
वाणिज्य विभाग और ईईपीसी इंडिया ने वर्ष 2030 तक 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए चिंतन शिविर में रणनीति बनाई है।
मुख्य बातें
- वर्ष 2030 तक 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात का लक्ष्य तय किया गया।
- अप्रैल-सितंबर 2026-27 के दौरान भारत का कुल निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 476.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर हुआ।
- चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में इंजीनियरिंग निर्यात 70 बिलियन डॉलर के पार पहुंचा।
- वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और संयुक्त सचिव विमल आनंद ने चिंतन शिविर में चर्चा की।
इंजीनियरिंग निर्यात को नई ऊंचाइयां देने के लिए वाणिज्य विभाग और इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन निकाय (ईईपीसी इंडिया) ने मिलकर एक खास चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक कुल इंजीनियरिंग सामान के निर्यात को 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। इसके साथ ही मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और कच्चे माल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
इंजीनियरिंग निर्यात 2030 तक कितना बढ़ाने का लक्ष्य है?
वाणिज्य विभाग और ईईपीसी इंडिया के मुताबिक, भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इंजीनियरिंग निर्यात हासिल करना है। हालांकि, संयुक्त सचिव विमल आनंद ने ईईपीसी इंडिया को इस लक्ष्य पर फिर से विचार करने और इसे बढ़ाकर 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की संभावना तलाशने को कहा है। सरकार और उद्योग जगत के मिले-जुले प्रयासों से इस क्षेत्र में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।
इस चिंतन शिविर में देश के शीर्ष नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल मिलना देश के विनिर्माण क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी है। अधिकारियों ने माना कि इनपुट लागत में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें भारतीय निर्यात की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
इस वित्तीय वर्ष के अब तक के आंकड़े क्या कहते हैं?
वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने मुख्य भाषण के दौरान देश के निर्यात आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अप्रैल से सितंबर 2026-27 की अवधि के दौरान भारत का कुल माल और सेवा निर्यात साल-दर-साल 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 476.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है।
- अप्रैल-सितंबर 2026-27 में कुल निर्यात: 476.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (14% वृद्धि)
- वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीने में इंजीनियरिंग निर्यात: 70 बिलियन डॉलर से अधिक
- इंजीनियरिंग निर्यात में पिछले साल की तुलना में वृद्धि: लगभग 20 प्रतिशत
- चालू वित्त वर्ष में कुल इंजीनियरिंग निर्यात का अनुमान: 140 अरब डॉलर पार
गुणवत्ता नियंत्रण और वैश्विक चुनौतियां
बढ़ते वैश्विक व्यापार नियमों के बीच गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) और जलवायु से जुड़ी आवश्यकताओं का पालन करना एक बड़ी चुनौती है। वाणिज्य सचिव ने उद्योग जगत को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। संयुक्त सचिव विमल आनंद ने ईईपीसी इंडिया से कहा कि वे इन क्यूसीओ के प्रभाव की जांच करने के लिए एक व्यापक श्वेत पत्र तैयार करें। इससे यह समझने में आसानी होगी कि इन नियमों का छोटे और बड़े उद्योगों पर क्या असर पड़ रहा है।
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने विश्वास जताया कि भारत का इंजीनियरिंग क्षेत्र इस साल पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा। उन्होंने कहा कि उनका मध्यम और दीर्घकालिक दृष्टिकोण बहुत सकारात्मक है और चालू वित्त वर्ष में ही इंजीनियरिंग निर्यात 140 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच का यह तालमेल आने वाले दिनों में देश के औद्योगिक विकास को रफ्तार देगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? 2030 तक इंजीनियरिंग निर्यात का लक्ष्य क्या तय किया गया है? उत्तर। सरकार ने 2030 तक 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा है, जिसे बढ़ाकर 300 बिलियन डॉलर तक करने पर भी विचार चल रहा है।
प्रश्न? चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में निर्यात कितना रहा? उत्तर। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में इंजीनियरिंग निर्यात 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






