
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लखीमपुर खीरी के कबीरधाम आश्रम में कबीर स्मृति भवन का भूमि पूजन किया और लोकतंत्र में संयम तथा परस्पर सम्मान की जरूरत बताई।
मुख्य बातें
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में कबीर स्मृति भवन की आधारशिला रखी।
- समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और संत असंग देव जी महाराज उपस्थित रहे।
- ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन वैचारिक असहमति के दौरान वाणी में संयम और परस्पर सम्मान जरूरी है।
- कबीर स्मृति भवन संत कबीर के विचारों, अमर वाणी और साहित्यिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित कबीरधाम आश्रम में आयोजित संत कबीर महोत्सव के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कबीर स्मृति भवन का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। 28 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने बल दिया कि लोकतंत्र में विचारों और दृष्टिकोणों में भिन्नता होना स्वाभाविक है, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय परस्पर सम्मान और गरिमा सदैव बनी रहनी चाहिए। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, उन्होंने संत कबीर के संदेशों को सामाजिक समरसता के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
संत कबीर महोत्सव का क्या है मुख्य उद्देश्य?
संत कबीर महोत्सव का मुख्य उद्देश्य 15वीं शताब्दी के महान संत कबीर की सामाजिक समानता, करुणा और सद्भाव की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। लखीमपुर खीरी के कबीरधाम आश्रम में आयोजित इस समारोह के दौरान कबीर स्मृति भवन की आधारशिला रखी गई। यह नया भवन संत कबीर की अमर वाणी, साहित्यिक विरासत और लोकमंगल के संदेश को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने और प्रसारित करने का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
लोकतंत्र में असहमति और वाणी के संयम पर ओम बिरला का संदेश
समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संत कबीर का करुणा, समानता और सामाजिक समरसता का संदेश छह शताब्दियों के बाद भी भारतीय समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। हालांकि, सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में संवाद करते समय भाषा का संयम, नैतिक आचरण और दूसरों के प्रति सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।
बिरला ने कहा कि जिस समय भारतीय समाज जातिगत भेदभाव, धार्मिक मतभेदों और सामाजिक पूर्वाग्रहों में बंटा हुआ था, उस दौर में संत कबीर ने प्रचलित रूढ़ियों को सीधी चुनौती दी। उन्होंने आम लोगों की सरल भाषा में रचित दोहों के जरिए सत्य, अहिंसा, समानता और सदाचरण का संदेश दिया। संत कबीर की शिक्षाओं का प्रसार समाज में संवेदनशीलता और आपसी समझ को बढ़ाता है।
कबीर स्मृति भवन का शिलान्यास और इसका सामाजिक महत्व
लखीमपुर खीरी के कबीरधाम आश्रम में कबीर स्मृति भवन का शिलान्यास पूज्य संत असंग देव जी महाराज के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर संपन्न हुआ। ओम बिरला ने विश्वास जताया कि यह संस्थान संत कबीर के आध्यात्मिक ज्ञान, जन-केंद्रित दृष्टिकोण और तर्कपूर्ण विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में बड़ा योगदान देगा।
यह भवन संत कबीर की वाणी और नैतिक मूल्यों को आलोकित करेगा, जिससे एक समरस और सशक्त समाज की नींव मजबूत होगी। इस संस्थान के माध्यम से शोधार्थियों, श्रद्धालुओं और युवाओं को संत कबीर के जीवन दर्शन को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
यह भी जानें: आत्मचिंतन और संत कबीर के विचारों की प्रासंगिकता
संबोधन के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय; जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दूसरों में कमियां या दोष ढूंढने के बजाय हर व्यक्ति को अपने आचरण और अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए। आत्मचिंतन करने से व्यक्ति के भीतर विनम्रता, विवेक और करुणा का भाव विकसित होता है।
बिरला ने आगे कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद या प्रतिष्ठा से तय नहीं होती, बल्कि उसके कर्मों और समाज के प्रति उसके योगदान से निर्धारित होती है। संत कबीर का सादगीपूर्ण जीवन, निष्काम सेवा और दूसरों के कल्याण के लिए समर्पण आज के आधुनिक समय में भी प्रेरणा का स्रोत है।
संत कबीर महोत्सव कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु
लखीमपुर खीरी में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य जानकारियां निम्नलिखित हैं:
- आयोजन स्थल: कबीरधाम आश्रम, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश।
- मुख्य अतिथि: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।
- विशिष्ट अतिथि: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और संत असंग देव जी महाराज।
- मुख्य कार्य: कबीर स्मृति भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास।
- आयोजन की तिथि: 28 अक्टूबर 2026।
- प्रमुख संदेश: वाणी में संयम, आत्मचिंतन, सामाजिक समरसता और वैचारिक भिन्नता के बावजूद परस्पर सम्मान।
संतों का योगदान और समाज सेवा का संकल्प
ओम बिरला ने संत असंग देव जी महाराज के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने भारत और विदेश के विभिन्न हिस्सों में संत कबीर की शिक्षाओं के प्रसार और समाज सेवा में उनके आजीवन समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्याग, अनुशासन और निःस्वार्थ भाव से जीने वाले संतों का जीवन पूरे समाज को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
समारोह में उपस्थित उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कबीर के विचारों को देश की सांस्कृतिक धरोहर बताया। ओम बिरला ने सभी उपस्थित लोगों से संत कबीर के संदेशों को अपने जीवन में उतारने और दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? संत कबीर महोत्सव 2026 का आयोजन कहां हुआ?
उत्तर। इस महोत्सव का आयोजन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित कबीरधाम आश्रम में 28 अक्टूबर 2026 को किया गया।
प्रश्न? कबीर स्मृति भवन की आधारशिला किसने रखी?
उत्तर। कबीर स्मृति भवन का शिलान्यास लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उपस्थिति में किया।
प्रश्न? संत कबीर के विचारों का लोकतंत्र में क्या महत्व है?
उत्तर। संत कबीर के विचार लोकतंत्र में वैचारिक मतभेदों के बावजूद वाणी में संयम, आत्मचिंतन और परस्पर सम्मान बनाए रखने की सीख देते हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






