
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत कल नई दिल्ली में बोर्ड के नव नियुक्त सदस्यों नारायण देवासी और स्वरूप सिंह बंजारा को पद की शपथ दिलाएंगे।
मुख्य बातें
- सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत कल DWBDNC के दो नए सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
- नारायण देवासी ने 25 सितंबर 2026 और स्वरूप सिंह बंजारा ने 17 सितंबर 2026 को कार्यभार ग्रहण किया था।
- दोनों नए सदस्यों का कार्यकाल पद संभालने की तारीख से 3 वर्ष या अगले आदेश तक रहेगा।
- यह बोर्ड विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए काम करता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत संचालित विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय कल्याण बोर्ड के नए सदस्यों का DWBDNC शपथ ग्रहण कार्यक्रम 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव तथा विकास एवं कल्याण बोर्ड (DWBDNC) के अध्यक्ष सुधांश पंत नए सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस समारोह में बोर्ड के शासी निकाय में नियुक्त दो नए सदस्यों, नारायण देवासी और स्वरूप सिंह बंजारा को औपचारिक रूप से जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
DWBDNC शपथ ग्रहण कार्यक्रम में क्या होगा?
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास के लिए गठित बोर्ड के तहत आयोजित DWBDNC शपथ ग्रहण समारोह नव नियुक्त शासी निकाय सदस्यों के औपचारिक कामकाज की शुरुआत का प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से नारायण देवासी और स्वरूप सिंह बंजारा को आधिकारिक तौर पर बोर्ड के प्रशासनिक, नीतिगत और कल्याणकारी निर्णयों में भागीदारी का अधिकार प्राप्त होगा। यह शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
नारायण देवासी और स्वरूप सिंह बंजारा का कार्यकाल
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार दोनों नए सदस्यों की नियुक्ति तीन साल की अवधि के लिए की गई है। यह कार्यकाल उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से मान्य होगा। यदि सरकार इससे पहले कोई आदेश जारी करती है तो अवधि में बदलाव संभव है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, नारायण देवासी ने 25 सितंबर 2026 को बोर्ड सदस्य के रूप में अपना कार्यभार संभाला था। वहीं दूसरे सदस्य स्वरूप सिंह बंजारा ने 17 सितंबर 2026 को अपना पदभार ग्रहण किया था। शासी निकाय में इन दोनों प्रतिनिधियों के शामिल होने से बोर्ड के प्रशासनिक तंत्र को मजबूती मिलेगी और जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करना आसान होगा।
विमुक्त और घुमंतू समुदायों के लिए DWBDNC का काम
भारत में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक अवसरों से वंचित रहे हैं। इन वर्गों की समस्याओं का स्थायी समाधान करने और उन्हें विकास की धारा में लाने के लिए केंद्र सरकार ने DWBDNC का गठन किया था। यह बोर्ड विशेष रूप से इन समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने का काम करता है।
यह बोर्ड सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। बोर्ड का मुख्य काम घुमंतू जातियों की आबादी, उनके निवास स्थान और आवश्यकताओं का सर्वे करना है। इसके अलावा, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय बनाकर कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच इन समुदायों की बस्तियों तक सुनिश्चित की जाती है।
DWBDNC शपथ ग्रहण के बाद क्या बदलेंगे काम?
शासी निकाय का गठन पूर्ण होने के बाद बोर्ड के नीतिगत फैसलों में तेजी आएगी। DWBDNC शपथ ग्रहण के बाद बोर्ड के प्रमुख कार्यों में निम्नलिखित प्राथमिकताएं शामिल रहेंगी:
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार: बेघर घुमंतू परिवारों के लिए जाति प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, राशन कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने में मदद करना।
- आजीविका एवं कौशल विकास: पारंपरिक कलाओं, पशुपालन, मिट्टी के बर्तन बनाने और हस्तशिल्प से जुड़े घुमंतू कारीगरों को वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दिलाना।
- शैक्षणिक सहायता: विमुक्त वर्ग के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं और आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था की निरंतर समीक्षा करना।
- आवास और बस्ती विकास: घुमंतू बस्तियों में बुनियादी ढांचा, जैसे पीने का पानी, बिजली और पक्के मकान उपलब्ध कराने की योजनाओं पर काम करना।
यह भी जानें: घुमंतू समाज के लिए क्यों जरूरी है यह बोर्ड?
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1871 में ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ (आपराधिक जनजाति कानून) लागू किया गया था। इस दमनकारी कानून के तहत लगभग 200 से अधिक समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया गया था। आजादी के बाद 1952 में भारत सरकार ने इस कानून को पूरी तरह निरस्त कर दिया। कानून खत्म होने के बाद इन जातियों को ‘विमुक्त’ (Denotified) कहा गया।
कानून हटने के बाद भी इन समुदायों को लंबे समय तक सामाजिक उपेक्षा और साधनों की कमी का सामना करना पड़ा। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों की पहचान पुनर्स्थापित करने के लिए DWBDNC की स्थापना की। वर्तमान में यह बोर्ड देश भर के लाखों विमुक्त परिवारों के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तीकरण के लिए काम कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? DWBDNC का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: DWBDNC का हिंदी में पूरा नाम ‘विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए विकास एवं कल्याण बोर्ड’ (Development and Welfare Board for Denotified, Nomadic and Semi-Nomadic Communities) है।
प्रश्न? DWBDNC के नए सदस्यों को शपथ कौन दिलाएगा?
उत्तर: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव और DWBDNC के अध्यक्ष सुधांश पंत नव नियुक्त सदस्यों को पद की शपथ दिलाएंगे।
प्रश्न? बोर्ड में शामिल नए सदस्यों का कार्यकाल कितना होगा?
उत्तर: नए सदस्यों नारायण देवासी और स्वरूप सिंह बंजारा का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 3 वर्ष या अगले आदेश तक रहेगा।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






