रविवार, अक्टूबर 25, 2026

रामसर स्थल: भारत में अब तक 103 आर्द्रभूमियां शामिल, एशिया में पहला स्थान

Date:

रामसर स्थल

भारत में वर्ष 2014 के बाद से अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की संख्या चार गुना बढ़कर 103 तक पहुंच गई है। जानिए नए स्थलों के विवरण और संरक्षण के नियम।

मुख्य बातें

  • भारत में 15 अक्टूबर 2026 तक रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है, जो 13.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं।
  • रामसर स्थलों की संख्या के मामले में भारत एशिया में प्रथम और विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
  • वर्ष 2026 में सुरहा ताल (100वां), ग्लॉ झील (101वां), सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील को नए स्थलों के रूप में शामिल किया गया।
  • तमिलनाडु 20 रामसर स्थलों के साथ देश में शीर्ष स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है।

रामसर स्थल नेटवर्क का विस्तार भारत में वर्ष 2014 के बाद से लगभग चार गुना हो चुका है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, देश में 15 अक्टूबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों यानी रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। वर्ष 2014 में भारत में कुल 26 ऐसे नामित क्षेत्र थे, जो अब 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 13.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। नेटवर्क के आकार के आधार पर भारत एशिया में पहले स्थान पर है, जबकि पूरे विश्व में इसका स्थान तीसरा है।

रामसर स्थल की वर्तमान स्थिति और वैश्विक रैंकिंग

रामसर स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व की ऐसी आर्द्रभूमि को कहा जाता है, जिसे 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त होता है। भारत में अक्टूबर 2026 तक कुल 103 रामसर स्थल हैं, जो 13.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करते हैं। एशिया में भारत इस सूची में पहले और वैश्विक स्तर पर तीसरे पायदान पर है।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय से राज्य सरकारें उपयुक्त आर्द्रभूमियों की पहचान कर रामसर सचिवालय को प्रस्ताव भेजती हैं। देश की जल प्रणालियों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम 2017 लागू हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी प्रणाली संरक्षण योजना (NPCA), अमृत धरोहर, मिष्टी और मिशन सहभागिता जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक और सामुदायिक संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

रामसर कन्वेंशन का इतिहास और भारत की भागीदारी

वैश्विक स्तर पर जल निकायों और दलदली क्षेत्रों के संरक्षण के लिए रामसर कन्वेंशन नाम की एक अंतर-सरकारी संधि की गई थी। इस समझौते को 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में स्वीकार किया गया था और यह वर्ष 1975 में लागू हुआ था। अक्टूबर 2026 तक इस संधि में 172 देश शामिल हैं और दुनिया भर में 2,536 से अधिक स्थलों को रामसर सूची में दर्ज किया जा चुका है।

भारत 1 फरवरी 1982 को इस अंतरराष्ट्रीय संधि का पक्षकार बना था। देश में 1 अक्टूबर 1981 को पहली बार ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का दर्जा मिला था। चिल्का झील में पारिस्थितिक सुधार के बाद इसे वर्ष 2002 में मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड से हटा दिया गया था। मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड उन रामसर स्थलों की सूची है जहां पर्यावरण में नकारात्मक बदलाव हुए हैं या होने का खतरा रहता है।

रामसर स्थल के चयन के नौ प्रमुख मानदंड

किसी भी आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय सूची में शामिल होने के लिए नौ तय मानदंडों में से कम से कम एक शर्त को पूरा करना होता है। इन मानदंडों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  • प्राकृतिक विशिष्टता (समूह क): संबंधित जैव-भौगोलिक क्षेत्र में किसी दुर्लभ या अद्वितीय प्राकृतिक आर्द्रभूमि का उदाहरण होना।
  • जैव विविधता व संकटग्रस्त जीव (समूह ख): संकटग्रस्त या अतिसंकटग्रस्त पादप व जंतु प्रजातियों को आश्रय देना।
  • जीवन चक्र में सहायता: किसी जीव प्रजाति को उसके जीवन चक्र के संवेदनशील समय में या प्रतिकूल परिस्थितियों में शरण उपलब्ध कराना।
  • जलपक्षियों की उपस्थिति: नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षियों या किसी पक्षी प्रजाति की 1 प्रतिशत आबादी का निवास होना।
  • मछलियों के लिए अनुकूलता: स्थानीय मछली प्रजातियों के भोजन, प्रजनन स्थल और प्रवास मार्ग के रूप में कार्य करना।

हाल ही में शामिल नए रामसर स्थल कौन से हैं?

भारत की इस सूची में हाल के वर्षों में कई नए क्षेत्र जोड़े गए हैं। वर्ष 2025 में 11 नई आर्द्रभूमियों को शामिल किए जाने से देश में कुल संख्या 96 हुई थी। इसके बाद जून 2026 में उत्तर प्रदेश का सुरहा ताल भारत का 100वां रामसर स्थल बना। अगस्त 2026 में अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील को 101वें स्थल के रूप में मान्यता मिली।

अक्टूबर 2026 में दो और प्रमुख क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया। इनमें पहला चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि है, जो शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में 1958 में बना मानव-निर्मित जलाशय है। यह पलास फिश ईगल और कॉमन पोचार्ड जैसी प्रजातियों का घर है। दूसरा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित सौज झील है। यह उथली झील 30,000 से अधिक जलीय पक्षियों और सारस जैसे जीवों को घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती है।

इसका असर: रामसर दर्जे से मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय लाभ

किसी जल निकाय को रामसर सूची में जगह मिलने से उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और दृश्यता मिलती है। इससे संरक्षण कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और विशेषज्ञों की सलाह आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसके अतिरिक्त, लघु-अनुदान योजनाओं और द्विपक्षीय वित्तपोषण एजेंसियों के माध्यम से वित्तीय सहायता मिलने का मार्ग भी प्रशस्त होता है। जिम्बाब्वे के विक्टोरिया फॉल्स में आयोजित 15वें पक्षकार सम्मेलन (COP15) में भारत द्वारा प्रस्तुत सतत जीवनशैली के प्रस्ताव को 172 देशों का समर्थन मिला था।

नामांकन के बाद राज्य सरकारों को उस आर्द्रभूमि का एकीकृत प्रबंधन करना अनिवार्य होता है। नियम के तहत प्रत्येक छह वर्ष में रामसर सूचना पत्रक (RIS) को अद्यतन करना पड़ता है। राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो तमिलनाडु 20 स्थलों के साथ देश में पहले स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे पायदान पर मौजूद है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: भारत में कुल कितने रामसर स्थल हैं?
उत्तर: अक्टूबर 2026 तक भारत में कुल 103 रामसर स्थल हैं, जो 13.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैले हुए हैं।

प्रश्न: भारत के पहले रामसर स्थल कौन से हैं?
उत्तर: ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान 1 अक्टूबर 1981 को नामित भारत के प्रथम रामसर स्थल हैं।

प्रश्न: सबसे ज्यादा रामसर स्थल किस भारतीय राज्य में हैं?
उत्तर: भारत में सर्वाधिक 20 रामसर स्थल तमिलनाडु में हैं। उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

IIT दिल्ली में ETD-2026 के दौरान भाषिणी एआई ने पेश किए बहुभाषी समाधान

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत भाषिणी एआई ने आईआईटी दिल्ली में ईटीडी-2026 संगोष्ठी के दौरान बहुभाषी शोध समाधान प्रदर्शित किए।

जैविक विविधता फंड: एनबीए ने राज्यों को बांटे 1.04 करोड़ रुपये

जैविक विविधता फंड के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने राज्यों को 1.04 करोड़ रुपये की एबीएस राशि आवंटित की है। जानिए किस राज्य को कितना पैसा मिला।

अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन 2026 भुवनेश्वर में संपन्न, शहरों को मिले अवार्ड्स

अर्बन मोबिलिटी सम्मेलन 2026 भुवनेश्वर में संपन्न हुआ। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने उत्कृष्ट शहरों को पुरस्कार दिए और 3-I का मंत्र दिया। जानिए पूरी सूची।

आईएमसी गया की शुरुआत: बिहार में 4200 करोड़ रुपये के 12 समझौतों पर हस्ताक्षर

आईएमसी गया परियोजना के तहत बोधगया में 12 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। जानें बिहार में 4200 करोड़ रुपये के इस निवेश और नौकरियों के अवसरों का पूरा विवरण।
हमारे बारे में · संपादकीय नीति · सुधार नीति · स्वामित्व एवं वित्त पोषण · गोपनीयता नीति · संपर्क करें
© 2026 Aaj Patrika