रविवार, नवम्बर 1, 2026

विद्यांजलि योजना के तहत गुरुग्राम में राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन आयोजित

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विद्यांजलि योजना

हरियाणा के गुरुग्राम में शिक्षा मंत्रालय ने विद्यांजलि योजना के तहत राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें राज्यों और कंपनियों ने स्कूलों के विकास की रणनीति साझा की।

मुख्य बातें

  • शिक्षा मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम में विद्यांजलि सीएसआर सम्मेलन आयोजित किया।
  • सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम और दिल्ली ने अपने उत्कृष्ट कार्यान्वयन मॉडल प्रस्तुत किए।
  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और भारती एयरटेल जैसी प्रमुख कंपनियों ने तकनीकी सत्रों में हिस्सा लिया।
  • विद्यांजलि पोर्टल पर सीएसआर और स्कूल अंगीकरण मॉड्यूल के माध्यम से सीधे संसाधन दान किए जा सकते हैं।

विद्यांजलि योजना के माध्यम से देश भर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) ने हरियाणा के गुरुग्राम में ‘विद्यांजलि के माध्यम से स्कूली शिक्षा हेतु राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सम्मेलन’ का आयोजन 31 अक्टूबर 2026 को किया। इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार, विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, कॉर्पोरेट घरानों और कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विद्यांजलि योजना क्या है और यह कैसे काम करती है?

विद्यांजलि योजना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की एक पहल है, जो सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को कॉर्पोरेट जगत तथा व्यक्तिगत स्वयंसेवकों से जोड़ती है। इसके माध्यम से निजी कंपनियां अपने सीएसआर फंड से स्कूलों में भौतिक सुविधाएं, डिजिटल संसाधन और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराती हैं।

इसके अंतर्गत दो प्रमुख मॉडल काम करते हैं— पहला सीएसआर (CSR) मॉड्यूल और दूसरा स्कूल अंगीकरण (स्कूल अडॉप्शन) मॉड्यूल। इन दोनों माध्यमों से कॉर्पोरेट संगठन सीधे विद्यालयों की वास्तविक जरूरतों की पहचान करते हैं और उन्हें बुनियादी ढांचे से लेकर आधुनिक तकनीक तक की सहायता उपलब्ध कराते हैं।

सीएसआर-राज्य संवाद से मजबूत होगी नेटवर्किंग

गुरुग्राम में आयोजित इस सम्मेलन का सबसे प्रमुख घटक ‘सीएसआर-राज्य संवाद’ रहा। इस विशेष सत्र में कॉर्पोरेट कंपनियों, राज्य नोडल अधिकारियों, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (PMU) तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के प्रतिनिधियों ने एक साथ विचार-विमर्श किया।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस संवाद का मुख्य उद्देश्य राज्यों की जमीनी आवश्यकताओं और कॉर्पोरेट कंपनियों के सामाजिक उत्तरदायित्व कोष (CSR Fund) के बीच बेहतर तालमेल बैठाना था। इसके जरिए राज्यों ने अपने विद्यालयों की सूची और उनकी प्रमुख आवश्यकताओं को कंपनियों के सामने रखा, ताकि भावी परियोजनाओं के लिए सीधी साझेदारी की जा सके।

विभिन्न राज्यों ने प्रस्तुत किए विद्यांजलि योजना के सफल मॉडल

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए सफल प्रयोगों को साझा किया:

  • आंध्र प्रदेश: राज्य ने अपने यहां विद्यांजलि के जमीनी स्तर पर सफल कार्यान्वयन और निगरानी तंत्र का ब्योरा प्रस्तुत किया।
  • कर्नाटक: कर्नाटक सरकार ने ‘स्कूल गोद लेने’ (स्कूल अडॉप्शन) की प्रक्रिया और उससे विद्यालयों के भौतिक विकास में आए बदलावों को रेखांकित किया।
  • मिजोरम: मिजोरम ने पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय नागरिकों के योगदान की भूमिका पर प्रस्तुति दी।
  • दिल्ली: दिल्ली के प्रतिनिधियों ने विद्यांजलि के तहत किए गए नवाचारों, डिजिटल गतिविधियों तथा अनुभवात्मक शिक्षण पहलों की जानकारी दी।

एसबीआई और भारती एयरटेल की तकनीकी सत्रों में भूमिका

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में देश की अग्रणी कॉर्पोरेट संस्थाओं और बैंकों ने अपने अनुभव साझा किए। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और भारती एयरटेल जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे किस तरह अपने सीएसआर कोष का उपयोग स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधारने में कर रहे हैं।

इन कंपनियों की प्रस्तुतियों में बताया गया कि वे सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, पेयजल सुविधाएं, शौचालय निर्माण, कंप्यूटर लैब और खेलकूद के उपकरण उपलब्ध करा रही हैं। इसके अलावा चाइल्डफंड इंडिया, सार्ड इंडिया, इंस्पायरिंग सीनियर्स फाउंडेशन और ईटीआई फाउंडेशन जैसी कार्यान्वयन एजेंसियों ने भी अपने अनुभव साझा किए कि वे कैसे कॉर्पोरेट और स्कूलों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम कर रही हैं।

सम्मेलन में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अपर सचिव सुश्री अर्चना शर्मा अवस्थी और आर्थिक सलाहकार सुश्री ए. श्रीजा सहित शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

विद्यांजलि पोर्टल पर कैसे काम करता है CSR मॉड्यूल?

विद्यांजलि पोर्टल का डिजिटल ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि देश का कोई भी सरकारी स्कूल अपनी कमी या जरूरत को सीधे पोर्टल पर दर्ज कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी स्कूल को 20 कंप्यूटर, ब्लैकबोर्ड या फिर पेयजल फिल्टर की आवश्यकता है, तो वह इसकी मांग दर्ज करता है।

कंपनी अधिनियम 2013 के तहत निर्धारित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) नियमों के अंतर्गत पात्र कंपनियां पोर्टल के माध्यम से इन मांगों को देख सकती हैं। इसके बाद वे अपनी पसंद के स्कूल को चुनकर सीधे संबंधित सामग्री या सेवा उपलब्ध कराती हैं। इस प्रक्रिया में किसी भी नकदी लेन-देन की अनुमति नहीं होती, जिससे पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनी रहती है।

इसका असर: सरकारी स्कूलों के बच्चों को क्या लाभ मिलेगा?

विद्यांजलि के इस राष्ट्रीय सम्मेलन से देश भर के लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। जब निजी कंपनियां और स्वयंसेवक सीधे स्कूलों से जुड़ते हैं, तो सरकारी बजटीय सीमाओं से परे हटकर विद्यालयों को आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं।

इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, लाइब्रेरी, स्वच्छ पेयजल, सोलर पैनल और स्वच्छता सुविधाएं तेजी से विकसित हो सकेंगी। कंपनियों द्वारा स्कूल गोद लेने से वहां पठन-पाठन का माहौल बेहतर होता है और बच्चों के ड्रॉपआउट रेट में कमी आती है। साथ ही, शिक्षकों को भी नए डिजिटल टूल्स के माध्यम से पढ़ाने का प्रशिक्षण और संसाधन प्राप्त होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: विद्यांजलि योजना क्या है?
उत्तर: विद्यांजलि योजना शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसके जरिए निजी नागरिक, कॉर्पोरेट और स्वयंसेवक सरकारी स्कूलों को सेवाएं, उपकरण या इंफ्रास्ट्रक्चर दान कर सकते हैं।

प्रश्न: राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन का आयोजन कहां किया गया?
उत्तर: इस सम्मेलन का आयोजन 31 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम में शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा किया गया।

प्रश्न: कोई कंपनी या व्यक्ति विद्यांजलि से कैसे जुड़ सकता है?
उत्तर: इच्छुक व्यक्ति या संस्था विद्यांजलि के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण करके अपने नजदीकी सरकारी स्कूल की जरूरतों के अनुसार सहायता प्रदान कर सकते हैं।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

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