
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मसौदा डीआरएम ऑडिट मैनुअल पर हितधारकों की मांग के बाद प्रतिक्रिया भेजने की समयसीमा बढ़ा दी है।
मुख्य बातें
- भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने मसौदा डीआरएम ऑडिट मैनुअल जारी किया था।
- लिखित टिप्पणियां भेजने की नई अंतिम तिथि 13 नवंबर 2026 तय की गई है।
- हितधारकों ने तकनीकी और विनियामक जटिलताओं के कारण समय बढ़ाने का अनुरोध किया था।
- सलाहकार डॉ. दीपली शर्मा से दूरभाष संख्या +91-11-20907774 पर संपर्क किया जा सकता है।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मसौदा डीआरएम ऑडिट मैनुअल पर हितधारकों की प्रतिक्रिया और सुझाव भेजने की समयसीमा में बड़ा बदलाव किया है। इस संबंध में प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब संबंधित पक्ष और कंपनियां 13 नवंबर 2026 तक अपनी लिखित टिप्पणियां जमा करा सकेंगे। इससे पहले यह समयसीमा 30 अक्टूबर 2026 तय की गई थी।
डीआरएम ऑडिट मैनुअल 2026 क्या है और क्यों बढ़ाई गई तारीख?
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा मसौदा दूरसंचार प्रसारण एवं केबल सेवा डीआरएम आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम ऑडिट मैनुअल पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए हितधारकों को अब अतिरिक्त समय मिल गया है। तकनीकी और परिचालन संबंधी जटिलताओं के चलते इसे आगे बढ़ाया गया है।
ट्राई ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि उद्योग से जुड़े कई हितधारकों ने इस विषय पर विस्तृत परीक्षण की आवश्यकता जताई थी। उनका तर्क था कि इस मसौदे में कई जटिल तकनीकी और विनियामक पहलू शामिल हैं, जिनके अध्ययन के लिए थोड़ा और वक्त चाहिए। इन सभी अनुरोधों का गंभीरता से मूल्यांकन करने के बाद ही विनियामक प्राधिकरण ने अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने का यह निर्णय लिया है। नियामक ने यह भी साफ कर दिया है कि इस डेडलाइन के बाद किसी भी अन्य अनुरोध पर आगे विचार नहीं किया जाएगा।
टिप्पणियां भेजने की प्रक्रिया और ईमेल पते
यदि कोई हितधारक या कंपनी इस मसौदे पर अपनी राय या सुझाव रखना चाहती है, तो वे इसे तयशुदा पते पर भेज सकते हैं। ट्राई ने निर्देश दिया है कि सभी टिप्पणियां और सुझाव मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम यानी ईमेल के जरिए ही भेजे जाने चाहिए।
- ईमेल आईडी: advbcs-2@trai.gov.in
- दूसरा ईमेल विकल्प: jtadvbcs-3@trai.gov.in
- अंतिम तिथि: 13 नवंबर 2026
- संपर्क अधिकारी: सलाहकार (बी एंड सीएस) डॉ. दीपली शर्मा
आम जनता और प्रसारण क्षेत्र पर इसका असर
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा तैयार किए जा रहे इस तरह के नियम और मैनुअल सीधे तौर पर देश के प्रसारण और केबल सेवा बाजार को प्रभावित करते हैं। जब भी कोई नया ऑडिट मैनुअल या डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम से जुड़ा नियम बनता है, तो उसका असर डीटीएच ऑपरेटरों, केबल ऑपरेटर्स और अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
पारदर्शी और सुरक्षित प्रसारण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी ऑडिट के नियम बेहद अहम होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया से यह तय होता है कि ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में तकनीकी मानक कैसे लागू होंगे और नियमों का पालन किस प्रकार किया जाएगा। समयसीमा बढ़ने से सभी बड़ी कंपनियां और केबल संघ इस मसौदे का गहराई से अध्ययन करके अपने सुझाव दर्ज करा सकेंगे, जिससे भविष्य में बनने वाला नियम और अधिक व्यावहारिक हो सके।
दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण की पृष्ठभूमि और भूमिका
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा देश में टेलीकॉम और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के विकास को विनियमित करने के लिए की गई थी। यह संस्था सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिलती रहें और सेवा प्रदाताओं के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
समय-समय पर ट्राई द्वारा विभिन्न परामर्श पत्र और मसौदे जारी किए जाते हैं, जिन पर उद्योग जगत, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं। पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया के जरिए ही देश में दूरसञ्चार और प्रसारण नीतियों को अंतिम रूप दिया जाता है, जिससे डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? मसौदा डीआरएम ऑडिट मैनुअल पर सुझाव भेजने की नई अंतिम तिथि क्या है?
उत्तर। लिखित टिप्पणियां जमा करने की अंतिम तिथि अब 13 नवंबर 2026 कर दी गई है।
प्रश्न? अपने सुझाव किस माध्यम से और कहां भेजने होंगे?
उत्तर। सुझाव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से advbcs-2@trai.gov.in और jtadvbcs-3@trai.gov.in पर भेजे जा सकते हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






