बुधवार, सितम्बर 2, 2026

स्वास्थ्य सेवा शिक्षा को बढ़ावा, यूजीसी ने 33 नई डिग्री की अधिसूचित

Date:

स्वास्थ्य सेवा शिक्षा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और यूजीसी के इस कदम से देश भर में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

मुख्य बातें

  • पीआईबी के अनुसार, यूजीसी ने 33 नई अवर स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम अधिसूचित किए हैं।
  • 21 संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा डिग्री पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन और अद्यतन किया गया है।
  • यह अधिसूचना 27 अगस्त 2026 के पांचवें संशोधन के तहत 31 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुई।
  • एनसीएएचपी अधिनियम 2021 के तहत देश में पाठ्यक्रम और डिग्री नामकरण को मानकीकृत किया जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) के नियामक दायरे में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पीआईबी के अनुसार, देश भर में कुशल, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के निर्माण के उद्देश्य से संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों की शिक्षा, प्रशिक्षण और व्यावसायिक मानकों को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में यूजीसी ने 33 नए तथा 21 पुनर्गठित एवं अद्यतन संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा अवर स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री पाठ्यक्रमों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है। यह पहल देश भर में स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और विनियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए की गई है।

स्वास्थ्य सेवा शिक्षा और नियामक ढांचे में सुधार

पीआईबी रिपोर्ट के मुताबिक, यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 22(3) के अंतर्गत डिग्री के विनिर्देशों में 27 अगस्त 2026 के माध्यम से पांचवां संशोधन जारी किया गया था, जो 31 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ। एनसीएएचपी के अध्यक्ष डॉ. यज्ञ उन्मेश शुक्ला ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम ‘एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम’ के जनादेश के तहत स्वास्थ्य सेवा शिक्षा पाठ्यक्रमों, उनकी अवधि, डिग्री नामकरण और प्रवेश योग्यता में एकरूपता लाएगा। इससे उन छात्रों को स्पष्ट मार्गदर्शन मिलेगा जो इन क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहते हैं। नई अधिसूचना के तहत फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी जैसे कई अहम विषयों को शामिल किया गया है।

विशेषज्ञता आधारित डिग्रियां और वैश्विक मानक

स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के इस नए ढांचे में विभिन्न विशेषज्ञता-आधारित डिग्रियों का भी विशेष प्रावधान किया गया है। इनमें मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी में नौ, मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी में आठ, मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज में चार, मास्टर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी में तीन और मास्टर ऑफ रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी में दो विशेषज्ञताएं शामिल हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर स्वीकृत डिग्री-स्तरीय योग्यताओं के अनुरूप डिग्री का नामकरण करना है। इससे भारतीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की पूरी उम्मीद है, जिससे छात्रों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

व्यावहारिक प्रशिक्षण और शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के निर्देश

राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय अधिनियम, 2021 के वैधानिक अधिदेश को पूरा करते हुए यह कदम उठाया गया है। योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम अस्पतालों या संबद्ध चिकित्सा सुविधा केंद्रों में पर्याप्त अवधि की इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावहारिक नैदानिक ​​प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हैं। एनसीएएचपी ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित हितधारकों को निर्देश जारी कर दिया है कि वे 2026-27 शैक्षणिक वर्ष से इन जारी पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से लागू करें। स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के क्षेत्र में इन उपायों से प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता मजबूत होगी और देश में बहुविषयक स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को नई गति मिलेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? यूजीसी ने स्वास्थ्य सेवा शिक्षा के संबंध में कौन सी नई अधिसूचना जारी की है?

उत्तर। यूजीसी ने एनसीएएचपी के नियामक दायरे में 33 नए और 21 पुनर्गठित संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा यूजी और पीजी डिग्री पाठ्यक्रमों को राजपत्र में अधिसूचित किया है।

प्रश्न? इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर। इसका उद्देश्य देश भर में स्वास्थ्य सेवा शिक्षा में एकरूपता लाना, डिग्री के नामकरण को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना और छात्रों के लिए स्पष्ट करियर मार्ग तैयार करना है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

रिजर्व बैंक ने प्राकृतिक आपदा राहत रिपोर्टिंग नियमों में किया बड़ा बदलाव

रिजर्व बैंक ने प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपायों की जानकारी देने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। पूरी खबर पढ़ें विस्तार से।

विदेशी मुद्रा प्रवाह: आरबीआई की स्वैप सुविधा से देश में आया 1,36,377 मिलियन डॉलर

विदेशी मुद्रा प्रवाह पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने ताजा आंकड़े जारी किए हैं। आरबीआई की विशेष स्वैप सुविधा के तहत कुल 1,36,377 मिलियन डॉलर का आंकड़ा दर्ज हुआ।

एनओसी प्रक्रिया को सरल और स्वचालित बनाने के लिए 15 दिन में होगी कार्रवाई

एनओसी प्रक्रिया को सरल और स्वचालित बनाने के लिए केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने 15 दिनों के भीतर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिले तेलंगाना के कृषि मंत्री, खेती को लेकर अहम चर्चा

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और तेलंगाना के कृषि मंत्री टी. नागेश्वर राव की बैठक में दलहन खरीद, ऑयल पाम और कृषि योजनाओं पर हुई चर्चा।
हमारे बारे में · संपादकीय नीति · सुधार नीति · स्वामित्व एवं वित्त पोषण · गोपनीयता नीति · संपर्क करें
© 2026 Aaj Patrika