
भारतीय रिज़र्व बैंक ने एफसीएनआर (बी) और एनआरई जमाराशियों के एवज में मिलने वाली एएनबीसी छूट की अंतिम तिथि 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) गणना नियमों में तीसरा संशोधन जारी किया।
- एफसीएनआर (बी) और एनआरई जमाराशियों के एवज में अग्रिमों पर एएनबीसी छूट की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 की गई।
- पूर्व में 7 अगस्त 2026 को जारी निर्देश में यह समय सीमा 30 सितंबर 2026 तय की गई थी।
- यह संशोधन 11 सितंबर 2026 से तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आरबीआई पीएसएल नियम में संशोधन करते हुए बैंकों के लिए प्राथमिक क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) की गणना से जुड़ी समय सीमा में फेरबदल किया है। रिज़र्व बैंक द्वारा 11 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर-बी) और गैर-आवासीय बाहरी (एनआरई) जमा के आधार पर दिए जाने वाले अग्रिमों को एडजस्टेड नेट बैंक क्रेडिट (ANBC) की गणना से बाहर रखने की अंतिम तिथि को 30 सितंबर 2026 से घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दिया गया है।
आरबीआई पीएसएल नियम 2026 में क्या बदलाव हुआ है?
आरबीआई पीएसएल नियम 2026 के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों द्वारा एफसीएनआर (बी) और एनआरई जमाराशियों के आधार पर दिए गए ऋणों पर मिलने वाली एएनबीसी छूट की समय सीमा घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है। रिज़र्व बैंक ने समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है। पहले बैंकों को 30 सितंबर 2026 तक जुटाई गई इन जमाराशियों पर एएनबीसी छूट का लाभ मिल रहा था।
एएनबीसी छूट और संशोधित समय सीमा का विस्तृत विवरण
भारतीय रिज़र्व बैंक की मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी निशा नांबियार की ओर से जारी परिपत्र (संख्या: RBI/2026-27/256) के मुताबिक, 7 अगस्त 2026 को जारी द्वितीय संशोधन दिशा-निर्देशों में आंशिक बदलाव किया गया है। 7 अगस्त के सर्कुलर में यह व्यवस्था दी गई थी कि भारत में दिए गए निम्नलिखित अग्रिमों को बैंकों के एएनबीसी की गणना से अलग रखा जाएगा:
- एफसीएनआर (बी) जमाराशियां: 8 जून 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच 3 से 5 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई या नवीनीकृत की गई नई एफसीएनआर (बी) जमाराशियां।
- एनआरई मियादी जमाराशियां: 19 जून 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच 3 वर्ष या उससे अधिक समय के लिए जुटाई गई या परिपक्वता पर नवीनीकृत एनआरई मियादी जमाराशियां।
अब समीक्षा के बाद रिज़र्व बैंक ने इन दोनों तरह के डिपॉजिट के लिए निर्धारित समय सीमा ’30 सितंबर 2026′ को संशोधित करके ’31 अगस्त 2026′ कर दिया है। इसका सीधा अर्थ है कि 31 अगस्त 2026 के बाद बैंकों द्वारा जुटाई गई ऐसी जमाराशियों के आधार पर दिए जाने वाले अग्रिमों को एएनबीसी कटौती का लाभ नहीं मिलेगा।
बैंकिंग प्रणाली और बैंकों के पीएसएल लक्ष्यों पर असर
एडजस्टेड नेट बैंक क्रेडिट यानी एएनबीसी वह आधार राशि होती है जिसके आधार पर रिज़र्व बैंक किसी भी बैंक के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) का लक्ष्य तय करता है। नियमों के मुताबिक भारत में कार्यरत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को अपने एएनबीसी का एक तय हिस्सा (जैसे 40 प्रतिशत) कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), शिक्षा, आवास और कमजोर वर्गों को ऋण के रूप में देना अनिवार्य होता है।
जब रिज़र्व बैंक किसी विशेष जमा या अग्रिम को एएनबीसी की गणना से बाहर रखता है, तो बैंक का कुल एएनबीसी आधार घट जाता है। इससे बैंक पर अनिवार्य पीएसएल का कुल आंकड़ा भी कम हो जाता है। आरबीआई पीएसएल नियम में छूट की अवधि 30 सितंबर के बजाय 31 अगस्त तक सीमित होने से सितंबर महीने में जुटाई गई एनआरआई जमाराशियों पर बैंकों को एएनबीसी में छूट नहीं मिलेगी। इससे बैंकों को सितंबर माह के दौरान अपनी पीएसएल जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए नियमित प्राथमिक क्षेत्रों में अधिक ऋण बांटना होगा।
सीआरआर और एसएलआर की शर्तों के साथ समन्वय
रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता क्षेत्र के लक्ष्यों की गणना के लिए एएनबीसी से हटाई जाने वाली राशि नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) से छूट के लिए पात्र एफसीएनआर (बी) या एनआरई जमाराशियों की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि रिज़र्व बैंक ने 8 जून 2026, 19 जून 2026 और 25 अगस्त 2026 को जारी दिशा-निर्देशों के तहत इन विशिष्ट एनआरआई जमाराशियों को सीआरआर और एसएलआर बनाए रखने की अनिवार्य शर्त से राहत दी थी। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ावा देना और घरेलू बैंकिंग में तरलता की स्थिति को संतुलित करना था। उसी कड़ी में एएनबीसी में दी गई राहत की तारीखों में अब सामंजस्य बिठाया गया है।
संशोधन की प्रभावी तिथि और निर्देश
यह तीसरा संशोधन दिशा-निर्देश जारी होने की तिथि यानी 11 सितंबर 2026 से ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। रिज़र्व बैंक ने प्राथमिक क्षेत्र ऋण से संबंधित अपनी मास्टर डायरेक्शंस (Reserve Bank of India Priority Sector Lending Targets and Classification Directions, 2025 – Updated as on August 07, 2026) को तदनुसार अपडेट कर दिया है। सभी पात्र वाणिज्यिक बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी रिपोर्टिंग और एएनबीसी गणना इसी संशोधित तिथि के आधार पर सुनिश्चित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: आरबीआई पीएसएल नियम 2026 में क्या बदलाव हुआ है?
उत्तर: रिज़र्व बैंक ने एफसीएनआर (बी) और एनआरई जमाराशियों पर एएनबीसी (ANBC) छूट पाने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 से घटाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है।
प्रश्न: एएनबीसी से छूट मिलने पर बैंकों को क्या फायदा होता है?
उत्तर: एएनबीसी से राशि बाहर होने पर बैंक का कुल एएनबीसी आधार घट जाता है, जिससे प्राथमिकता क्षेत्र (कृषि, एमएसएमई आदि) में दिए जाने वाले अनिवार्य ऋण का कुल लक्ष्य भी कम हो जाता है।
प्रश्न: रिज़र्व बैंक का यह नया संशोधन किस तारीख से लागू है?
उत्तर: यह संशोधन 11 सितंबर 2026 को जारी होने के साथ ही तुरंत प्रभाव से लागू हो चुका है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






