
लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा है कि पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन को बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं।
मुख्य बातें
- लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने 29वें कोच्चि अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव का उद्घाटन किया।
- उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी से जानकारी मिल सकती है, लेकिन वास्तविक ज्ञान पुस्तकों और जीवन के अनुभवों से मिलता है।
- इस अवसर पर इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ और साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी उपस्थित थे।
- केरलम भारत का प्रथम पूर्ण साक्षर राज्य है, जिसकी पुस्तकालय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कोच्चि में आयोजित 29वें कोच्चि अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि जीवन को बदलने, दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं। पत्र सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी ने भले ही जानकारी को सहज सुलभ बना दिया है, लेकिन वास्तविक ज्ञान और विवेक पुस्तकों तथा जीवन के अनुभवों से ही प्राप्त होते हैं।
लोक सभा अध्यक्ष ने 29वें कोच्चि पुस्तक महोत्सव का किया उद्घाटन
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि पढ़ने की आदत व्यक्ति को समृद्ध करती है और उसमें जिज्ञासा, संवेदनशीलता तथा जीवन को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने की क्षमता विकसित करती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के ज्ञान और अनुभवों को संजोती हैं, व्यक्तियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन देती हैं तथा उनमें अनुशासन, दृढ़ संकल्प और उद्देश्य की भावना विकसित करती हैं। समारोह में इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ, अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के अध्यक्ष श्री मधु एस. नायर, श्री प्रकाश बाबू और साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
डिजिटल युग में पुस्तकों की प्रासंगिकता
जानकारी और ज्ञान के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए श्री बिरला ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने जानकारी तक पहुँच बढ़ाई है, लेकिन गहरी समझ और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए पुस्तकें तथा मानवीय अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जीवनपर्यंत सीखने पर जोर देते हुए ज्ञान अर्जित करने के लिए जिज्ञासा को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें आशा, कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति तथा रचनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति की प्रेरणा देती हैं। युवाओं से आग्रह किया गया है कि त्वरित सूचनाओं के दौर में वे पुस्तकों के गहन अध्ययन की परंपरा को जीवंत रखें।
भारत की विविधता और लोकतंत्र की ताकत
भारत की असाधारण विविधता का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि देश की विभिन्न भाषाएँ, धर्म, परंपराएँ, विचार और जीवनशैलियाँ उसकी विशिष्ट शक्ति हैं। इन भिन्नताओं के बावजूद भारत एकजुट है और लोकतंत्र देश को एक सूत्र में बाँटने वाली सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र हमें अलग-अलग मतों और विचारधाराओं का सम्मान करना तथा सौहार्दपूर्वक साथ रहना सिखाता है। विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन जब राष्ट्रहित का प्रश्न हो, तो सभी नागरिकों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
भाषा और साहित्य का राष्ट्रीय एकता में योगदान
राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में भाषा और साहित्य की भूमिका पर बोलते हुए श्री बिरला ने कहा कि भाषाएँ लोगों को बाँटती नहीं, बल्कि जोड़ती हैं। उन्होंने देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण में मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु सहित भारत की समृद्ध भाषायी परंपराओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लेखकों ने भारत के इतिहास, मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों को विश्व तक पहुँचाया है, जबकि डिजिटल माध्यमों से अनुवाद ने भाषायी सीमाओं के पार साहित्य की पहुँच को और व्यापक बनाया है।
केरलम का साक्षरता और पुस्तकालय आंदोलन
शिक्षा, साहित्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में केरलम के योगदान की सराहना करते हुए श्री बिरला ने भारत के प्रथम पूर्ण साक्षर राज्य के रूप में उसकी विशिष्ट उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य की सेवा और त्याग की परंपराओं, विशेषकर विश्वभर में नर्सिंग तथा स्वास्थ्य सेवाओं में महिलाओं के योगदान की प्रशंसा की। केरलम के पुस्तकालय आंदोलन में श्री पी. एन. पणिक्कर के अग्रणी योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों और पढ़ने की आदत ने साक्षरता के प्रसार तथा सामाजिक-विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने 19 जून को मनाए जाने वाले ‘वायना दिनम’ अर्थात् पठन दिवस के माध्यम से पढ़ने को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की भी सराहना की।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? 29वां कोच्चि अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव कहाँ आयोजित किया गया था?
उत्तर। यह महोत्सव केरल के कोच्चि शहर में आयोजित किया गया था।
प्रश्न? इस महोत्सव के उद्घाटन समारोह को किसने संबोधित किया?
उत्तर। इस समारोह को लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






