
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने उत्तराखंड के रुद्रपुर में श्रम संहिताओं पर जिला स्तरीय क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम ‘श्रम संवाद’ का आयोजन किया।
मुख्य बातें
- कार्यक्रम का आयोजन 06 अक्टूबर 2026 को रुद्रपुर, उत्तराखंड में किया गया।
- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
- इस बैठक में लगभग 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें नियोक्ता और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे।
- कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय योजनाओं पीएमवीबीआरवाई और पीएमएसवाईएम पर भी चर्चा की गई।
श्रम संवाद कार्यक्रम का आयोजन हाल ही में उत्तराखंड के रुद्रपुर में किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य नए श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। पीआईबी के अनुसार, यह कार्यक्रम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड सरकार के श्रम विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न औद्योगिक संगठनों और चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी अपनी सहभागिता निभाई।
श्रम संवाद क्या है और यह क्यों आयोजित किया गया?
श्रम संवाद एक जिला स्तरीय क्षमता निर्माण और जागरूकता मंच है। इस कार्यक्रम के जरिए नियोक्ताओं और उद्योग जगत के तमाम हितधारकों को एक साथ लाया गया ताकि 21 नवंबर 2025 को लागू हुई श्रम संहिताओं और 8 मई 2026 को अधिसूचित केंद्रीय नियमों की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जा सके। सत्रों में नई श्रम कानून व्यवस्था के तहत प्रतिष्ठानों पर लागू होने वाली अनुपालन आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
देश में श्रम कानूनों को सरल और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इन संहिताओं को लाया गया है। पहले अलग-अलग और जटिल कानूनों के कारण उद्योगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सरकार का प्रयास है कि संवाद के जरिए जमीनी स्तर पर इन नियमों के पालन को आसान बनाया जाए और नियोक्ताओं की शंकाओं का समाधान किया जाए।
श्रम संवाद में किन अधिकारियों और लोगों ने लिया हिस्सा?
इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने की। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
- नियोक्ता और उद्योग प्रतिनिधि
- मानव संसाधन पेशेवर और कानूनी विशेषज्ञ
- वित्त विशेषज्ञ और श्रमिक संगठनों के लोग
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अधिकारी
कार्यक्रम के प्रारंभ में उत्तराखंड सरकार के श्रम सचिव श्री श्रीधर बाबू अडांकी ने सभी का स्वागत किया। इसके बाद चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें श्रम संहिताओं का व्यापक अवलोकन, नियोक्ताओं के दायित्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
श्रम संवाद का आम लोगों और उद्योगों पर क्या असर होगा?
इस तरह के आयोजनों से उद्योगों और सरकार के बीच की दूरी कम होती है। नई श्रम संहिताओं के लागू होने से कामगारों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिलने का रास्ता साफ हुआ है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पएमएसवाईएम) जैसी केंद्रीय योजनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
इन योजनाओं के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और नए रोजगार पाने वाले युवाओं को सीधा लाभ मिलता है। अधिकारियों के साथ सीधे संवाद से उद्योगों को अनुपालन से जुड़ी व्यावहारिक परेशानियों का समाधान तुरंत मिल जाता है, जिससे कारोबार करना आसान होता है और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होती है।
अस्पताल का दौरा और आगे की राह
कार्यक्रम के बाद श्रम एवं रोजगार सचिव ने रुद्रपुर स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने वहां डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों से बातचीत की और बीमित व्यक्तियों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल के कामकाज में सुधार के लिए कई जरूरी उपाय भी सुझाए। सरकार का यह प्रयास है कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ समय पर मिले।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? रुद्रपुर में आयोजित श्रम संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता किसने की? उत्तर। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने की।
प्रश्न? इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था? उत्तर। इसका मुख्य उद्देश्य हाल ही में लागू हुई श्रम संहिताओं और केंद्रीय नियमों के प्रति नियोक्ताओं तथा उद्योग जगत में जागरूकता बढ़ाना था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






