
नई दिल्ली स्थित संसद भवन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर व्यापार समझौते और द्विपक्षीय संबंधों पर विचार-विमर्श किया।
मुख्य बातें
- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति (AFET) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
- डेविड मैकलिस्टर के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा हुई।
- भारत और यूरोपीय संघ मिलकर 25 लाख करोड़ डॉलर का बाजार और 2 अरब की आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- बैठक में ‘होराइजन यूरोप’ कार्यक्रम और व्यापार व प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के तहत सहयोग की समीक्षा की गई।
- उपराष्ट्रपति ने स्पेन में हुए हालिया रेल हादसे पर गहरा शोक जताया।
भारत यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय संबंधों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने 28 अक्टूबर 2026 को संसद भवन में यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति (AFET) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की अगवानी की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष डेविड मैकलिस्टर कर रहे थे। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, तकनीक और बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था के निर्माण जैसे विषयों पर गहराई से बातचीत की।
भारत यूरोपीय संघ की बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
भारत यूरोपीय संघ की इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने और दोनों क्षेत्रों के बीच 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के साझा बाजार के अवसरों का लाभ उठाने पर सहमति बनी। उपराष्ट्रपति ने इस प्रस्तावित व्यापार समझौते को ‘सभी समझौतों की जननी’ बताया और भरोसा जताया कि इस पर इसी वर्ष हस्ताक्षर हो जाएंगे। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी साझाकरण, अनुसंधान और रणनीतिक सहयोग पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
मुफ्त व्यापार समझौता और 25 लाख करोड़ डॉलर का बाजार
बैठक में आर्थिक साझेदारी पर विशेष जोर दिया गया। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रेखांकित किया कि भारत और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। वर्तमान में दोनों पक्ष मिलकर लगभग 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के विशाल संयुक्त बाजार और करीब दो अरब लोगों की आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दोनों पक्षों के बीच जारी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह समझौता दोनों क्षेत्रों के आर्थिक परिदृश्य को बदल सकता है। उन्होंने कहा कि व्यापार और निवेश में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए यूरोपीय संसद से आवश्यक सहयोग की उम्मीद है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच यदि यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो इससे भारतीय निर्यातकों, आईटी सेवाओं, कपड़ा उद्योग और कृषि उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार का रास्ता आसान हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, भारत में यूरोपीय निवेश, उच्च तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।
तकनीक और अनुसंधान: TTC और ‘होराइजन यूरोप’ की प्रगति
व्यापारिक रिश्तों के अलावा, डिजिटल और तकनीकी साझेदारी भी इस वार्ता का प्रमुख केंद्र रही। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (Trade and Technology Council – TTC) की पहलों पर संतोष व्यक्त किया गया। टीटीसी दोनों क्षेत्रों के बीच उच्चस्तरीय रणनीतिक समन्वय स्थापित करने में प्राथमिक तंत्र के रूप में कार्य कर रहा है। इसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, हरित प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तालमेल बिठाया जा रहा है।
इसके साथ ही, उपराष्ट्रपति ने यूरोपीय संघ के प्रतिष्ठित अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रम ‘होराइजन यूरोप’ (Horizon Europe) में भारत की भागीदारी से जुड़ी वार्ताओं के पूरा होने पर प्रसन्नता जताई। होराइजन यूरोप 95 अरब यूरो से अधिक का दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक अनुसंधान कोष है। इसमें भारत के शामिल होने से भारतीय वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों को यूरोपीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर उन्नत शोध करने का अवसर प्राप्त होगा।
लोकतांत्रिक मूल्य और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में भारत और यूरोपीय संघ की साझी भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों और खुली बाजार अर्थव्यवस्थाओं के रूप में दोनों पक्षों की वैश्विक जिम्मेदारी काफी अहम है। भारत और यूरोपीय संघ विविधतापूर्ण तथा बहुलतावादी समाजों के प्रतीक हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक स्थिर, पारदर्शी और लचीली बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था का निर्माण दोनों पक्षों के साझा हितों में शामिल है। 2025 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन के नेतृत्व में भारत आए प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उस यात्रा के बाद से संस्थागत ढांचा बेहद मजबूत हुआ है। इसके अलावा यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्राओं ने रणनीतिक संबंधों को नई गति प्रदान की है।
इसका असर: आम नागरिक और भारतीय व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच यदि मुक्त व्यापार समझौता इसी वर्ष पूरा हो जाता है, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर देखने को मिलेगा:
- भारतीय निर्यात को बढ़त: कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि क्षेत्र को यूरोपीय बाजार में तरजीही पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा।
- रोजगार के अवसर: यूरोपीय कंपनियों के भारत में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में आने से देश में कुशल और अर्ध-कुशल कार्यबल के लिए नए रोजगार पैदा होंगे।
- भारतीय पेशेवरों को आसानी: आईटी, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य क्षेत्र के भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में कार्य करने की प्रक्रिया सरल हो सकती है।
- उपभोक्ताओं को लाभ: यूरोपीय गुणवत्ता वाली मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और उपभोक्ता उत्पाद भारतीय बाजार में कम आयात शुल्क पर उपलब्ध हो सकेंगे।
- शोध एवं शिक्षा में बढ़ावा: ‘होराइजन यूरोप’ कार्यक्रम के जरिए भारतीय छात्रों और वैज्ञानिकों को वैश्विक अनुसंधान परियोजनाओं का हिस्सा बनने और वित्तीय मदद पाने का सीधा अवसर मिलेगा।
बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि और संवेदना का संदेश
संसद भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान संसदीय राजनय की झलक भी देखने को मिली। भारत की ओर से अंतर-संसदीय मैत्री समूहों के प्रमुखों ने इसमें भाग लिया। इनमें राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा (भारत-जर्मनी संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष), सुरेंद्र सिंह नागर (भारत-पोलैंड संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष), अमर पाल मौर्य (भारत-पोलैंड संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष) और राज्यसभा सांसद पी. टी. उषा (भारत-जर्मनी संसदीय मैत्री समूह की अध्यक्ष) उपस्थित रहे।
इस औपचारिक चर्चा के दौरान उपराष्ट्रपति ने एक मानवीय संदेश भी दिया। उन्होंने स्पेन में हाल ही में हुए दुखद रेल हादसे पर भारत की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की और पीड़ित परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई।
भारत यूरोपीय संघ संबंधों की पृष्ठभूमि और आगामी कदम
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं और यह भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पहली बार वर्ष 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मतभेदों के कारण 2013 में यह टल गई थी। इसके बाद 2022 में आधिकारिक तौर पर वार्ताओं को दोबारा शुरू किया गया।
हाल के महीनों में वार्ता के कई दौर पूरे हो चुके हैं। भारत का ध्यान अपनी घरेलू इंडस्ट्री के संरक्षण के साथ-साथ यूरोपीय बाजारों तक आसान पहुंच बनाने पर है, जबकि यूरोपीय संघ अपनी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में शुल्क कटौती की मांग कर रहा है। उपराष्ट्रपति की इस बैठक के बाद यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष वर्ष 2026 के अंत तक इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: भारत यूरोपीय संघ के बीच हालिया बैठक कहां और किसकी अध्यक्षता में हुई?
उत्तर: यह उच्चस्तरीय बैठक नई दिल्ली स्थित संसद भवन में हुई, जिसमें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल की अगवानी की।
प्रश्न: भारत और यूरोपीय संघ का संयुक्त बाजार कितना बड़ा है?
उत्तर: दोनों क्षेत्र मिलकर लगभग 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के बाजार और करीब 2 अरब लोगों की कुल आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रश्न: ‘होराइजन यूरोप’ कार्यक्रम में भारत की भागीदारी का क्या महत्व है?
उत्तर: यह यूरोपीय संघ का प्रमुख अनुसंधान और नवाचार वित्तपोषण कार्यक्रम है। इसमें शामिल होने से भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्याधुनिक शोध परियोजनाओं में काम करने का अवसर मिलेगा।
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