रविवार, अक्टूबर 25, 2026

अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन 2026 भुवनेश्वर में संपन्न, शहरों को मिले अवार्ड्स

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अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन

भुवनेश्वर में 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन का समापन हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने उत्कृष्ट परिवहन सेवाओं के लिए पुरस्कार प्रदान किए।

मुख्य बातें

  • 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 का आयोजन 23-24 अक्टूबर को भुवनेश्वर में हुआ।
  • केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने शहरी परिवहन में 3-आई (इंटीग्रेशन, इंक्लूसिवनेस, इंटेलिजेंस) का मंत्र दिया।
  • भारत का परिचालन योग्य मेट्रो नेटवर्क 26 शहरों में बढ़कर 1,185 किलोमीटर तक पहुंच गया है।
  • भुवनेश्वर को ‘सर्वश्रेष्ठ ग्रीन ट्रांसपोर्ट पहल’ और दिल्ली (DTC) को ‘सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली’ का पुरस्कार मिला।

भुवनेश्वर में आयोजित 19वें अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 का 24 अक्टूबर को औपचारिक समापन हो गया। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा ओडिशा सरकार और इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन ट्रांसपोर्ट (इंडिया) के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 1,500 देश-विदेश के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। समापन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने शहरी परिवहन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शहरों और परिवहन निकायों को सम्मानित किया।

अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन 2026 में 3-I के सिद्धांत पर जोर

अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन 2026 का मुख्य उद्देश्य भारतीय शहरों में सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित, सुलभ और तकनीक आधारित बनाना है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भविष्य की शहरी परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 3-आई सिद्धांत का खाका पेश किया, जिसमें इंटीग्रेशन, इंक्लूसिवनेस और इंटेलिजेंस शामिल हैं। यह ढांचा मेट्रो, बस और रेल के बीच सुचारू कनेक्टिविटी और सभी वर्गों के लिए आसान पहुंच सुनिश्चित करता है।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अर्बन मोबिलिटी को शुरुआत से ही शहरी नियोजन के साथ जोड़ा जाना चाहिए। बेहतर परिवहन बुनियादी ढांचा अब केवल विकास का परिणाम नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक विकास और शहरी नियोजन की नींव बन चुका है। नागरिकों की आवागमन की जरूरतों के अनुसार शहरों की योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि कार्यस्थलों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हो सके।

इंटीग्रेशन (Integration) का अर्थ मेट्रो, बस, रेल और अन्य परिवहन सेवाओं के बीच सुचारू जुड़ाव और मजबूत ‘फर्स्ट और लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी है। इंक्लूसिवनेस (Inclusiveness) के तहत महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित व सुलभ परिवहन की आवश्यकता बताई गई। इंटेलिजेंस (Intelligence) में ट्रैफिक प्रबंधन, यात्री सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की क्षमता सुधारने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम डेटा का उपयोग शामिल है।

मेट्रो रेल और पीएम ई-बस सेवा में देश की प्रगति

केंद्रीय मंत्री ने देश भर में शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे में हुई प्रगति के आंकड़े साझा किए। दिसंबर 2025 से भारत सरकार ने ₹59,000 करोड़ से अधिक की लागत वाली नौ मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो लगभग 174 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेंगी। इसी अवधि के दौरान 102 किलोमीटर का नया मेट्रो नेटवर्क चालू किया गया है। वर्तमान में भारत का परिचालन योग्य मेट्रो नेटवर्क 26 शहरों में फैल चुका है और इसकी कुल लंबाई 1,185 किलोमीटर हो गई है।

सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए ‘पीएम ई-बस सेवा’ योजना के तहत 28 शहरों में 1,100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो चुका है। इन ई-बसों से प्रतिदिन औसतन लगभग 2.5 लाख यात्री सफर कर रहे हैं। इसके अलावा, अप्रैल 2026 में स्वीकृत दिल्ली के ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति 2026 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडोर के आसपास लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास और किफायती आवास को बढ़ावा देगी।

अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन के तहत पुरस्कार विजेताओं की सूची

समापन सत्र में शहरी परिवहन में उत्कृष्ट कार्य और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए विभिन्न शहरों, राज्यों और संस्थाओं को पुरस्कार प्रदान किए गए:

  • सर्वश्रेष्ठ ग्रीन ट्रांसपोर्ट पहल: भुवनेश्वर – कॉम्प्रिहेंसिव रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट (CRUT)
  • सर्वश्रेष्ठ नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट सिस्टम: चेन्नई – ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन
  • नवाचार और स्मार्ट मोबिलिटी समाधान: दिल्ली – दिल्ली परिवहन निगम (DTC) एवं दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC)
  • सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली: दिल्ली – दिल्ली परिवहन निगम (DTC)
  • सर्वश्रेष्ठ मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन: कोच्चि – कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL)
  • सर्वश्रेष्ठ यात्री सेवाएं और संतुष्टि: चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) एवं नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC – दिल्ली/उत्तर प्रदेश)
  • बिग डेटा एनालिटिक्स का सर्वश्रेष्ठ उपयोग: दिल्ली – दिल्ली परिवहन निगम (DTC)
  • सिविल स्ट्रक्चरल डिजाइन का अनुकूलन (विशेष पुरस्कार): उत्तर प्रदेश – नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRCL)

प्रशंसा पुरस्कार प्राप्त करने वाले संगठनों में भावनगर नगर निगम (ग्रीन ट्रांसपोर्ट), काकतिया शहरी विकास प्राधिकरण वारंगल (नॉन-मोटराइज्ड), कोच्चि मेट्रो (स्मार्ट मोबिलिटी), एमटीसी चेन्नई (वित्तपोषण तंत्र), गुजरात मेट्रो अहमदाबाद (मल्टी-मॉडल) और बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस (बिग डेटा एनालिटिक्स) शामिल हैं। ओडिशा को ‘सर्वश्रेष्ठ शहरी परिवहन सुधार’ के लिए सराहा गया।

इसका असर: आम नागरिकों की दैनिक यात्रा में क्या बदलाव आएगा?

इस सम्मेलन के फैसलों और नीतियों का सीधा असर आम शहरी नागरिकों की दिनचर्या पर पड़ेगा। जब परिवहन योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो नागरिकों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलते हैं:

पहला, मल्टी-मॉडल एकीकरण से यात्रियों को एक ही टिकटिंग व्यवस्था या स्मार्ट कार्ड के जरिए मेट्रो, बस और लोकल ट्रेनों के बीच सफर बदलने में आसानी होती है। दूसरा, सुरक्षित फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बनने से पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों की सड़क सुरक्षा बढ़ती है। तीसरा, ई-बसों और मेट्रो का विस्तार शहरों में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है।

साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग से यात्रियों को बसों और ट्रेनों की सटीक आगमन समय सारणी मोबाइल फोन पर मिलती है, जिससे बस स्टैंड या स्टेशनों पर बेवजह का इंतजार खत्म होता है।

ओडिशा में शहरी विकास और ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ पहल

कार्यक्रम के दौरान ओडिशा सरकार के प्रतिनिधियों ने राज्य की शहरी पहलों की जानकारी दी। ओडिशा के आवासन एवं शहरी विकास मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्र ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलनों से निकले विचारों को धरातल पर व्यावहारिक कार्रवाई में बदलना जरूरी है।

ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने रेखांकित किया कि शहरी विकास की शुरुआत नागरिकों की बुनियादी जरूरतों से होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ओडिशा के 11 शहरों में ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ (नल से सीधे पीने योग्य जल) पहल का विस्तार किया गया है और 114 शहरी क्षेत्रों में पाइप से पानी पहुंचाने की कवरेज हासिल की गई है। विभाग की अपर मुख्य सचिव उषा पाधी ने ओडिशा की मेजबानी पर गर्व जताते हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

तकनीकी सत्र और शोध प्रस्तुतियां

दो दिनों में कुल 14 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पेरी-अर्बन कॉरिडोर्स, पैदल चलने योग्य रास्तों, डिजिटल पब्लिक आउटरीच और एआई-आधारित ट्रैफिक प्रबंधन पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में बने प्रदर्शनी हॉल में 28 प्रदर्शकों ने नवीनतम शहरी मोबिलिटी तकनीकों को प्रदर्शित किया। इसके अतिरिक्त, रिसर्च सिम्पोजियम में शोधकर्ताओं द्वारा 46 चयनित शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: 19वां अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन कहां आयोजित किया गया?
उत्तर: यह सम्मेलन 23 और 24 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित हुआ।

प्रश्न: अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ ग्रीन ट्रांसपोर्ट का पुरस्कार किसे मिला?
उत्तर: भुवनेश्वर की संस्था ‘कॉम्प्रिहेंसिव रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट’ (CRUT) को यह पुरस्कार दिया गया।

प्रश्न: भारत में वर्तमान में कितना मेट्रो नेटवर्क चालू है?
उत्तर: भारत में वर्तमान में 26 शहरों में कुल 1,185 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित हो रहा है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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