
सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर अधिकारियों और समुद्री कैडेटों को शपथ दिलाई तथा सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आधिकारिक आवास पर अधिकारियों और समुद्री कैडेटों को दिलाई शपथ।
- सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित कर 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण को किया याद।
- वर्ष 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस।
- कार्यक्रम में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने आधिकारिक आवास पर अधिकारियों, कर्मचारियों और समुद्री कैडेटों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर देश की अखंडता को बनाए रखने का संकल्प दोहराया गया।
राष्ट्रीय एकता दिवस का क्या महत्व है और यह क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय एकता दिवस हर साल 31 अक्टूबर को भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। केंद्र सरकार ने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से 2014 में इसकी शुरुआत की थी। इस दिन नागरिक और सरकारी संस्थान राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।
समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने आजादी के बाद देश की 560 से अधिक रियासतों को एक सूत्र में पिरोने के सरदार पटेल के ऐतिहासिक कार्य को रेखांकित किया। सोनोवाल ने कहा कि देश का राजनीतिक एकीकरण सरदार पटेल की दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं था।
सोनोवाल ने अधिकारियों और समुद्री कैडेटों को दिलाई शपथ
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित इस समारोह में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति निष्ठा की शपथ ली। शपथ पाठ के दौरान अधिकारियों और यंग मैरीटाइम कैडेट्स ने दोहराया कि वे राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए खुद को समर्पित करेंगे।
प्रतिभागियों ने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने देशवासियों के बीच इस संदेश को फैलाने का हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि यह शपथ सरदार पटेल की दूरदर्शिता और उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर ली जा रही है। साथ ही देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी ईमानदारी से योगदान देने की बात कही गई।
समारोह में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया। सोनोवाल ने उपस्थित मैरीटाइम कैडेट्स से बातचीत की। उन्होंने कहा कि देश के प्रति युवाओं का जुनून और उत्साह ‘युवा शक्ति’ की असली ताकत को दर्शाता है।
सरदार पटेल की विरासत और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का विजन
सोनोवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल ने भारत को एक सूत्र में बांधा, लेकिन दशकों तक उन्हें वह पहचान और सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस स्थिति में बदलाव आया है।
केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण करके और 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में समर्पित करके सरदार पटेल को राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में सही स्थान दिया गया है।
- शपथ ग्रहण: मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और समुद्री कैडेटों ने ली राष्ट्रीय सुरक्षा की शपथ।
- सरदार पटेल को नमन: 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को किया गया याद।
- उपस्थिति: पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी रहे शामिल।
- राष्ट्रीय लक्ष्य: वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में युवाओं और अवसंरचना की भूमिका पर दिया गया बल।
राष्ट्रीय एकता दिवस और तटीय बुनियादी ढांचे का जुड़ाव
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के तहत चल रही परियोजनाओं का जिक्र करते हुए सोनोवाल ने कहा कि जलमार्ग और बंदरगाह देश के एकीकरण का माध्यम बन रहे हैं। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अब केवल एक विचार नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन बन चुका है।
भारत के बंदरगाह, शिपिंग लेन और आंतरिक जलमार्ग देश के पूर्वोत्तर राज्यों से लेकर पश्चिमी तट तक हर हिस्से को आपस में जोड़ रहे हैं। व्यापारिक और तटीय संपर्क बढ़ने से देश के विभिन्न राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंध और मजबूत हो रहे हैं।
सोनोवाल ने स्पष्ट किया कि 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में देश के युवा समुद्री कैडेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बुनियादी ढांचे का यह विकास देश को भौगोलिक और आर्थिक रूप से एकजुट रखने का कार्य करता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत और पृष्ठभूमि
भारत सरकार ने वर्ष 2014 में पहली बार 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश की राष्ट्रीय राजधानी से लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों तक नागरिकों में एकता और सुरक्षा का भाव जागृत करना था।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। 1947 में भारत की आजादी के समय देश में 560 से अधिक छोटी-बड़ी रियासतें थीं। सरदार पटेल ने अपनी कूटनीतिक कुशलता और दृढ़ता से इन सभी रियासतों का भारत संघ में विलय कराया। इसी योगदान के कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है।
इस अवसर पर देश भर के सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और पुलिस बलों द्वारा रन फॉर यूनिटी (एकता दौड़) और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: राष्ट्रीय एकता दिवस कब और किसकी याद में मनाया जाता है?
उत्तर: राष्ट्रीय एकता दिवस हर साल 31 अक्टूबर को भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। केंद्र सरकार ने 2014 में इसकी शुरुआत की थी।
प्रश्न: सर्बानंद सोनोवाल ने किस मंत्रालय के अधिकारियों को शपथ दिलाई?
उत्तर: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने आधिकारिक आवास पर मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और समुद्री कैडेटों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
प्रश्न: सरदार वल्लभभाई पटेल को ‘लौह पुरुष’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: आजादी के बाद सरदार पटेल ने 560 से अधिक देशी रियासतों का भारत में विलय कराकर देश का राजनीतिक एकीकरण किया था। उनकी इसी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






