
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एनएमएमएस ऐप का उन्नत सुरक्षा संस्करण जारी किया, जिससे फर्जी हाजिरी और क्लोनिंग पर रोक लगेगी।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत एनएमएमएस ऐप का नया फेस ऑथेंटिकेशन संस्करण जारी किया।
- आईआईटी मद्रास के तकनीकी सहयोग और गूगल प्ले इंटीग्रिटी से लैस यह प्रणाली फर्जी हाजिरी और ऐप क्लोनिंग पर रोक लगाएगी।
- वीबी-जी राम जी के अंतर्गत 2.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक श्रमिकों को 46 करोड़ मानवदिवस का रोजगार मिला है।
- बिना इंटरनेट वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन उपस्थिति और बुजुर्गों या दिव्यांगों के लिए विशेष छूट व्यवस्था रखी गई है।
- दिसंबर 2027 की समयसीमा से एक साल पहले ही देश में 10.99 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एनएमएमएस ऐप का उन्नत फेस ऑथेंटिकेशन संस्करण जारी किया है। ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) के तहत ग्रामीण श्रमिकों की पारदर्शी हाजिरी दर्ज करने के लिए इस तकनीकी प्रणाली में बड़े सुरक्षा बदलाव किए गए हैं। नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक ग्रामीण मजदूर को रोजगार देना और बजटीय राशि का शत-प्रतिशत सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
एनएमएमएस ऐप का नया फेस ऑथेंटिकेशन संस्करण क्या है?
एनएमएमएस ऐप का नया फेस ऑथेंटिकेशन संस्करण राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम का एक उन्नत तकनीकी रूप है, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के सहयोग से तैयार किया गया है। यह प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लाइवनेस डिटेक्शन के माध्यम से ग्रामीण कार्यस्थलों पर डमी फोटो, फर्जी हाजिरी और गलत दावों को पूरी तरह रोकती है।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल और संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी उपस्थित थीं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर पारदर्शिता की नई मिसाल कायम की जा रही है।
एनएमएमएस ऐप में आईआईटी मद्रास की तकनीक और सुरक्षा
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ऐप की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए आईआईटी मद्रास और संबंधित तकनीकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया है। साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिवाइस-लेवल सुरक्षा जांच और डेटा संप्रेषण के कड़े उपाय किए गए हैं।
यह नया सुरक्षा संस्करण Google Play Integrity से एकीकृत है। इसमें शामिल मुख्य सुरक्षा उपाय इस प्रकार हैं:
- लाइवनेस डिटेक्शन: यह तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि कैमरे के सामने असली और जीवित श्रमिक मौजूद है, न कि कोई पुरानी तस्वीर या डमी।
- एआई आधारित फोटो डी-डुप्लीकेशन: सिस्टम में सक्रिय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बार-बार दोहराई गई या संदिग्ध तस्वीरों को तुरंत पहचान लेता है। जांच पूरी होने तक फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTO) स्वतः रुक जाता है।
- क्लोनिंग रोधी व्यवस्था: ऐप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, डेटा लीक या क्लोनिंग को विफल करने के लिए डिवाइस सुरक्षा जांच जोड़ी गई है।
- क्षेत्रवार एआई सुधार: विभिन्न राज्यों की भौगोलिक विशेषताओं और शारीरिक भिन्नताओं को देखते हुए एआई सत्यापन मॉडल में राज्यवार सुधार किए गए हैं।
वीबी-जी राम जी योजना के आंकड़े और वित्तीय आवंटन
देश में 1 जुलाई 2026 से लागू की गई वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए संबल साबित हो रही है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि महज कुछ महीनों के भीतर इस योजना के तहत अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है।
वर्तमान में देश की 2.41 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्यस्थलों पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। अब तक 2.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
योजना के तहत अब तक लगभग 46 करोड़ मानवदिवस का सृजन हुआ है, जिनमें से 40 करोड़ मानवदिवस केवल फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली से दर्ज किए गए हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड ने शत-प्रतिशत कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन से उपस्थिति दर्ज करने में सफलता हासिल की है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने इस योजना में 95,692 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंश को मिलाकर कुल बजट 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है। इसमें से केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पहली किस्त के रूप में 26,126 करोड़ रुपये की मदर सैंक्शन जारी कर चुकी है।
नेटवर्क न होने और तकनीकी समस्या पर मजदूरों के लिए क्या व्यवस्था है?
तकनीकी सुधारों के साथ-साथ सरकार ने मानवीय संवेदनाओं को भी ध्यान में रखा है। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि किसी भी वास्तविक मजदूर को नेटवर्क की कमी या तकनीकी रुकावट के कारण काम या मजदूरी से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।
यदि किसी कार्यस्थल पर इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑफलाइन हाजिरी दर्ज की जाएगी। इसके बाद मस्टर रोल बंद होने पर नेटवर्क वाले क्षेत्र में आकर डेटा अपलोड किया जा सकता है।
इसके अलावा यदि किसी दिव्यांग या बुजुर्ग श्रमिक के चेहरे का मिलान नहीं हो पाता या मोबाइल में समस्या आती है, तो मेट या क्षेत्रीय कार्यकर्ता अधिकृत ‘एक्सेप्शन मैकेनिज्म’ (छूट व्यवस्था) के तहत अनुरोध भेज सकता है। इससे पात्र मजदूर का हक सुरक्षित रहता है।
इसका असर: पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी हाजिरी रोकने का तंत्र
पूर्व में कार्यस्थलों पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर उपस्थिति दर्ज करने या फर्जी तरीके से मजदूरी उठाने की शिकायतें आती थीं। मार्च 2026 में चेहरे की पहचान व्यवस्था जोड़ने के बाद से इन विसंगतियों पर रोक लगी है।
केवल ऐप में हाजिरी दर्ज होना ही भुगतान का आधार नहीं होता। ऐप में दर्ज उपस्थिति के बाद तकनीकी अभियंताओं द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मापन पुस्तिका (e-MB) में किए गए कार्य का भौतिक मापन दर्ज किया जाता है। इसके पश्चात प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
मंत्रालय ने जिलों में औचक निरीक्षण के लिए रैंडम जांच टीमें तैनात की हैं। अनधिकृत या फर्जी ऐप का इस्तेमाल करने वालों पर डिजिटल साक्ष्य जुटाकर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के निर्देश राज्यों को दिए गए हैं।
फार्मर आईडी का लक्ष्य: 11 करोड़ का आंकड़ा छूने के करीब
ग्रामीण विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2027 तक 11 करोड़ फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने का लक्ष्य तय किया था।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि निर्धारित समय से एक वर्ष से भी अधिक पहले देश में 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। मात्र 30 हजार और आईडी बनते ही भारत 11 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लेगा। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी बिचौलिए के मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? एनएमएमएस ऐप में नया सुरक्षा संस्करण क्यों जोड़ा गया है?
उत्तर। एनएमएमएस ऐप में नया फेस ऑथेंटिकेशन और लाइवनेस डिटेक्शन संस्करण फर्जी हाजिरी, फोटो डुप्लीकेशन और ऐप क्लोनिंग को रोकने के लिए जोड़ा गया है।
प्रश्न? यदि कार्यस्थल पर इंटरनेट नेटवर्क न हो तो मजदूरों की हाजिरी कैसे लगेगी?
उत्तर। बिना नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ऐप के जरिए ऑफलाइन हाजिरी दर्ज की जा सकती है। काम खत्म होने के बाद नेटवर्क वाले स्थान पर जाकर मस्टर रोल अपलोड किया जाता है।
प्रश्न? देश में अब तक कितनी फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं?
उत्तर। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार देश में 10 करोड़ 99 लाख 70 हजार से अधिक फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं, जो 11 करोड़ के लक्ष्य के बेहद करीब है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






