
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सागरमंथन संवाद के तीसरे संस्करण में दुनिया भर के नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए एक सुरक्षित समुद्री व्यवस्था पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- तीसरे सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग का आयोजन नई दिल्ली में हो रहा है।
- यह सम्मेलन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित है।
- भारतीय नाविक दुनिया में समुद्री क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी श्रमशक्ति बन गए हैं।
- भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सागरमंथन संवाद में क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ‘सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ के तीसरे संस्करण में दुनिया भर के नीति-निर्माताओं, समुद्री क्षेत्र से जुड़ी अग्रणी हस्तियों और विशेषज्ञों का स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ‘सागरमंथन संवाद’ के तीसरे संस्करण के लिए भेजे गए अपने संदेश में एक मुक्त, खुली, सुरक्षित और नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था का आह्वान किया जो सभी देशों के लिए शांति और समृद्धि ला सके।
यह सम्मेलन नई दिल्ली में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने लिखित संदेश में रेखांकित किया कि दुनिया के एक हिस्से में होने वाली घटनाओं का प्रभाव दूर-दराज के क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। इसलिए, महासागरों को लेकर वैश्विक स्तर पर संवाद एवं सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
सागरमंथन संवाद का उद्देश्य और भारत का समुद्री इतिहास
भारतीय परंपरा में ‘सागरमंथन’ नाम का विशेष महत्व है क्योंकि मंथन का सीधा संबंध नई संभावनाओं की खोज से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री ने प्राचीन बंदरगाह शहर लोथल से लेकर चोल राजवंश तथा मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना की सोच तक का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि भारत के नाविक और व्यापारी प्राचीन काल से ही दूर-दराज के क्षेत्रों तक सामान, विचार, कहानियां और संस्कृति पहुंचाते रहे हैं।
- नई दिल्ली में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजन।
- भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने अपनी क्षमता को लगभग दोगुना कर लिया है।
- भारतीय नाविक अब वैश्विक समुद्री क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी श्रमशक्ति हैं।
- देश समुद्री मामलों में 2047 के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
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भारत अपनी समुद्री महत्वाकांक्षाओं को वर्ष 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से जोड़ रहा है। सरकार देश के समुद्रों को बेहतर ढंग से समझने और उनका जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के लिए समुद्र विज्ञान और अन्वेषण में लगातार निवेश कर रही है। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, भारत इस सेक्टर के लिए एक आधुनिक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से नई पीढ़ी के समुद्री कानून भी लेकर आया है जिससे तटीय इकोसिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा, देश जहाज बनाने और हरित नौवहन के नए दौर की तैयारी कर रहा है। प्रमुख बंदरगाहों के टर्नअराउंड समय में भारी कमी दर्ज की गई है। भारतीय नाविकों की भूमिका वैश्विक स्तर पर बढ़ी है और वे दुनिया भर के महासागरों में अपनी मेहनत से सम्मान अर्जित कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? तीसरे सागरमंथन संवाद का आयोजन कहाँ हो रहा है?
उत्तर। यह सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न? इस सम्मेलन के मुख्य आयोजक कौन हैं?
उत्तर। इसका आयोजन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






