
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक लोन देने की घोषणा की है। सरकार का अगला लक्ष्य 6 करोड़ लखपति दीदी तैयार करना है।
मुख्य बातें
- अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक ऋण मिलेगा, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये का व्यक्तिगत लोन शामिल है।
- सरकार ने 3 करोड़ लखपति दीदियों का आंकड़ा छूने के बाद अब 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने का नया लक्ष्य तय किया है।
- बैंकों की लोन प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के लिए 31 अक्टूबर तक सभी बैंकों का ‘जन समर्थ’ पोर्टल पर ऑनबोर्ड होना अनिवार्य।
- बैंकों से जुड़ी शिकायतों के तुरंत समाधान के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय जल्द समर्पित हेल्पलाइन जारी करेगा।
- 17 सितंबर को शाम 7 बजे देशभर में ‘एक दीया आशीर्वाद का’ जलाने की केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपील की।
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय ने लखपति दीदी योजना और स्वयं सहायता समूह (SHG) बैंक लिंकेज को मजबूती देने के लिए अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक ऋण उपलब्ध कराने का बड़ा ऐलान किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के मुताबिक केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 सितंबर 2026 को आयोजित एक वर्चुअल संवाद में देश की लाखों महिलाओं और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के हितग्राहियों को यह जानकारी दी।
लखपति दीदी योजना से ग्रामीण महिलाओं को क्या फायदा होगा?
लखपति दीदी योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार स्वयं सहायता समूहों को अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक ऋण उपलब्ध कराएगी। इसमें से 1 लाख करोड़ रुपये का लोन उन महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से मिलेगा जो अपना स्वयं का उद्यम शुरू करना चाहती हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 6 करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
लखपति दीदी योजना के तहत वित्तीय सहायता और नया लक्ष्य
वर्चुअल संवाद कार्यक्रम में 6 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह की बहनें, लखपति दीदियां और विभिन्न राज्यों के आजीविका मिशन के अधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश में अब तक 3 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। सरकार ने अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने का नया संकल्प लिया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय का उद्देश्य महिलाओं की सालाना आय 1 लाख रुपये करने तक ही सीमित नहीं है। अब लखपति दीदी से ‘मिलियनेयर’ (दस लाखपति) और ‘करोड़पति दीदी’ बनने का सफर शुरू हो चुका है। इसके लिए महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे ग्रामीण उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक्सपोर्ट के लिए आवश्यक सहायता दी जा रही है।
बैंक लोन की बाधाएं होंगी खत्म, 31 अक्टूबर की समयसीमा तय
महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने में बैंक स्तर पर आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 3 सितंबर को मुंबई में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड (NABARD) और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के साथ समीक्षा बैठक की गई थी।
इस बैठक के बाद बैंकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि लोन स्वीकृत करने में किसी प्रकार की देरी न की जाए। साथ ही गैर-जरूरी कागजात मांगने और गारंटी या कोलैटरल की शर्त को समाप्त करने का आदेश दिया गया है।
- 10 लाख करोड़ का ऋण: अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये का संस्थागत ऋण मिलेगा।इसमें 1 लाख करोड़ रुपये व्यक्तिगत उद्यम लोन के रूप में वितरित होंगे।
- जन समर्थ पोर्टल: देश के सभी बैंकों को 31 अक्टूबर 2026 तक जन समर्थ पोर्टल पर पूरी तरह ऑनबोर्ड होना होगा ताकि लोन प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सके।
- समर्पित हेल्पलाइन: बैंक लोन से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए मंत्रालय जल्द ही एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करेगा।
- व्यापार का विस्तार: महिलाओं को अब पैकेजिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट मॉडल से जोड़ा जा रहा है।
लखपति दीदी योजना और जमीनी बदलाव की कहानियां
वर्चुअल संवाद के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों की महिलाओं ने अपने जीवन में आए बदलाव की कहानी साझा की। असम के कामरूप की तूलिका दीदी ने बताया कि उन्होंने मशरूम और बेकरी उत्पादों से अपनी सालाना आय 12 से 14 लाख रुपये तक पहुंचा ली है और 200 से अधिक महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है।
वहीं बिहार के जहानाबाद की अनु देवी, मध्य प्रदेश के सीहोर की बबीता दीदी और त्रिपुरा के अनिमेष सिंह जैसे लाभार्थियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का मकान मिलने के बाद उनका जीवन सुरक्षित हुआ है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना का गैस सिलेंडर, हर घर नल से जल, शौचालय और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाओं ने उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधार दिया है।
स्वयं सहायता समूह और बैंक लिंकेज का महत्व
ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूह आर्थिक बदलाव के सबसे बड़े केंद्र बन चुके हैं। पहले ग्रामीण महिलाओं को छोटे-मोटे काम के लिए स्थानीय साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां उन्हें अत्यधिक ब्याज चुकाना पड़ता था।
बैंक लिंकेज के जरिए महिलाओं को बैंकों से सीधा कम ब्याज पर ऋण मिलता है। जब महिलाएं व्यापार में मुनाफा कमाती हैं, तो उसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और परिवार के स्वास्थ्य पर दिखाई देता है। केंद्र सरकार का यही प्रयास है कि इन समूहों को अब बड़े सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का रूप दिया जाए।
17 सितंबर को ‘एक दीया आशीर्वाद का’ का आह्वान
संवाद के अंत में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक भावुक अपील की। उन्होंने देशवासियों और स्वयं सहायता समूह की बहनों से अनुरोध किया कि वे 17 सितंबर को शाम 7 बजे अपने घरों में ‘एक दीया आशीर्वाद का’ अवश्य जलाएं।
शिवराज सिंह चौहान स्वयं 17 सितंबर को तेलंगाना के एक सुदूर गांव में पहुंचकर स्थानीय महिलाओं और लाभार्थियों के साथ शाम 7 बजे दीप प्रज्वलित करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: लखपति दीदी योजना क्या है और इसका नया लक्ष्य क्या है?
उत्तर: इस योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह की ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण और वित्तीय मदद देकर उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये करना है। सरकार ने अब तक 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाया है और अगला लक्ष्य 6 करोड़ का रखा है।
प्रश्न: स्वयं सहायता समूहों के लिए कितना बैंक ऋण तय किया गया है?
उत्तर: सरकार ने अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक लोन देने की घोषणा की है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये व्यक्तिगत उद्यमियों के लिए हैं।
प्रश्न: लोन मिलने में परेशानी होने पर लाभार्थी कहां संपर्क कर सकते हैं?
उत्तर: बैंक समस्याओं के निस्तारण के लिए सरकार 31 अक्टूबर तक सभी बैंकों को जन समर्थ पोर्टल से जोड़ रही है और जल्द ही एक विशेष हेल्पलाइन भी शुरू करने जा रही है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






