
11वें आयुर्वेद दिवस के मौके पर जानिए कैसे देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य बीमा से जोड़ा जा रहा है।
मुख्य बातें
- देशभर में 12,260 से अधिक आयुष आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं
- वर्ष 2024 में आईआरडीएआई ने सभी बीमा कंपनियों के लिए आयुर्वेद को बीमा कवर में शामिल करना अनिवार्य किया
- ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के जरिए 50 करोड़ से अधिक मरीज मुफ्त डॉक्टर परामर्श ले चुके हैं
- मार्च 2026 तक देश में 593 आयुर्वेद कॉलेज और 45,245 स्नातक सीटें उपलब्ध हैं
आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर भारत अपनी पांच हजार साल पुरानी इस चिकित्सा पद्धति को साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक शोध के जरिए आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल का मुख्य हिस्सा बनाने के एक दशक का सफर पूरा कर रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, आज देश भर के सरकारी क्लीनिक और अस्पताल सामान्य चिकित्सा देखभाल के साथ आयुर्वेदिक उपचार भी दे रहे हैं। मुफ्त ऑनलाइन डॉक्टर परामर्श, बीमा कवरेज और उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान इन प्राचीन आरोग्य पद्धतियों को सभी के लिए सुरक्षित और सुलभ बना रहे हैं। मजबूत वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से देश यह दिखा रहा है कि स्वस्थ भविष्य के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान कैसे मिलकर काम कर सकते हैं।
आयुर्वेद दिवस 2026: स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार
आयुर्वेद दिवस 2026 के इस महत्वपूर्ण अवसर पर सरकार पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का संचालन कर रही है। इन दोनों राष्ट्रीय मिशनों के जरिए देश भर में आयुष क्लीनिक, अस्पताल और सामुदायिक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विकास के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 6,406.99 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। मौजूदा स्वास्थ्य डिस्पेंसरियों का आधुनिकीकरण करके उन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अस्पतालों और चिकित्सा शिक्षा का बुनियादी ढांचा
सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देश भर में कई कदम उठाए हैं। 13 मार्च, 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 593 आयुर्वेद कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनमें 45,245 स्नातक आयुर्वेद सीटें और 5,673 स्नातकोत्तर आयुर्वेद सीटें शामिल हैं। इसके अलावा वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल तथा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज जैसे केंद्रीय अस्पतालों में एकीकृत चिकित्सा विभाग शुरू किए गए हैं, जहां पंचकर्म इकाई सहित सभी सुविधाएं मिल रही हैं।
- देश में 12,260 से अधिक आयुष आयुष्मान आरोग्य मंदिर सक्रिय हैं
- 13,249 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सामान्य चिकित्सा के साथ आयुष सेवाएं उपलब्ध हैं
- विभिन्न राज्यों में 25,322 आयुष डॉक्टर और 5,666 अर्द्धचिकित्साकर्मी कार्यरत हैं
- राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत देशभर में 17 नए आयुष कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दी गई है
टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य बीमा का दायरा
पारंपरिक चिकित्सा को आम जनता तक पहुंचाने के लिए डिजिटल तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार की ‘ई-संजीवनी’ नामक मुफ्त टेलीमेडिसिन सेवा का फायदा अब तक 50 करोड़ से ज्यादा मरीज उठा चुके हैं, जिसमें आयुष ओपीडी सेवाएं भी शामिल हैं। स्वास्थ्य बीमा के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव लाते हुए वर्ष 2024 में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने सभी बीमा कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि वे आयुर्वेद सहित चिकित्सा की सभी पद्धतियों को कवर करने वाले उत्पाद या ऐड-ऑन प्रदान करें। इसके अलावा फरवरी 2026 में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के साथ समझौता कर देश की सभी 32 सामान्य बीमा कंपनियों के साथ कैशलेस इलाज के लिए सूचीबद्ध होने का ऐतिहासिक कदम उठाया है।
वैज्ञानिक अनुसंधान और डब्ल्यूएचओ की मान्यता
आयुर्वेद की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान पर जोर दिया जा रहा है। आयुष मंत्रालय के तहत आने वाली केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) देश भर में आयुर्वेदिक अध्ययनों का समन्वय कर रही है। अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ‘आयुर्ज्ञान’ और ‘आयुर स्वास्थ्य योजना’ जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण के 11वें संशोधन (ICD-11) के मॉड्यूल में आयुर्वेद को शामिल किए जाने से इसकी शब्दावली को वैश्विक मान्यता मिल गई है, जिससे बीमा दावों और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान में बड़ी आसानी होगी।
इसका असर और भविष्य की दिशा
सरकार के इन प्रयासों का सीधा असर आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है। अब गांवों और छोटे शहरों के मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही आयुष पद्धतियों से इलाज और मुफ्त दवाइयां मिल रही हैं। पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक बीमा नेटवर्क और टेलीमेडिसिन से जोड़ने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोग भी बिना किसी आर्थिक कठिनाई के आयुर्वेदिक और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों से भारत को वैश्विक चिकित्सा पर्यटन और पारंपरिक अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आयुर्वेद दिवस कब मनाया जाता है और इसकी शुरुआत क्यों हुई? उत्तर। सरकार हर साल शरद विषुव के अवसर पर 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाती है, जिसका उद्देश्य इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को वैज्ञानिक आधार देना और बढ़ावा देना है।
प्रश्न? क्या आयुष उपचारों को स्वास्थ्य बीमा में शामिल किया गया है? उत्तर। हां, IRDAI के निर्देशों के बाद सभी बीमा कंपनियों के लिए आयुर्वेद सहित अन्य आयुष पद्धतियों को बीमा कवर में शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रश्न? ई-संजीवनी सेवा के जरिए आयुर्वेद परामर्श कैसे मिलता है? उत्तर। मरीज ‘ई-संजीवनी’ मुफ्त टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे ऑनलाइन आयुष विशेषज्ञ डॉक्टरों से जुड़कर परामर्श ले सकते हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






