
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के दखਲ के बाद वित्त मंत्रालय ने प्रमुख वित्तीय योजनाओं में अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।
मुख्य बातें
- वित्तीय सेवा विभाग ने जारी किए निर्देश
- एसएलबीसी और यूटीएलबीसी को देना होगा बैंक-वार और योजना-वार डेटा
- 9 अक्टूबर 2026 तक वित्तीय सेवा विभाग को सौंपनी है कार्रवाई रिपोर्ट
- 24 सितंबर 2026 को एनसीएससी के सचिव विवेक कुमार देवांगन ने लिखा था पत्र
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने प्रमुख सरकारी वित्तीय योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को प्रदान की गई सहायता की अनिवार्य रिपोर्टिंग के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने और दलित समुदायों तक धन के प्रवाह की निगरानी के लिए यह कदम उठाया गया है। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा उठाए गए एक कड़े कदम के बाद लिया गया है।
अनुसूचित जाति आयोग की मांग पर वित्त मंत्रालय ने उठाया कदम
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप से वित्तीय योजनाओं में अनुसूचित जाति के लाभार्थियों का डेटा अब बैंकों और राज्य स्तरीय समितियों को अनिवार्य रूप से देना होगा। इन नए निर्देशों के तहत, राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों और केंद्र शासित प्रदेश स्तर की बैंकर्स समितियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी आवधिक समीक्षा बैठकों में चिन्हित योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत का योजना-वार और बैंक-वार विवरण शामिल करें। इसके साथ ही, उन्हें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के साथ नियमित रूप से जानकारी साझा करने और 9 अक्टूबर 2026 तक वित्तीय सेवा विभाग को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है, जिसमें डेटा संकलन में आने वाली किसी भी समस्या का विवरण भी शामिल हो।
किन प्रमुख योजनाओं और आंकड़ों पर रहेगा जोर
वित्तीय सेवा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्टिंग बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध डेटा का उपयोग करके की जानी चाहिए। इससे किसी भी तरह की समानांतर रिपोर्टिंग आवश्यकताएं पैदा किए बिना परिभाषाओं और कार्यप्रणाली में एकरूपता सुनिश्चित होगी। राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों और केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समितियों को 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई पर अद्यतन जानकारी देने के लिए भी कहा गया है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई)
- स्टैंड-अप इंडिया
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)
- पीएम स्वनिधि
- सीजीटीएमएसई और एमएसएमई बिजनेस लोन
क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत और क्या था पिछला हाल
इससे पहले 24 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सचिव, विवेक कुमार देवांगन ने वित्तीय सेवा विभाग के सचिव को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में इस बात पर विशेष प्रकाश डाला गया था कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्टों में उपर्युक्त प्रमुख सरकारी योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त अनुसूचित जाति के परिवारों और लाभार्थियों का प्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित नहीं हो रहा था। आयोग ने बताया था कि इस तरह के आवश्यक आंकड़ों के अभाव में अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(5)(सी) के तहत उसे सौंपे गए संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करने में भारी बाधा आ रही थी।
इसका असर और भविष्य की निगरानी
इस पूरे घटनाक्रम के तुरंत बाद, वित्तीय सेवा विभाग ने 5 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों और केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समितियों के संयोजकों को औपचारिक निर्देश जारी कर दिए। इन नए निर्देशों से अनुसूचित जाति समुदायों तक वित्तीय समावेशन के लाभों की पहुंच में पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किए जाने की पूरी उम्मीद है। योजना-वार और बैंक-वार आंकड़ों की उपलब्धता होने से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेगा।
विवेक कुमार देवांगन ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग इन तमाम निर्देशों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की लगातार निगरानी जारी रखेगा। आयोग सभी संबंधित हितधारकों के साथ लगातार जुड़ा रहेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के वित्तीय लाभ लक्षित अनुसूचित जाति लाभार्थियों तक पूरी तरह से मापनीय और समानतापूर्ण तरीके से पहुंचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। इसका मुख्य उद्देश्य प्रमुख सरकारी वित्तीय योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को दी गई सहायता की अनिवार्य रिपोर्टिंग करना और सामाजिक-आर्थिक विकास का मूल्यांकन करना है।
प्रश्न? वित्तीय सेवा विभाग ने रिपोर्ट सौंपने की अंतिम तिथि क्या तय की है?
उत्तर। वित्तीय सेवा विभाग को 9 अक्टूबर 2026 तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, जबकि 30 दिनों के भीतर अद्यतन जानकारी मांगी गई है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






