शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीएक्यूएम निर्देश, उद्योगों में पीटीजेड कैमरे अनिवार्य

Date:

सीएक्यूएम निर्देश

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सभी श्रेणी के उद्योगों में पीटीजेड कैमरों के जरिए रिमोट मॉनिटरिंग अनिवार्य कर दी है।

मुख्य बातें

  • सभी श्रेणियों के उद्योगों में पीटीजेड कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया
  • कैमरों की फीड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिलेगी
  • कैमरे लगाने और लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2026 है
  • यह आदेश आयोग के 5 अक्टूबर 2026 के पिछले आदेश का स्थान लेगा

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए गठित आयोग (सीएक्यूएम) ने सांविधिक निर्देश संख्या 98 के अंतर्गत आने वाली सभी श्रेणियों के उद्योगों के लिए पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरों की स्थापना और संचालन को अनिवार्य बना दिया है। इस नए आदेश के अनुसार, वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की दूर से निगरानी यानी रिमोट मॉनिटरिंग की प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इससे ईंधन के उपयोग, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण उपायों के पालन की प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी का दायरा काफी बढ़ जाएगा। यह आदेश आयोग के 05.10.2026 के पिछले आदेश का स्थान लेगा।

सीएक्यूएम निर्देश के तहत एनसीआर के उद्योगों में पीटीजेड कैमरे हुए अनिवार्य

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी नए सीएक्यूएम निर्देश के अनुसार, एनसीआर में संचालित होने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा चिह्नित अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले 17 उद्योग, लाल श्रेणी के मध्यम और बड़े वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बॉयलर या थर्मिक फ्लूइड हीटर वाले खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग, तथा भट्ठियों वाले धातु उद्योग को कड़े नियमों का पालन करना होगा। उद्योगों को अपने संचालन के दौरान ईंधन के उपयोग की निगरानी के लिए बॉयलरों, थर्मिक फ्लूइड हीटरों, भट्ठियों, किल्न और अन्य ईंधन से चलने वाले औद्योगिक उपकरणों के सभी ईंधन-फीडिंग या चार्जिंग बिंदुओं पर पीटीजेड कैमरे लगाने होंगे।

कैमरों की स्थापना और तकनीकी आवश्यकताएं

गैसीय ईंधन का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों में निगरानी के लिए पर्याप्त दृश्यता सुनिश्चित करते हुए गैस मीटरों और उससे जुड़ी मीटरिंग व्यवस्था को कैप्चर करने के लिए भी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा, औद्योगिक इकाइयां स्टैक एमिशन और ओसीईएमएस नमूनाकरण स्थानों की निगरानी के लिए भी इनकी स्थापना सुनिश्चित करेंगी। इस आदेश के तहत स्थापित किए गए सभी पीटीजेड कैमरों को सीपीसीबी और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निर्दिष्ट सर्वर या पोर्टल पर रियल टाइम स्ट्रीमिंग प्रोटोकॉल (आरटीएसपी) के माध्यम से वीडियो फीड के निरंतर प्रसारण की सुविधा देनी होगी।

अनुपालन की समयसीमा और सजा या कार्रवाई

इस आदेश के अंतर्गत आने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों को 30.11.2026 तक आवश्यक पीटीजेड कैमरों की स्थापना और संचालन सुनिश्चित करना होगा, जिसमें वीडियो फीड के वास्तविक समय प्रसारण की व्यवस्था भी शामिल है। सभी औद्योगिक इकाइयों को पीटीजेड कैमरों, संचार उपकरणों और संबंधित कनेक्टिविटी प्रणालियों के लिए उपयुक्त पावर बैकअप सहित पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। किसी भी खराबी या व्यवधान की स्थिति में कैमरे और कनेक्टिविटी व्यवस्था के उचित संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी संबंधित औद्योगिक इकाइयों की होगी। वीडियो प्रसारण में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक रुकावट की सूचना तुरंत संबंधित एसपीसीबी या डीपीसीसी को देनी होगी।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित बोर्डों को मिलेगी लाइव वीडियो फीड।
  • सभी ईंधन फीडिंग पॉइंट, बॉयलर, भट्ठियों पर लगेंगे कैमरे।
  • कैमरे लगाने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 तय की गई है।
  • बिजली जाने पर भी कैमरे चालू रखने के लिए पावर बैकअप जरूरी है।

यह भी जानें: सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है उद्योगों की निगरानी की जरूरत

औद्योगिक उत्सर्जन, जिसमें चिमनियों से निकलने वाले कण पदार्थ (पीएम) और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अनियंत्रित उत्सर्जन शामिल हैं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कण पदार्थ की सांद्रता को सीधे बढ़ाने के अलावा औद्योगिक उत्सर्जन द्वितीयक कण पदार्थ के निर्माण में भी योगदान देते हैं, जिससे परिवेशी वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे उत्सर्जनों का प्रभाव सर्दियों के महीनों में अधिक स्पष्ट हो जाता है, जब प्रतिकूल मौसम की स्थिति प्रदूषकों के फैलाव को सीमित कर देती है। आयोग औद्योगिक वायु प्रदूषण को कम करने के लिए स्वच्छ ईंधन की ओर संक्रमण और कड़े मानक तय करने जैसे कई उपाय कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? सीएक्यूएम निर्देश के तहत किन उद्योगों को पीटीजेड कैमरे लगाने होंगे?

उत्तर। अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले 17 उद्योग, लाल श्रेणी के उद्योग, बॉयलर या थर्मिक फ्लूइड वाले खाद्य एवं कपड़ा उद्योग तथा भट्ठियों वाले धातु उद्योगों को यह कैमरे लगाने होंगे।

प्रश्न? कैमरे लगाने और लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने की अंतिम तिथि क्या है?

उत्तर। सभी संबंधित औद्योगिक इकाइयों को 30 नवंबर 2026 तक कैमरों की स्थापना और वास्तविक समय प्रसारण की व्यवस्था पूरी करनी होगी।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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