सोमवार, सितम्बर 14, 2026

मानसून बीमारी बचाव: बारिश के मौसम में बीमारियों से सुरक्षित रहने का गाइड

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मानसून बीमारी बचाव

बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पेट के संक्रमण से खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक और असरदार उपाय।

मुख्य बातें

  • पानी को हमेशा 10 से 15 मिनट तक उबालकर ही पिएं।
  • घर और आसपास जलजमाव रोककर मच्छरों के पनपने की जगह खत्म करें।
  • बाहर के खुले कटे फल और बासी खाने के सेवन से परहेज करें।
  • पैरों को गीला न रहने दें ताकि फंगल इन्फेक्शन की समस्या न हो।

मानसून बीमारी बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका स्वच्छ पानी पीना, घर में नमी न होने देना और मच्छर जनित रोगों से सतर्क रहना है। बारिश की पहली फुहार गर्मी से राहत ज़रूर लाती है, लेकिन अपने साथ कई तरह के संक्रमण भी लाती है। इस मौसम में हवा और पानी में बैक्टीरिया तथा वायरस तेजी से पनपते हैं। थोड़ी सी लापरवाही पेट से जुड़े संक्रमण, त्वचा के फंगल इन्फेक्शन और तेज बुखार का कारण बन सकती है।

मानसून बीमारी बचाव के मुख्य उपाय क्या हैं?

मानसून बीमारी बचाव के लिए सबसे पहले पीने के पानी को 10-15 मिनट उबालें या प्रमाणित वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। बाहर के कटे फल और बासी खाने से परहेज करें। घर के आसपास पानी जमा न होने देकर डेंगू और मलेरिया पैदा करने वाले मच्छरों को रोकें तथा पैर हमेशा सूखे रखें।

बारिश के मौसम में शरीर का पाचन तंत्र थोड़ा धीमा हो जाता है, जबकि वातावरण में नमी की वजह से कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए इस समय अपना बचाव करना इलाज कराने से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित होता है। सही समय पर सही सावधानी बरतने से आप मौसमी बीमारियों की चपेट में आने से बच सकते हैं।

बारिश में फैलने वाली प्रमुख बीमारियाँ और उनके लक्षण

मानसून के दौरान हवा, दूषित पानी और मच्छरों के जरिए अलग-अलग बीमारियां फैलती हैं। नीचे दी गई तालिका से समझें कि किस बीमारी का मुख्य कारण क्या है और उससे बचाव का तरीका क्या है:

बीमारीमुख्य कारणसामान्य लक्षणप्राथमिक बचाव
डेंगू और मलेरियामच्छर का काटनातेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्दमच्छरदानी और रिपेलेंट का प्रयोग
टाइफाइड और हैजादूषित पानी व बासी भोजनउल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखारउबला पानी और ताजा भोजन
लेप्टोस्पायरोसिसदूषित बारिश के पानी से संपर्कमांसपेशियों में दर्द, तेज बुखारजलभराव में चलने से बचें
फंगल इन्फेक्शनगीली त्वचा व पसीनाखुजली, दाने, त्वचा का लाल होनात्वचा व पैर हमेशा सूखे रखें

मानसून बीमारी बचाव के लिए 6 दैनिक आदतें

अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करके आप परिवार को बारिश के मौसम में होने वाले रोगों से दूर रख सकते हैं। नीचे दिए गए कदमों का पालन रोजाना करें:

  1. पीने के पानी को उबालकर ठंडा करें: बारिश के दिनों में आपूर्ति का पानी दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। पानी को कम से कम 10 से 15 मिनट उबालें ताकि उसमें मौजूद हानिकारक कीटाणु खत्म हो जाएं।
  2. ताजा और गर्म भोजन का सेवन करें: बाहर ठेले पर बिकने वाले कटे हुए फल, चाट या ठंडे पकवान खाने से बचें। घर पर बना ताजा और पूरी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं।
  3. घर के आसपास पानी जमा न होने दें: कूलर, गमलों की प्लेट, पुरानी टायरों और छत पर जमा पानी मच्छरों का प्रजनन स्थल बनता है। हफ्ते में एक बार इनकी सफाई ज़रूर करें।
  4. पैरों को साफ और सूखा रखें: बारिश के पानी में भीगने के बाद घर आकर पैरों को साफ पानी और साबुन से धोएं। उंगलियों के बीच की जगह को अच्छी तरह सुखाएं।
  5. हाथों की नियमित सफाई करें: खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।
  6. मच्छरदानी और रिपेलेंट क्रीम का उपयोग करें: सोते समय मच्छरदानी लगाएं और दिन में बाहर निकलते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम का प्रयोग करें।

मानसून बीमारी बचाव के लिए सही खान-पान

बारिश के दिनों में हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों को पकाने से पहले सिरके या नमक के पानी से अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है, क्योंकि इनमें बारीक कीड़े और अंडे हो सकते हैं। अपने भोजन में अदरक, लहसुन, हल्दी और काली मिर्च शामिल करें। ये मसाले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

मान लीजिए आप रोजाना दफ्तर या काम के सिलसिले में बाहर जाते हैं। ऐसे में बाहर का पानी पीने के बजाय घर से अपनी पानी की बोतल साथ लेकर निकलें। बाहर मिलने वाले गन्ने का रस, खुले शरबत या बर्फ वाली चीजों से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाली बर्फ अक्सर दूषित पानी से बनी होती है।

त्वचा और बालों का संक्रमण कैसे रोकें?

नमी के कारण कपड़े देर से सूखते हैं। हल्के सीलन भरे कपड़े पहनने से त्वचा पर खुजली और दाद की समस्या हो सकती है। हमेशा पूरी तरह सूखे और सूती कपड़े ही पहनें। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं, तो तुरंत नहाकर सूखे कपड़े पहनें। गीले जूते और जुराबें पहनकर लंबे समय तक रहने से पैरों में फंगल इन्फेक्शन हो जाता है, इसलिए बारिश के मौसम में सांस लेने वाले (वेंटिलेटेड) जूते या सैंडल पहनना बेहतर रहता है।

बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल

बच्चों और बुजुर्गों का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है, इसलिए मानसून में उन्हें विशेष ध्यान की आवश्यकता होती है। बच्चों को पानी से भरे गड्डों में खेलने से रोकें। उनकी समय पर टीकाकरण की खुराक पूरी रखें। बुजुर्गों को ठंडी हवा और नमी से बचाकर रखें और उन्हें हल्का, सुपाच्य भोजन दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: मानसून में पानी को कितनी देर उबालना चाहिए?
उत्तर: पानी को तेज आंच पर उबाल आने के बाद कम से कम 10 से 15 मिनट तक पकने दें, जिससे सभी बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाएं।

प्रश्न: क्या बारिश के मौसम में हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए?
उत्तर: हरी सब्जियां खाई जा सकती हैं, लेकिन उन्हें पकाने से पहले गुनगुने पानी और नमक से अच्छी तरह धोना और पूरी तरह से पकाकर खाना जरूरी है।

प्रश्न: डेंगू के मच्छर किस समय काटते हैं?
उत्तर: डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर मुख्य रूप से सुबह के समय और शाम को अंधेरा होने से पहले काटते हैं।

प्रश्न: भीगे जूते पहनने से त्वचा में संक्रमण हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: पैरों को तुरंत एंटीसेप्टिक साबुन से धोकर सुखाएं और डॉक्टर की सलाह से फंगल रोधी (एंटीफंगल) पाउडर का प्रयोग करें।

यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। कोई भी उपाय अपनाने, दवा लेने या आहार बदलने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://www.nhp.gov.in

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

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