
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में एशियाटिक सोसाइटी द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए इतिहास के डी-कॉलोनाइजेशन और पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई की एशियाटिक सोसाइटी में प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
- समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शामिल हुए।
- एशियाटिक सोसाइटी के संग्रह को ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से जोड़ने का निर्देश दिया गया।
- अमित शाह ने स्पष्ट किया कि डी-कॉलोनाइजेशन इतिहास मिटाना नहीं, बल्कि सत्य को सामने लाना है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई द्वारा आयोजित गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एशियाटिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, गृह मंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन अभिलेखों के संरक्षण और इतिहास के डी-कॉलोनाइजेशन पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।
गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का आयोजन एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई द्वारा किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों और ऐतिहासिक अभिलेखों को जनसामान्य के सामने प्रदर्शित करना है। 13 सितंबर 2026 को उद्घाटन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि यह प्रदर्शनी भारतीय ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने और औपनिवेशिक दृष्टिकोण को समाप्त कर वास्तविक इतिहास को उजागर करने का एक प्रयास है।
डी-कॉलोनाइजेशन इतिहास मिटाना नहीं: अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी के मंच से कहा कि देश में अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि इतिहास मिटाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस विचार से असहमत हैं। डी-कॉलोनाइजेशन का अर्थ इतिहास को मिटाना या बदलना नहीं है, बल्कि इसका सीधा अर्थ इतिहास को संपूर्ण, प्रामाणिक और विशुद्ध भारतीय दृष्टिकोण के साथ पुनः स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी स्मृति, भाषा, परंपरा और अभिलेखों की रक्षा नहीं कर पाता, उसका पतन निश्चित होता है। भारत की ज्ञान परंपरा इतनी सुदृढ़ रही है कि नालंदा के पुस्तकालय को भले ही महीनों तक जलाया गया हो, लेकिन लोगों की स्मृति और चित्त में बसे ज्ञान को कोई समाप्त नहीं कर सका।
ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से जुड़ेगी एशियाटिक सोसाइटी
अमित शाह ने सुझाव दिया कि एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई में मौजूद दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को भारत सरकार के ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से पूर्ण रूप से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने संस्था की नई समिति को निर्देश दिया कि वे महाराष्ट्र के गाँव-गाँव में जाकर विद्वानों के घरों में रखी पुश्तैनी पांडुलिपियों और दस्तावेजों को एकत्र करने का अभियान चलाएं।
एशियाटिक सोसाइटी में महाभारत के दुर्लभ चित्र, जैन कल्पसूत्र और बौद्ध धर्म से जुड़े प्राचीन ग्रंथ सुरक्षित हैं। गृह मंत्री ने कहा कि इन पांडुलिपियों पर व्यापक शोध की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि भारत को वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाने के बीज इन्हीं ग्रंथों में निहित हैं।
इंडोलॉजी और औपनिवेशिक मानसिकता पर प्रहार
अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने इंडोलॉजी (भारतीय विद्या) शब्द के ऐतिहासिक संदर्भ की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के समय में इंडोलॉजी का निर्माण भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन के लिए नहीं, बल्कि यहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था को समझकर लंबे समय तक शासन करने के उद्देश्य से किया गया था।
ब्रिटिश काल में भारत के ज्ञान को औपनिवेशिक भाषा में लिखा गया ताकि समाज में हीनभावना पैदा की जा सके और भारतीय प्रजा का आत्मविश्वास कम हो। अमित शाह ने कहा कि आजादी के 80 से अधिक वर्षों बाद अब समय आ गया है कि ज्ञान को सत्ता के प्रभाव से मुक्त किया जाए और इसका उपयोग विश्व कल्याण के लिए किया जाए।
इसका असर: शोधकर्ताओं और नई पीढ़ी को क्या लाभ होगा?
एशियाटिक सोसाइटी के संग्रह को डिजिटल रूप देने और राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से जोड़ने के निर्णय का सीधा असर भारत के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और छात्रों पर पड़ेगा:
- शोध की सुलभता: देश भर के विश्वविद्यालयों के शोधार्थी मुंबई आए बिना डिजिटल माध्यम से दुर्लभ पांडुलिपियों तक पहुँच सकेंगे।
- काणे समग्र का निर्माण: भारत रत्न पंडित पांडुरंग वामन काणे की कृतियों पर आधारित ‘काणे समग्र’ की रचना की जाएगी, जो भावी पीढ़ी के अध्ययन के काम आएगी।
- साझा ज्ञान नेटवर्क: राज्यों और शहरों के स्थानीय अभिलेखागारों को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे भारतीय इतिहास का अध्ययन सुगम होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी का उद्घाटन किसने और कहाँ किया?
उत्तर: इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित एशियाटिक सोसाइटी में किया।
प्रश्न: अमित शाह ने डी-कॉलोनाइजेशन को लेकर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि डी-कॉलोनाइजेशन का अर्थ इतिहास मिटाना नहीं है, बल्कि सत्य और प्रामाणिक भारतीय दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखना है।
प्रश्न: एशियाटिक सोसाइटी की पांडुलिपियों को किस मिशन से जोड़ा जाएगा?
उत्तर: एशियाटिक सोसाइटी की पांडुलिपियों को भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन’ से जोड़ा जाएगा।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






