
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में अगले 10 वर्षों का रक्षा कूटनीति रोडमैप ‘रक्षा’ जारी किया, जिसमें समुद्री सुरक्षा और निर्यात पर जोर दिया गया है।
मुख्य बातें
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा कूटनीति दस्तावेज ‘रक्षा’ का विमोचन किया।
- यह दस्तावेज अगले 10 वर्षों के लिए भारत की वैश्विक रक्षा साझेदारियों का रणनीतिक खाका प्रस्तुत करता है।
- इसके चार मुख्य स्तंभ रणनीतिक साझेदारी, क्षमता विकास, स्वदेशी निर्यात और समुद्री सुरक्षा हैं।
- कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रक्षा कूटनीति दस्तावेज ‘रक्षा’ को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जारी किया। यह दस्तावेज भारत की वैश्विक सैन्य साझेदारियों के लिए अगले 10 वर्षों का रणनीतिक खाका प्रस्तुत करता है। केंद्र सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा के प्राथमिक लक्ष्यों को अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग के साथ सीधे जोड़ना है। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के शीर्ष सैन्य व नागरिक अधिकारी मौजूद थे।
रक्षा कूटनीति दस्तावेज ‘रक्षा’ क्या है?
रक्षा कूटनीति दस्तावेज ‘रक्षा’ भारत सरकार द्वारा जारी किया गया एक रणनीतिक खाका है, जो अगले 10 वर्षों के लिए देश की विदेशी सैन्य साझेदारियों और सुरक्षा प्राथमिकताओं को तय करता है। यह नीतिगत ढांचा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने, स्वदेशी रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और हिंद महासागर में शांति स्थापित करने पर जोर देता है।
इस आधिकारिक नीति में स्पष्ट किया गया है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत अपनी विदेश नीति को रक्षा प्राथमिकताओं के साथ जोड़ रहा है। इसके जरिए दीर्घकालिक स्थिरता और आपसी विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ मित्र देशों के साथ साझा सुरक्षा चिंताओं पर मिलकर काम करेगा।
रक्षा कूटनीति दस्तावेज के चार मुख्य स्तंभ
3 सितंबर 2026 को जारी रक्षा कूटनीति दस्तावेज में अगले एक दशक के कार्यों को चार प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है। इन चारों स्तंभों के आधार पर ही भारत विभिन्न देशों और बहुपक्षीय मंचों के साथ अपने संबंध तय करेगा:
- रणनीतिक साझेदारी: द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर सुरक्षा समझौतों को गहरा करना तथा विभिन्न राष्ट्रों के साथ रक्षा संवाद को नियमित बनाना।
- क्षमता विकास: मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करना, अधिकारियों का प्रशिक्षण और रक्षा से जुड़े सर्वोत्तम तौर-तरीकों का आदान-प्रदान करना।
- स्वदेशी निर्यात: भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफॉर्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देना और देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना।
- समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर क्षेत्र में शुद्ध सुरक्षा प्रदाता और संकट के समय प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत बनाना।
रक्षा कूटनीति दस्तावेज में इन चारों स्तंभों को भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा का आधार माना गया है। सरकार का मानना है कि इन प्राथमिकताओं से भारत की साख एक जिम्मेदार वैश्विक रक्षा भागीदार के रूप में मजबूत होगी।
हिंद महासागर क्षेत्र और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान
रक्षा कूटनीति दस्तावेज में हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, पायरेसी की रोकथाम और प्राकृतिक आपदाओं के समय सहायता पहुंचाने का काम करता रहा है। इस नए रणनीतिक दस्तावेज के जरिए इस भूमिका को और अधिक संस्थागत रूप दिया जाएगा।
क्षेत्रीय देशों को संकट काल में मदद पहुंचाने के लिए भारत अपनी तैयारी बेहतर करेगा। प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में भारत ने पहले भी पड़ोसी देशों में चक्रवात, सुनामी और अन्य आपदाओं में तुरंत सहायता पहुंचाई है। नई नीति के तहत इस तरह के सहायता अभियानों और संयुक्त नौसैनिक गश्त को और मजबूत किया जाएगा।
स्वदेशी रक्षा निर्माण और निर्यात रणनीति
सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा कूटनीति दस्तावेज में स्वदेशी सैन्य तकनीकों के निर्यात पर बड़ा जोर दिया गया है। भारत केवल रक्षा सामग्री का खरीदार नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी रक्षा प्रणाली को मित्र देशों को निर्यात करने का लक्ष्य रखता है।
इस रणनीति के तहत भारत अपने यहां तैयार हथियारों, लड़ाकू विमानों, जहाजों और आधुनिक रक्षा उपकरणों को अन्य देशों को पेश करेगा। इससे न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र को वित्तीय लाभ होगा, बल्कि मित्र राष्ट्रों के साथ रक्षा संबंध भी लंबे समय के लिए प्रगाढ़ होंगे। स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने से वैश्विक रक्षा विनिर्माण तंत्र में भारत का कद बढ़ेगा।
क्षमता निर्माण और संयुक्त सैन्य अभ्यास
रक्षा कूटनीति दस्तावेज के अंतर्गत क्षमता विकास को एक मुख्य प्राथमिकता बनाया गया है। भारत की थल सेना, नौसेना और वायु सेना नियमित रूप से दुनिया की प्रमुख सेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास करती हैं। अगले 10 वर्षों में इन अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा, विकासशील और मित्र राष्ट्रों के सैन्य अधिकारियों को भारतीय सैन्य संस्थानों में आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण और तकनीक के आदान-प्रदान से भारत अन्य देशों के सैन्य बलों की क्षमताओं में सुधार करने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में मौजूद शीर्ष रक्षा और रणनीतिक नेतृत्व
नई दिल्ली में आयोजित इस विमोचन कार्यक्रम में भारत के रक्षा और कूटनीतिक तंत्र के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह और रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार उपस्थित रहे।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी) श्री रुद्रेंद्र टंडन, वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। इनके साथ ही चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह और रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कई अन्य वरिष्ठ सैन्य व असैन्य अधिकारी मौजूद थे।
अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन
विश्व स्तर पर हो रहे भू-राजनीतिक बदलावों के बीच रक्षा कूटनीति दस्तावेज शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराता है। भारत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन का पक्षधर रहा है।
यह दस्तावेज सुनिश्चित करता है कि भारत एक निष्पक्ष और स्थिर वैश्विक माहौल बनाने में सक्रिय योगदान दे। रक्षा कूटनीति को विदेश नीति के साथ जोड़कर भारत वैश्विक निर्णयों में अपनी बात अधिक मजबूती से रख सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: रक्षा कूटनीति दस्तावेज ‘रक्षा’ किसने और कब जारी किया?
उत्तर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा कूटनीति दस्तावेज ‘रक्षा’ का विमोचन किया।
प्रश्न: इस रक्षा कूटनीति दस्तावेज की समयावधि कितनी है?
उत्तर: यह दस्तावेज अगले 10 वर्षों (एक दशक) के लिए भारत की वैश्विक रक्षा साझेदारियों और रणनीतिक प्राथमिकताओं का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
प्रश्न: इस दस्तावेज के चार मुख्य स्तंभ कौन से हैं?
उत्तर: इसके चार मुख्य स्तंभ रणनीतिक साझेदारी, क्षमता विकास, स्वदेशी निर्यात और समुद्री सुरक्षा हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






