
ग्रामीण विकास मंत्रालय की इस योजना के तहत ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल से रोजगार और सतत आजीविका के अवसरों को मजबूत किया जा रहा है।
मुख्य बातें
- पीआईबी के अनुसार दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई) अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रही है।
- केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 750 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
- संशोधित डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है।
- योजना के तहत अब तक 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
पीआईबी (पत्र सूचना कार्यालय) के अनुसार दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0 ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रही है। भारत की युवा आबादी 2036 तक लगभग 345 मिलियन पहुंचने का अनुमान है। इस जनसांख्यिकीय क्षमता का उपयोग करने के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसरों की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 25 सितंबर 2014 को इस योजना की शुरुआत की थी। वर्तमान में यह कार्यक्रम अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रहा है।
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0 क्या है और युवाओं को कैसे लाभ मिलता है?
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 गरीब परिवारों के 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है। यह योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 50 प्रतिशत, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत अनिवार्य कवरेज के माध्यम से सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती है। सरकार ने मई 2025 में उन्नत दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया था, जिससे प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता के ढांचे को मजबूत किया गया। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
विशेष पहल और क्षेत्रीय उपाय
संवेदनशील क्षेत्रों और विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत विशेष कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं।
- रोशनी पहल: यह गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान देती है।
- हिमायत योजना: यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक विशेष योजना है जो 100 प्रतिशत केंद्र द्वारा वित्त पोषित है।
- पूर्वोत्तर आवंटन: पूर्वोत्तर राज्यों की अद्वितीय स्थलाकृति को देखते हुए कुल आवंटन का 10 प्रतिशत इन राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है।
- दुर्गम क्षेत्र भत्ता: परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां प्रति उम्मीदवार आधार प्रशिक्षण लागत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की दर से भुगतान के लिए पात्र हैं।
प्रशिक्षण ढांचे का मानकीकरण और नए नियम
संशोधित ढांचे के तहत प्रशिक्षण मानकों को मजबूत किया गया है और न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि बढ़ाई गई है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 न्यूनतम 576 घंटे की अवधि को बरकरार रखता है, जिसमें तीन महीने के पाठ्यक्रम में 396 घंटे का डोमेन प्रशिक्षण और 180 घंटे का अनिवार्य गैर-डोमेन प्रशिक्षण शामिल है। गैर-डोमेन घटक में अंग्रेजी संचार, रोजगारपरकता और जीवन कौशल, कंप्यूटर और डिजिटल साक्षरता तथा उद्यमिता शामिल हैं। इसके अलावा, न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को पहले के तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है।
रोजगार प्रतिधारण और वित्तीय सहायता
विस्तारित छह महीने की प्लेसमेंट अवधि का समर्थन करने के लिए, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 रोजगार निरंतरता को सुविधाजनक बनाने के लिए 12 महीने की पोस्ट-प्लेसमेंट ट्रैकिंग प्रदान करता है। प्लेस किए गए उम्मीदवारों को छह महीने के लिए 1,270 रुपये प्रति माह की दर से कुल 7,620 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है। इसके अलावा, 365 दिनों तक कार्यरत रहने वाले उम्मीदवारों को प्रति उम्मीदवार 5,000 रुपये की प्रतिधारण सहायता प्रदान की जाती है। प्रवासन सहायता केंद्रों के लिए वार्षिक वित्त पोषण को पहले के 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक कर दिया गया है ताकि बड़े शहरों में जाने वाले युवाओं को आवास और परामर्श में मदद मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना की शुरुआत कब हुई थी?
उत्तर। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 25 सितंबर 2014 को शुरू की गई थी।
प्रश्न? इस योजना के तहत किस आयु वर्ग के युवाओं को प्रशिक्षित किया जाता है?
उत्तर। इस योजना के तहत 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






