
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों में लाइसेंस की जानकारी छिपाने पर होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
मुख्य बातें
- होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- यह कार्रवाई केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई है।
- मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में यह आदेश जारी हुआ है।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर वॉकी-टॉकी के नियमों का पालन न करने वाली 16,970 से अधिक प्रविष्टियां मिली थीं।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नियमों का उल्लंघन कर भ्रामक विज्ञापन देने वाली कंपनी ‘होगर टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी’ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पीआईबी के अनुसार, इस कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों और उत्पाद प्रविष्टियों में परिचालन आवृत्ति और लाइसेंस की जरूरी नियामक जानकारियों का खुलासा नहीं किया था। मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाले इस प्राधिकरण ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत यह सख्त आदेश जारी किया है।
भ्रामक विज्ञापन और वॉकी-टॉकी नियमों का उल्लंघन क्या है?
भ्रामक विज्ञापन वे प्रचार होते हैं जो ग्राहकों को उत्पादों की वास्तविक स्थिति या कानूनी शर्तों के बारे में गलतफहमी में रखते हैं। प्राधिकरण की जांच में सामने आया कि आरोपी कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद वॉकी-टॉकी मॉडल में यह साफ नहीं बताया गया था कि इन उपकरणों को चलाने के लिए किस लाइसेंस या सरकारी मंजूरी की जरूरत होती है। ऐसी जरूरी बातें छिपाने से खरीदारों को यह गलतफहमी हो सकती है कि वे इन वायरलेस उपकरणों को बिना किसी पाबंदी के इस्तेमाल कर सकते हैं। कम पावर वाले शॉर्ट-रेंज रेडियो उपकरण नियम, 2018 के तहत केवल 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की तय आवृत्ति सीमा वाले व्यक्तिगत मोबाइल रेडियो को ही कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस से छूट मिलती है। इसके दायरे से बाहर आने वाले सभी उपकरणों पर कड़े विनियामक नियम लागू होते हैं, जिनकी जानकारी विज्ञापनों में देना अनिवार्य है।
ई-कॉमर्स कंपनियों और अन्य प्लेटफॉर्मों पर बड़ी कार्रवाई
जांच के दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर वॉकी-टॉकी की बड़े पैमाने पर ऐसी प्रविष्टियां मिलीं जो विनियामक नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। कुल 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन वाली प्रविष्टियां मिलने के बाद देश के 13 प्रमुख ई-कॉमर्स मंचों को नोटिस जारी किए गए थे।
- अमेज़न सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
- मीशो प्राइवेट लिमिटेड और मेटा प्लेटफॉर्म्स को भी 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ा है।
- ट्रेडइंडिया (इन्फोकॉम नेटवर्क) पर भी 10 लाख रुपये का आर्थिक दंड तय किया गया है।
- जियोमार्ट, टॉक प्रो, संचार वायरलेस और होगर टेक्नोलॉजीज समेत अन्य कंपनियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगा है।
अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी कुछ कंपनियों ने इस प्राधिकरण के फैसलों को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जबकि मेटा और ट्रेडइंडिया ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) का रुख किया है।
यह भी जानें: सीसीपीए की भूमिका और कानूनी दायरा
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग के तहत काम करने वाला एक नियामक निकाय है। इसकी स्थापना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत की गई है ताकि अनुचित व्यापार प्रथाओं, झूठे प्रचार और ग्राहकों के अधिकारों के हनन पर रोक लगाई जा सके। इस संस्था के पास स्वतः संज्ञान लेने, जांच के आदेश देने और दोषी कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड लगाने का अधिकार है। कंपनी का यह तर्क खारिज कर दिया गया कि उसकी वेबसाइट पर सीधे ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं है, क्योंकि केवल प्रचार करना भी उपभोक्ता नियमों के दायरे में आता है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस या मंजूरी होने मात्र से कोई भी विक्रेता ग्राहकों को पूरी जानकारी देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? होगर टेक्नोलॉजीज पर कितने रुपये का जुर्माना लगाया गया है?
उत्तर। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने इस कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
प्रश्न? यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई है?
उत्तर। यह पूरी कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






