
बोधगया में बीआईएमसीजीएल की औपचारिक शुरुआत के साथ 12 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे राज्य में 4,200 करोड़ रुपये का निवेश और हजारों नौकरियां आने का अनुमान है।
मुख्य बातें
- बोधगया में बीआईएमसीजीएल और ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ का औपचारिक शुभारंभ।
- 300 एकड़ औद्योगिक भूमि के लिए 12 समझौतों के तहत ₹4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव।
- डोभी ब्लॉक में 1,670 एकड़ में फैले इंडस्ट्रियल पार्क से 1.10 लाख से अधिक नौकरियों का अनुमान।
- एनएच-22, एनएच-19 और गया एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी के साथ समर्पित हेलीपैड का निर्माण जारी।
आईएमसी गया (इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी) के क्रियान्वयन को गति देने के लिए बोधगया में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (बीआईएमसीजीएल) का औपचारिक उद्घाटन किया गया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस विशेष संस्थागत तंत्र और ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ के प्रारंभिक चरण की शुरुआत की। इस अवसर पर लगभग 300 एकड़ औद्योगिक भूमि आवंटन हेतु 12 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनके माध्यम से 4,200 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित होने की संभावना है। इन नए समझौतों से राज्य में 16,095 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
आईएमसी गया परियोजना क्या है और इससे क्या लाभ होगा?
आईएमसी गया गया जिले के डोभी ब्लॉक में 1,670 एकड़ में विकसित हो रहा एक आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर है। यह परियोजना अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसके निर्माण से बिहार में लगभग 16,500 करोड़ रुपये का कुल निवेश और 1.10 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। इससे राज्य में विनिर्माण तंत्र को मजबूती मिलेगी।
आईएमसी गया में निवेश के प्रमुख क्षेत्र और औद्योगिक संभावनाएं
बोधगया में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल कलपुर्जे, औषधीय उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और विभिन्न विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई है। बीआईएमसीजीएल द्वारा भूमि आवंटन की पारदर्शी व्यवस्था के लिए एक एकीकृत पोर्टल और आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की गई है। इस पोर्टल के जरिए निवेशक सीधे औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
इससे पूर्व भी राज्य सरकार ने इस औद्योगिक पार्क के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 2,586 एकड़ भूमि के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। उन प्राथमिक समझौतों के तहत 31,750 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनसे लगभग 52,050 नौकरियों के सृजन का अनुमान व्यक्त किया गया था। इस प्रकार, नए और पुराने समझौतों को मिलाकर डोभी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधि बड़े पैमाने पर शुरू होने जा रही है।
समारोह के दौरान 250 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे। इनमें जापान, थाईलैंड और लाओस के राजदूतों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इसके अतिरिक्त, 55 देशों में कार्यरत बिहार फाउंडेशन के अध्यायों से जुड़े प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लेकर बिहार में निवेश की प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
बीआईएमसीजीएल का गठन और प्रशासनिक संरचना
आईएमसी गया के विकास और देखरेख का दायित्व बीआईएमसीजीएल को सौंपा गया है। यह एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) है, जिसका गठन 6 जनवरी 2025 को किया गया था। यह कंपनी बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) के बीच 50:50 की समान हिस्सेदारी वाला एक संयुक्त उद्यम है।
यह संस्थागत ढांचा औद्योगिक क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने, वैधानिक स्वीकृतियों को तेजी से दिलाने, यूटिलिटी कनेक्टिविटी प्रदान करने और निवेशकों को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीआईबी के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2024 को इस औद्योगिक नगर की स्थापना को मंजूरी दी थी। पूरे प्रोजेक्ट की कुल स्वीकृत लागत 1,339 करोड़ रुपये है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और विकास की लागत शामिल है।
परियोजना के विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक पूरी भूमि अपने नियंत्रण में ले ली है। इसके तहत हस्तांतरित की गई 415 एकड़ जमीन के एवज में भारत सरकार ने सितंबर 2025 में 132 करोड़ रुपये की इक्विटी किस्त जारी कर दी थी। फिलहाल परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता और ईपीसी ठेकेदारों की नियुक्ति की जा चुकी है तथा धरातल पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।
इसका असर: बिहार के औद्योगिक विकास और स्थानीय रोजगार पर प्रभाव
इस वृहद विनिर्माण केंद्र के स्थापित होने से बिहार के आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। अब तक राज्य के युवाओं को विनिर्माण और तकनीकी नौकरियों के लिए अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ता था। डोभी में निर्मित हो रहे इस पार्क से स्थानीय स्तर पर ही इंजीनियरिंग, फार्मा, ऑटोमोबाइल और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होंगे।
यह औद्योगिक क्लस्टर विशेष रूप से कृषि-आधारित उद्योगों, परिधान एवं रेडीमेड वस्त्र, फर्नीचर, हस्तशिल्प, हथकरघा और भारी इंजीनियरिंग इकाइयों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इससे न केवल बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को स्थान मिलेगा, बल्कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को भी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का सीधा मौका मिलेगा। स्थानीय उद्यमियों को अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राप्त होगा।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार बिहार में एमएसएमई क्षेत्र के विस्तार और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर वित्तीय और तकनीकी सहायता देती रहेगी। इसके अलावा राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने परियोजना में नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) की तकनीकी योजना की सराहना की।
आईएमसी गया की लोकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर की खासियतें
लॉजिस्टिक्स और परिवहन के दृष्टिकोण से डोभी स्थित इस औद्योगिक क्षेत्र का चयन बेहद रणनीतिक है। यह क्लस्टर राष्ट्रीय राजमार्ग 22 (NH-22) और राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (NH-19) के मुख्य जंक्शन के पास स्थित है, जो इसे देश के प्रमुख व्यापारिक मार्गों से सीधे जोड़ता है। इसके अलावा, गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहां से मात्र 39 किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे हवाई माल ढुलाई और व्यापारिक दौरों में सुविधा होगी।
परियोजना स्थल पर निवेशकों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के त्वरित आवागमन के लिए एक समर्पित हेलीपैड का निर्माण अंतिम चरण में है। आंतरिक बुनियादी ढांचे के अंतर्गत चौड़ी सड़कें, निर्बाध जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (STP/ETP), बिजली वितरण नेटवर्क, ठोस कचरा प्रबंधन और अत्याधुनिक अग्निशमन प्रणालियों का निर्माण किया जा रहा है। एनआईसीडीसी ने टिकाऊ औद्योगिक गतिविधियों के संचालन के लिए वर्षा जल संचयन और वार्षिक जल भंडारण जलाशयों की रूपरेखा भी तैयार की है।
- स्थान: डोभी ब्लॉक, गया जिला (बिहार)
- कुल क्षेत्र: 1,670 एकड़ (अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का भाग)
- प्रस्तावित कुल निवेश: लगभग 16,500 करोड़ रुपये
- संभावित रोजगार: 1,10,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नौकरियां
- कनेक्टिविटी: NH-19, NH-22, गया एयरपोर्ट (39 किमी) तथा ऑन-साइट हेलीपैड
- केंद्र-राज्य साझेदारी: बीआईएडीए (BIADA) और एनआईसीडीआईटी (NICDIT) का 50:50 संयुक्त उद्यम
अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और राष्ट्रीय दृष्टिकोण
अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य पूर्वी भारत में औद्योगिक विनिर्माण को पुनर्जीवित करना है। गया में बन रही यह इंडस्ट्रियल सिटी इसी कॉरिडोर का मुख्य पड़ाव है। इस कॉरिडोर के माध्यम से पूर्वी राज्यों को कोलकाता और हल्दी बंदरगाहों से सीधा संपर्क मिलता है, जिससे वैश्विक निर्यात के अवसर खुलते हैं।
यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्पों के अनुरूप है। बोधगया में शुरू हुआ ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ का शुरुआती अभियान दुनिया भर के निवेशकों को बिहार की औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं से अवगत कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। समर्पित संस्थागत तंत्र बीआईएमसीजीएल के माध्यम से भूमि आवंटन और निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाकर परियोजना को तय समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आईएमसी गया प्रोजेक्ट के तहत कुल कितने निवेश का अनुमान है?
उत्तर। इस पूरी परियोजना में कुल मिलाकर लगभग 16,500 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है, जिसमें से 12 हालिया एमओयू के जरिए 4,200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्राप्त हो चुका है।
प्रश्न? बीआईएमसीजीएल में किन संस्थाओं की हिस्सेदारी है?
उत्तर। बीआईएमसीजीएल (BIMCGL) बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) और भारत सरकार के एनआईसीडीआईटी (NICDIT) के बीच 50:50 की हिस्सेदारी वाला एक संयुक्त उद्यम है।
प्रश्न? इस इंडस्ट्रियल पार्क में कौन-कौन से प्रमुख उद्योग स्थापित होंगे?
उत्तर। यहां मुख्य रूप से खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स, कपड़ा एवं रेडीमेड गारमेंट्स, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






