
केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की 10वीं बैठक में 11 राज्यों के लिए 1.93 लाख से अधिक पक्के घरों की मंजूरी दी गई, जिससे स्वीकृत मकानों की कुल संख्या 20.80 लाख हो गई है।
मुख्य बातें
- पीएमएवाई-यू 2.0 की 10वीं CSMC बैठक में 1.93 लाख अतिरिक्त शहरी मकानों को मिली स्वीकृति।
- उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 73,182 और बिहार में 52,866 नए मकान स्वीकृत किए गए।
- योजना के तहत कुल स्वीकृत मकानों की संख्या बढ़कर 20.80 लाख के पार पहुंची।
- स्वीकृत मकानों में से 97% यानी 20.16 लाख घर महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में हैं।
- 9 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले EWS, LIG और MIG परिवार इस योजना के लिए पात्र हैं।
केन्द्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) की 10वीं बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 यानी पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 1.93 लाख से अधिक नए मकानों को स्वीकृति दी गई है। नई दिल्ली में 16 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने की। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस नए आवंटन के बाद इस मिशन के तहत स्वीकृत कुल मकानों की संख्या बढ़कर 20.80 लाख हो गई है।
पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत किसे मिलेंगे नए मकान?
पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत शहरी गरीब और मध्यम वर्ग के उन पात्र परिवारों को नए मकान दिए जाते हैं, जिनकी वार्षिक घरेलू आय 9 लाख रुपये तक है। इस योजना के माध्यम से केंद्र सरकार लाभार्थियों को अपना पक्का घर बनाने या खरीदने के लिए 2.50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
बैठक में लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) और भागीदारी में किफायती आवास (AHP) श्रेणियों के तहत 11 राज्यों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए यह मंजूरी दी गई। बैठक में हाउसिंग फॉर ऑल (HFA) के संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक कुमार रविकांत सिंह, संयुक्त सचिव संजीत और एचएफए निदेशक वैभव रुंडवाल के साथ-साथ 11 राज्यों के मिशन निदेशकों ने हिस्सा लिया।
11 राज्यों में स्वीकृत घरों की राज्यवार सूची
10वीं सीएसएमसी बैठक के दौरान देश के 11 प्रमुख राज्यों में 1,93,000 से अधिक मकानों के प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई। इन स्वीकृतियों में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश और बिहार को मिला है। पीआईबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्यवार स्वीकृतियां इस प्रकार हैं:
- उत्तर प्रदेश: 73,182 नए मकान
- बिहार: 52,866 नए मकान
- तेलंगाना: 18,120 नए मकान
- पश्चिम बंगाल: 16,559 नए मकान
- गुजरात: 14,290 नए मकान
- आंध्र प्रदेश: 6,560 नए मकान
- छत्तीसगढ़: 4,670 नए मकान
- ओडिशा: 3,126 नए मकान
- कर्नाटक: 3,116 नए मकान
- मिजोरम: 1,003 नए मकान
- सिक्किम: 29 नए मकान
इसका असर: योजना के चार प्रमुख घटक और वित्तीय मदद
सितंबर 2024 में शुरू की गई पीएमएवाई-यू 2.0 योजना का लक्ष्य 1 करोड़ अतिरिक्त शहरी गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत 9 लाख रुपये तक की वार्षिक घरेलू आय वाले EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के परिवार आवेदन कर सकते हैं। आम नागरिकों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए इस योजना को चार वर्टिकल में विभाजित किया गया है।
पहला घटक ‘लाभार्थी आधारित निर्माण’ (BLC) है, जिसमें अपनी जमीन रखने वाले पात्र परिवार स्वयं का पक्का घर बना सकते हैं। दूसरा ‘भागीदारी में किफायती आवास’ (AHP) है, जिसके तहत सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की आवासीय परियोजनाओं में बना-बनाया घर खरीदा जा सकता है। तीसरा घटक ‘किफायती किराए पर आवास’ (ARH) है, जो कामगारों और प्रवासियों के लिए सस्ते किराए के घरों की व्यवस्था करता है।
चौथा प्रमुख घटक ‘ब्याज सब्सिडी योजना’ (ISS) है। इसके अंतर्गत 25 लाख रुपये तक का होम लोन लेने वाले पात्र EWS, LIG और MIG परिवारों को 1.80 लाख रुपये तक की ब्याज सब्सिडी सीधे दी जाती है।
पीएमएवाई-यू 2.0 में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेश
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका महिला-केंद्रित और समावेशी ढांचा है। पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत कुल 20.80 लाख घरों में से 20.16 लाख घर (लगभग 97 प्रतिशत) महिलाओं को स्वतंत्र रूप से या संयुक्त स्वामित्व के रूप में आवंटित किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को मालिकाना हक देकर उनकी सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना है।
सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों तक आवास का लाभ पहुंचाने के लिए आंकड़ों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। अब तक स्वीकृत कुल मकानों में से 9.14 लाख घर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 3.61 लाख घर अनुसूचित जाति (SC), 1.06 लाख घर अनुसूचित जनजाति (ST) तथा 1.81 लाख घर वरिष्ठ नागरिकों को स्वीकृत किए गए हैं।
योजना की प्रगति और कार्यान्वयन के कड़े निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान शहरी विकास सचिव सतेंद्र सिंह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्यों को स्थानीय निकायों और केंद्रीय मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा, ताकि प्रस्तावों की जांच और मंजूरी में अनावश्यक देरी न हो।
मंत्रालय ने निर्देश दिया कि पहले से बनकर तैयार एएचपी मकानों में लाभार्थियों के रहने की प्रक्रिया को तुरंत तेज किया जाए। अधिकारियों को पूरी सावधानी के साथ त्रुटिरहित प्रस्ताव भेजने को कहा गया है, ताकि प्रशासनिक बाधाएं न आएं।
अगर पूरे मिशन के व्यापक संदर्भ को देखें, तो मूल पीएमएवाई-यू और पीएमएवाई-यू 2.0 को मिलाकर केंद्र सरकार द्वारा अब तक कुल 1.27 करोड़ से अधिक मकानों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 1.01 करोड़ से अधिक मकानों का निर्माण पूरा करके लाभार्थियों को सौंपा जा चुका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत अधिकतम कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
उत्तर: पात्र लाभार्थियों को पक्का मकान बनाने या खरीदने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 2.50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
प्रश्न: योजना में आवेदन के लिए आय सीमा क्या निर्धारित की गई है?
उत्तर: इस योजना के तहत 9 लाख रुपये तक की वार्षिक घरेलू आय वाले EWS, LIG और MIG श्रेणी के परिवार लाभ पाने के लिए पात्र हैं।
प्रश्न: पीएमएवाई-यू 2.0 में महिलाओं के लिए क्या विशेष प्रावधान है?
उत्तर: इस योजना में महिलाओं के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में मकान का आवंटन अनिवार्य रूप से प्राथमिकता पर किया जाता है। वर्तमान में 97% स्वीकृत घर महिलाओं के नाम पर हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






