सुरक्षित रहे।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






