
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के दौरान विभिन्न देशों से आए सांसदों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार साझा किए।
मुख्य बातें
- नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 का आयोजन किया गया।
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के आए संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से संवाद किया।
- बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच विभिन्न साझा मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
- प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस मुलाकात की जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के दौरान ब्रिक्स देशों के सांसदों के साथ सार्थक संवाद किया। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत आए विभिन्न संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों ने शिरकत की। प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस संवाद के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी हितों और विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 में क्या रही मुख्य बातें?
ब्रिक्स देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में इस सम्मेलन की शुरुआत हुई है। इस मंच के माध्यम से दुनिया के उभरते हुए बड़े बाजारों और विकासशील देशों के प्रतिनिधि आपस में जुड़ते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान विदेशी सांसदों से मुलाकात की और समसामयिक विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाया। इस प्रकार के कूटनीतिक और विधायी संवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी समझ को बढ़ाने का काम करते हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी काफी चर्चा है। भारत ने हमेशा से वैश्विक मंचों पर बहुपक्षीय सहयोग और आपसी संवाद पर जोर दिया है। इस सम्मेलन के जरिए विधायी निकायों के बीच संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने की इच्छा जताई।
ब्रिक्स संसदीय मंच का क्या असर और महत्व है?
ब्रिक्स (BRICS) संगठन दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं। इस समूह के संसदीय मंच के जरिए इन देशों की संसदें और उनके प्रतिनिधि एक साझा मंच पर आते हैं। इससे न केवल विधायी स्तर पर अनुभवों का आदान-प्रदान होता है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाली नीतियों पर भी साझा दृष्टिकोण बनता है।
- ब्रिक्स देशों की संसदें विधायी मामलों पर एक-दूसरे के अनुभवों से सीखती हैं।
- यह मंच वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में मदद करता है।
- विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा मिलती है।
- संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के दौरों से आपसी कूटनीति और मजबूत होती है।
प्रधानमंत्री ने इस बातचीत के तुरंत बाद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मुद्दों पर विचारों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ है। इस प्रकार की उच्च स्तरीय बैठकें भविष्य में होने वाले समझौतों और साझेदारियों की नींव मजबूत करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच कहां आयोजित किया गया? उत्तर। यह मंच नई दिल्ली में आयोजित किया गया है।
प्रश्न? इस मंच के दौरान प्रधानमंत्री ने किसके साथ संवाद किया? उत्तर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स देशों से आए संसदीय प्रतिनिधिमंडलों और सांसदों के साथ संवाद किया।
प्रश्न? इस बैठक की जानकारी किस माध्यम से दी गई? उत्तर। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) और प्रधानमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






