
भोपाल के सेंट्रल क्रॉनिकल समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट पर मध्य प्रदेश सरकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण, मैपसेट ने बताया कि प्लेसमेंट की तीसरी किश्त किसी भी संस्था को जारी नहीं की गई है।
मुख्य बातें
- अनुसूचित जाति विकास विभाग ने SC उपयोजना के तहत कौशल विकास हेतु 3241.37 लाख रुपये स्वीकृत किए थे।
- वर्ष 2021-22 में मैपसेट को दो आदेशों के माध्यम से कुल 2945.37 लाख रुपये आवंटित किए गए।
- कुल 28 सक्रिय प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं के जरिए 4952 SC बीपीएल युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया।
- संस्थाओं को केवल पहली (30%) और दूसरी (40%) किश्त दी गई, जो सत्यापन व असेसमेंट पर आधारित है।
- तीसरी किश्त (30%) प्लेसमेंट के ऑनलाइन सत्यापन पर निर्भर है, जिसका कोई बिल अभी जनरेट नहीं हुआ है।
मध्य प्रदेश के अनुसूचित जाति विकास विभाग और मैपसेट द्वारा संचालित मैपसेट कौशल विकास योजना को लेकर हाल ही में उठे विवाद पर राज्य सरकार ने विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की है। पीआईबी (पत्र सूचना कार्यालय) के माध्यम से दी गई जानकारी के अनुसार, सेंट्रल क्रॉनिकल समाचार पत्र में छपी वह खबर पूरी तरह गलत और निराधार है, जिसमें दावा किया गया था कि बिना प्लेसमेंट सत्यापन के प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब तक केवल प्रथम और द्वितीय किश्त का भुगतान हुआ है, जिसका प्लेसमेंट या जॉब ट्रैकिंग से कोई लेना-देना नहीं है।
मैपसेट कौशल विकास में भुगतान से जुड़ा क्या है पूरा मामला?
मैपसेट कौशल विकास योजना के तहत अनुसूचित जाति के बीपीएल युवाओं के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थाओं को प्रथम और द्वितीय किश्त का भुगतान किया गया है। यह भुगतान भौतिक सत्यापन और असेसमेंट के आधार पर हुआ है, जबकि प्लेसमेंट पर आधारित तीसरी किश्त अभी किसी संस्था को नहीं मिली है।
कार्यालय आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा विशेष केंद्रीय सहायता अनुसूचित जाति उपयोजना मद के अंतर्गत कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए कुल 3241.37 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इस स्वीकृत राशि के विरुद्ध मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (मैपसेट) को वित्तीय वर्ष 2021-22 में दो किस्तों में कुल 2945.37 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए। पहला आवंटन 26 नवंबर 2021 को आदेश क्रमांक 4695 के तहत 1296.00 लाख रुपये का था, जबकि दूसरा आवंटन 25 मार्च 2022 को आदेश क्रमांक 10283 के तहत 1649.37 लाख रुपये का किया गया था।
34 संस्थाओं का चयन और 4952 युवाओं को प्रशिक्षण
मैपसेट द्वारा वर्ष 2021-22 में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) आने वाले हितग्राहियों को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए निवार्ता (आरएफपी) जारी की गई थी। इस प्रक्रिया के माध्यम से कुल 34 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं का चयन किया गया और अनुबंध के बाद उन्हें कार्यादेश दिए गए। अनुबंध के बावजूद 6 संस्थाओं ने धरातल पर काम शुरू नहीं किया, जिसके बाद शेष 28 संस्थाओं को ही जिम्मेदारी सौंपी गई।
इन 28 सक्रिय प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं ने कुल 4952 अभ्यर्थियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया। मैपसेट द्वारा संचालित यह संपूर्ण प्रशिक्षण कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (MoSDE) भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार संचालित किया जाता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी व्यवस्था डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है। इसमें युवाओं का पंजीकरण, बायोमेट्रिक दैनिक उपस्थिति, ऑनलाइन असेसमेंट और प्लेसमेंट संबंधी सभी आंकड़े सीधे पोर्टल पर दर्ज किए जाते हैं।
मैपसेट कौशल विकास भुगतान के सरकारी मापदंड
कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (MoSDE) भारत सरकार द्वारा 04 दिसंबर 2020 को जारी राजपत्र क्रमांक 349 की अनुसूची-IV की कंडिका (2)-1.1.1 के तहत बैच मोड में संचालित प्रशिक्षण प्रदाताओं के लिए भुगतान के स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। इन नियमों के अनुसार राशि तीन चरणों में दी जाती है:
- प्रथम किश्त (30 प्रतिशत): प्रशिक्षण शुरू होने के तुरंत बाद अभ्यर्थियों के भौतिक सत्यापन और दस्तावेज जांच प्रक्रिया पूरी होने पर दी जाती है।
- द्वितीय किश्त (40 प्रतिशत): प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अभ्यर्थियों के असेसमेंट यानी परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर जारी की जाती है।
- तृतीय किश्त (30 प्रतिशत): न्यूनतम 70 प्रतिशत अभ्यर्थियों को सत्यापित रोजगार मिलने और लगातार 3 महीने तक नौकरी में बने रहने का प्रमाण मिलने पर दी जाती है।
तीसरी किश्त और प्लेसमेंट ट्रैकिंग का सच
सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया कि असेसमेंट की पूरी प्रक्रिया नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (NCVET) द्वारा अधिकृत संस्थाओं द्वारा पूरी की गई। असेसमेंट में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी की प्रशिक्षण में कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होती है। इसी उपस्थिति और असेसमेंट के आधार पर ही प्रथम और द्वितीय किश्त का भुगतान नियमों के तहत किया गया है।
जहाँ तक संस्थाओं द्वारा जमा कराई गई प्लेसमेंट रिपोर्ट का सवाल है, तो संस्थाओं ने केवल हार्ड कॉपी के रूप में जॉब ऑफर लेटर जमा किए थे। सरकारी नियमानुसार, सिर्फ ऑफर लेटर के आधार पर तीसरी किश्त का भुगतान नहीं किया जा सकता। तीसरी किश्त जारी होने के लिए पोर्टल पर प्लेसमेंट डेटा अपलोड होना और सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक बिल जनरेट होना जरूरी है। अब तक किसी भी संस्था का तीसरी किश्त का देयक (बिल) जनरेट ही नहीं हुआ है, इसलिए भुगतान करने का सवाल ही नहीं उठता। जब भुगतान हुआ ही नहीं, तो बिना सत्यापन ट्रैकिंग के करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत साबित होता है।
यह भी जानें: एससी उपयोजना और मैपसेट की कार्यप्रणाली
विशेष केंद्रीय सहायता अनुसूचित जाति उपयोजना (SCA to SCSP) भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य अनुसूचित जाति के सबसे गरीब परिवारों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति सुधारना है। मध्य प्रदेश में मैपसेट इस योजना के प्रशासनिक और क्रियान्वयन की मुख्य एजेंसी है।
मैपसेट का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आधुनिक बाजार की जरूरतों के हिसाब से हुनरमंद बनाना है ताकि वे उद्योगों में रोजगार पा सकें या अपना उद्यम शुरू कर सकें। इस व्यवस्था में भुगतान को सीधे पोर्टल से जोड़ने का मुख्य कारण यही है कि कोई भी निजी संस्था फर्जी दस्तावेज या फर्जी अभ्यर्थियों के नाम पर राशि का उठान न कर सके। पोर्टल पर अभ्यर्थी की आधार-लिंक्ड उपस्थिति और नियोजक (कंपनी) द्वारा जारी वेतन पर्ची व पीएफ/ईएसआई डेटा का मिलान होने के बाद ही अंतिम किश्त जारी की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: मैपसेट कौशल विकास योजना में कितनी संस्थाओं ने युवाओं को प्रशिक्षण दिया?
उत्तर: कुल चयनित 34 संस्थाओं में से 6 संस्थाओं ने काम शुरू नहीं किया था। शेष 28 संस्थाओं ने 4952 अनुसूचित जाति के बीपीएल अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रश्न: क्या मैपसेट ने बिना प्लेसमेंट सत्यापन के संस्थाओं को भुगतान किया है?
उत्तर: नहीं, यह दावा पूरी तरह गलत है। संस्थाओं को केवल पहली (30%) और दूसरी (40%) किश्त दी गई है जो भौतिक सत्यापन और असेसमेंट पर आधारित है। प्लेसमेंट से जुड़ी तीसरी किश्त (30%) का कोई भुगतान नहीं किया गया है।
प्रश्न: प्रशिक्षण में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का मूल्यांकन कौन करता है?
उत्तर: अभ्यर्थियों का असेसमेंट नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (NCVET) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा 70% से अधिक उपस्थिति वाले छात्रों के लिए किया जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






