
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन सदस्यों की नई नियुक्तियों का ऐलान किया है।
मुख्य बातें
- भगवत प्रसाद मकवाना को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- कैशब बिहारी को उपाध्यक्ष और मनोज कुमार बाल्मीकि, सुषमा गौड़ियाल तथा रवि रामू कालोसे को सदस्य बनाया गया।
- नवनियुक्त पदाधिकारियों का कार्यकाल 31 मार्च 2028 तक रहेगा।
- नियुक्ति आदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन सदस्यों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है। यह नियुक्ति आयोग के शेष कार्यकाल 31 मार्च 2028 तक के लिए प्रभावी रहेगी। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार श्री भगवत प्रसाद मकवाना को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं श्री कैशब बिहारी को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा श्री मनोज कुमार बाल्मीकि, श्रीमती सुषमा गौड़ियाल और श्री रवि रामू कालोसे को सदस्य मनोनीत किया गया है।
सफाई कर्मचारी आयोग के नए अध्यक्ष और सदस्य कौन हैं?
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में केंद्र सरकार ने भगवत प्रसाद मकवाना को अध्यक्ष और कैशब बिहारी को उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही मनोज कुमार बाल्मीकि, सुषमा गौड़ियाल और रवि रामू कालोसे को सदस्य बनाया गया है। इन सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल 31 मार्च 2028 तक रहेगा।
नवनियुक्त अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना के पास अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि है। उनके पास सामाजिक कार्यों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों के कल्याण और सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करने का लंबा अनुभव है। वे इससे पूर्व उत्तराखंड राज्य सफाई कर्मचारी आयोग में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एनएचपीसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक और ‘हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ के तहत गठित केंद्रीय निगरानी समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य किया है।
नवनियुक्त पदाधिकारियों की पृष्ठभूमि और अनुभव
उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने वाले श्री कैशब बिहारी ओडिशा के निवासी हैं और पेशे से किसान हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। वे लंबे समय से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और समाज के अन्य वंचित वर्गों के उत्थान के लिए विभिन्न नागरिक और सामाजिक संगठनों से जुड़कर कार्य करते रहे हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति कल्याण से जुड़ी कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी संभाली हैं।
आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्त श्री मनोज कुमार बाल्मीकि एक उद्यमी हैं। वर्ष 2019 से 2022 तक वे उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने सफाई कर्मचारियों, अनुसूचित जाति और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए काम करने वाले संगठनों में लगातार अपनी सेवाएं दी हैं।
श्रीमती सुषमा गौड़ियाल बरेली कॉलेज, बरेली में हिंदी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से स्नातकोत्तर और पीएच.डी. की डिग्री हासिल की है। वे पूर्व में भी सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य रह चुकी हैं। उनका शैक्षणिक कार्य एवं शोध मुख्य रूप से दलित साहित्य, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के विचारों, महिला सशक्तिकरण और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है।
तीसरे सदस्य श्री रवि रामू कालोसे एक सेवानिवृत्त नगरपालिका इंजीनियर हैं और उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। श्री कालोसे सफाई कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने के कार्यों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।
सफाई कर्मचारी आयोग का दायित्व और कार्यप्रणाली
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग देश भर में सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, सम्मान और सामाजिक-आर्थिक हित की रक्षा करने वाला प्रमुख निकाय है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नए पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि उनके विविध प्रशासनिक, शैक्षणिक और सामाजिक अनुभवों का लाभ सफाई कर्मचारियों के कल्याणकारी कार्यक्रमों को गति देने में मिलेगा।
सफाई कर्मियों के उत्पीड़न, न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर सफाई कर्मचारी आयोग केंद्र व राज्य सरकारों को अपनी सिफारिशें प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त यह निकाय सफाई कर्मियों के बच्चों की शिक्षा, स्वरोजगार योजनाएं और पुनर्वास ऋण जैसी योजनाओं के कार्यान्वयन की भी निगरानी करता है।
नए बोर्ड की मुख्य प्राथमिकताएं
- हाथ से मैला ढोने की प्रथा के उन्मूलन कानून 2013 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
- सफाई कर्मचारियों की कार्यस्थल सुरक्षा और शिकायतों का त्वरित समाधान।
- 31 मार्च 2028 तक के कार्यकाल में आर्थिक पुनर्वास योजनाओं की निगरानी।
- विभिन्न राज्य स्तरीय सफाई कर्मचारी निकायों के साथ बेहतर समन्वय।
सफाई कर्मचारी आयोग का गठन और इतिहास
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का गठन पहली बार सफाई कर्मचारियों के कल्याण एवं उनके हितों की रक्षा के लिए एक सांविधिक संस्था के रूप में किया गया था। बाद में इसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक गैर-सांविधिक निकाय के रूप में जारी रखा गया। केंद्र सरकार समय-समय पर इसके कार्यकाल का विस्तार करती रही है। आयोग का मुख्य उद्देश्य सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का अध्ययन करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? सफाई कर्मचारी आयोग का नया अध्यक्ष किसे नियुक्त किया गया है?
उत्तर: भगवत प्रसाद मकवाना को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
प्रश्न? नवनियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल कब तक रहेगा?
उत्तर: नवनियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति 31 मार्च 2028 तक के लिए की गई है।
प्रश्न? यह आयोग किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
उत्तर: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






