
राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम-के) ने भारत के पहले ‘एआई × फूड टेक हैकाथॉन’ यानी ‘हैक द फोर्क’ का सफल आयोजन किया है।
मुख्य बातें
- कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (एनआईएफटीईएम-के) द्वारा किया गया।
- यह भारत का पहला एआई आधारित फूड टेक हैकाथॉन था, जो 24 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2026 तक चला।
- अंतिम दौर में 10 राज्यों की 22 टीमों के 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
- विजेता टीमों के लिए 1.5 लाख रुपये के पुरस्कार और स्टार्टअप इनक्यूबेशन प्रोग्राम में शामिल होने का अवसर रखा गया था।
राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (एनआईएफटीईएम-के) ने देश के पहले फूड टेक हैकाथॉन का सफल आयोजन किया है। इस 24 घंटे तक चले अनूठे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैकल्पिक प्रोटीन उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को हल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करना था। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, यह देश में अपनी तरह का पहला ऐसा आयोजन था, जिसमें तकनीक और खाद्य विज्ञान का अनूठा संगम देखने को मिला।
हैक द फोर्क: भारत का पहला एआई आधारित फूड टेक हैकाथॉन
भारत का पहला एआई आधारित फूड टेक हैकाथॉन टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और तकनीक के मेल पर केंद्रित था। फ्रांस स्थित गैर-लाभकारी पहल ‘हैक द फोर्क’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत 24 अक्टूबर 2026 को हुई थी। इस प्रतिस्पर्धा का समापन 25 अक्टूबर को हुआ, जहां देश भर से आए युवा नवोन्मेषकों ने विशेषज्ञों की जूरी के सामने अपने अत्याधुनिक समाधान प्रस्तुत किए। शुरुआत में देश भर से 85 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से कड़ी प्रक्रिया के बाद 25 टीमों को अंतिम चरण के लिए चुना गया।
इस गहन चुनौती में 10 अलग-अलग राज्यों की 22 टीमों के 90 से अधिक प्रतिभागियों ने शारीरिक रूप से भाग लिया। इन युवाओं का संबंध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से था। एनआईएफटीईएम-के के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन देश के खाद्य इकोसिस्टम को मजबूत करने और अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देने में अहम साबित होगा।
इसका असर और वैकल्पिक प्रोटीन उद्योग की भविष्य की राह
इस फूड टेक हैकाथॉन का मुख्य केंद्र बिंदु वैकल्पिक प्रोटीन उद्योग को गति देना और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना था। इस क्षेत्र में पौधों पर आधारित खाद्य नवाचार, किण्वन तकनीक और खाद्य अपशिष्ट को कम करने जैसे गंभीर विषय शामिल हैं। आधुनिक युग में जहां जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा बड़ी चिंताएं हैं, वहां युवा मस्तिष्कों द्वारा तैयार किए गए एआई आधारित समाधान भविष्य में पारंपरिक खाद्य उद्योगों की तस्वीर बदल सकते हैं।
- प्रतियोगिता में 10 राज्यों के 90 से अधिक युवा प्रतिभागी शामिल हुए।
- आईआईटी, आईआईआईटी और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपनी तकनीकी क्षमता दिखाई।
- विजेताओं के लिए 1.5 लाख रुपये के नकद पुरस्कार रखे गए थे।
- शीर्ष टीमों को एनआईएफटीईएम-के के स्टार्टअप इनक्यूबेशन प्रोग्राम में एंट्री का मौका मिला।
इस हैकाथॉन का समन्वय एनआईएफटीईएम-के के प्रोफेसर तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट – कुंडली बिजनेस इनक्यूबेशन फाउंडेशन (NTIBIF) के सीईओ डॉ. विमल पंत ने किया। इसके अलावा, गुड फूड इंस्टीट्यूट (GFI) इंडिया, आईआईआईटी सोनीपत और दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाकर छात्रों को तकनीकी बारीकियां सिखाईं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? इस फूड टेक हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर। इसका मुख्य उद्देश्य वैकल्पिक प्रोटीन उद्योग और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की चुनौतियों को हल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करना था।
प्रश्न? इस आयोजन में किस संस्थान ने मुख्य भूमिका निभाई?
उत्तर। इसका आयोजन राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (एनआईएफटीईएम-के) द्वारा ‘हैक द फोर्क’ के सहयोग से किया गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






