
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से द्विपक्षीय चर्चा की।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की।
- दो सप्ताह से भी कम समय में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक थी, इससे पहले वे 31 अगस्त को बिश्केक में मिले थे।
- प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने के भारत के रुख को दोहराया।
- बैठक के दौरान ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग, नवाचार और स्थिरता को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के इस्लामी गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मसूद पेजेशकियन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ब्रिक्स बैठकों में ईरान की निरंतर और उच्च-स्तरीय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व का यह दूसरा आमना-सामना था, जो मजबूत होते कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन ने द्विपक्षीय संबंधों के तमाम पहलुओं की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में भाग लेने के लिए ईरानी राष्ट्रपति का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच आपसी दृढ़ता, नवाचार, आपसी सहयोग और स्थिरता की भावना को बढ़ाने में ब्रिक्स मंच की अहम भूमिका का जिक्र किया। इसके अलावा दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए।
बातचीत और कूटनीति से समाधान पर जोर
प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट पर भारत के पारंपरिक और निरंतर रुख को एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से जुड़े सभी विवादों और मुद्दों को केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता कायम करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने समुद्री आवागमन, व्यापार की स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा समुद्री यात्रियों की सुरक्षा व कल्याण के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता भी जताई।
वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग की सराहना
बैठक में दोनों राष्ट्रों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि बहुपक्षीय संगठनों के मंचों पर आपसी हितों के मामलों में सहयोग का यह सिलसिला आगे भी जारी रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के साथ आपसी सहयोग की खुलकर सराहना की। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की उच्चस्तरीय बैठकों से भारत और ईरान के बीच आर्थिक, रणनीतिक और क्षेत्रीय स्तर पर संवाद और मजबूत होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी किससे मिले? उत्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की।
प्रश्न? दोनों नेताओं की इससे पहले हाल ही में कब मुलाकात हुई थी? उत्तर। दोनों नेता इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
प्रश्न? पश्चिम एशिया के मुद्दों को लेकर भारत का क्या रुख रहा है? उत्तर। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया है कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






