
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजभाषा दिवस पर तकनीकी प्रगति, भारती एआई टूल और भारतीय भाषाओं के परस्पर समन्वय पर विशेष जोर दिया।
मुख्य बातें
- संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
- राजभाषा विभाग का एआई टूल ‘भारती’ और 8.27 लाख प्रविष्टियों वाला डिजिटल शब्दकोश ‘हिंदी शब्द सिंधु’ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
- वर्ष 2024 में प्रशासनिक संवाद को सुगम बनाने के लिए ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की स्थापना की गई थी।
- महात्मा गांधी ने साल 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की थी।
हिंदी दिवस 2026 के मौके पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के नाम अपना विशेष संदेश जारी किया। 14 सितंबर 2026 को जारी इस आधिकारिक संदेश में गृह मंत्री ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश की कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी किसी भी अन्य भारतीय भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं है, बल्कि यह सभी स्वदेशी भाषाओं को आपस में जोड़ने वाली एक मजबूत आत्मीय कड़ी है।
हिंदी दिवस 2026 का मुख्य संदेश क्या है?
हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारत की भाषाई बहुलता देश की सबसे बड़ी ताकत है। भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि समाज का आत्मबोध होती है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए हिंदी और सभी भारतीय भाषाओं को एकजुट होकर आगे बढ़ाने का संकल्प जताया।
तकनीकी विकास और ‘भारती’ एआई टूल का प्रयोग
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में आधुनिक तकनीक और राजभाषा के समन्वय का विस्तृत ब्योरा दिया। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, केंद्र सरकार के राजभाषा विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘भारती’ (Bharati) टूल विकसित किया है। यह डिजिटल उपकरण विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और अनुवाद प्रक्रिया को बेहद आसान बना रहा है।
तकनीकी मोर्चे पर एक और बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ‘हिंदी शब्द सिंधु’ नामक डिजिटल शब्दकोश तैयार किया जा चुका है। इसमें अब तक 8.27 लाख से अधिक शब्द प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी हैं, जो ज्ञान साझा करने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। साल 2024 में स्थापित ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ प्रशासनिक पत्राचार और संवाद को क्षेत्रीय भाषाओं में सुगम बना रहा है। संसदीय राजभाषा समिति ने भी अपने प्रतिवेदन के चार नए खंड भारत के राष्ट्रपति को सौंप दिए हैं।
भारतीय भाषाओं और हिंदी दिवस 2026 का ऐतिहासिक संबंध
गृह मंत्री ने इतिहास के उदाहरण देते हुए बताया कि हिंदी को राष्ट्रव्यापी पहचान दिलाने में उन महापुरुषों का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिनकी अपनी मातृभाषा हिंदी नहीं थी। स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, लेकिन उन्होंने अपना कालजयी ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखा।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने साल 1918 में मद्रास (चेन्नई) में ‘दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा’ की स्थापना की थी। बांग्ला भाषी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फौज की संपर्क भाषा हिंदी को बनाया और ‘जय हिंद’ का नारा दिया। मध्यकालीन साहित्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने आदिकाल के विद्यापति की पदावली, ‘पृथ्वीराज रासो’, और भक्तिकाल में संत तुलसीदास व सूरदास की रचनाओं को याद किया। इसी ऐतिहासिक विरासत के साथ संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा स्वीकारा था।
शिक्षा, न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि अब मातृभाषा को शिक्षा के केंद्र में रखा गया है। देश में इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे कठिन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई भारतीय भाषाओं में शुरू हो चुकी है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) समेत कई प्रतियोगी परीक्षाएं अब अनेक भारतीय भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं।
कानूनी व्यवस्था के क्षेत्र में औपनिवेशिक दौर के कानूनों को बदलकर तीन नए नागरिक-केंद्रित कानून लागू किए गए हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘शक्ति की सप्तधारा’ के विचार में सातवीं धारा भारत का ‘सॉफ्ट पावर’ है, और भाषा ही किसी राष्ट्र के सॉफ्ट पावर का सबसे बड़ा माध्यम होती है।
इसका असर: युवाओं और आम नागरिकों के लिए क्या बदला?
सरकारी नीतियों और डिजिटल तकनीकों के इस समन्वय का सीधा प्रभाव देश के आम नागरिकों और युवाओं पर दिख रहा है। पहले अंग्रेजी भाषा की मजबूरी के कारण ग्रामीण और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा तथा प्रशासनिक सेवाओं में बाधा आती थी। अब मातृभाषा में परीक्षा और पढ़ाई की सुविधा मिलने से युवाओं को समान अवसर मिल रहे हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल ‘भारती’ और ‘हिंदी शब्द सिंधु’ के जरिए भाषा की दीवारें गिर रही हैं। कोई भी नागरिक अपनी मातृभाषा में सोचकर वैश्विक स्तर पर संवाद कर सकता है। गृह मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे दुनिया की जितनी भाषाएं चाहें सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों के साथ घर में मातृभाषा में बात करने का आग्रह किया।
यह वर्ष राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना का 150वां वर्ष भी है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में हिंदी और सभी भारतीय भाषाएं मुख्य आधार स्तंभ बनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? हिंदी दिवस 14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
उत्तर। 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था, इसलिए प्रतिवर्ष 14 सितंबर को यह दिवस मनाया जाता है।
प्रश्न? ‘भारती’ एआई टूल और ‘हिंदी शब्द सिंधु’ क्या हैं?
उत्तर। ‘भारती’ राजभाषा विभाग का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल है, जबकि ‘हिंदी शब्द सिंधु’ 8.27 लाख से अधिक प्रविष्टियों वाला डिजिटल शब्दकोश है।
प्रश्न? दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर। महात्मा गांधी ने साल 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की थी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






