
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पंचकुला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के मौके पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।
मुख्य बातें
- अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 हरियाणा के पंचकुला में आयोजित किया गया।
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।
- पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (जेसीबीसी) ने 2025-26 के दौरान 356 गिद्धों को आश्रय दिया और 35 चूजों का सफल प्रजनन कराया।
- कार्यक्रम के दौरान ‘जटायु की कहानी: भारत के गिद्धों का संरक्षण’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर हरियाणा के पंचकुला में एक विशेष राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में पक्षियों की इस प्रजाति के लिए चल रहे प्रयासों को और गति देना है। पीआईबी के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से उबरना – भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर आधारित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में हरियाणा राज्य के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह के साथ मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
गिद्ध संरक्षण और पंचकुला कार्यशाला की मुख्य बातें
भारत में विभिन्न प्रकार के निवासी और प्रवासी गिद्ध पाए जाते हैं, जिनमें श्वेत-पूंछ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्र के, हिमालयी ग्रिफ़ॉन, यूरेशियन ग्रिफ़ॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पर आधारित है। प्राकृतिक सफाई प्रणाली के रूप में काम करने वाले गिद्ध पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं, क्योंकि वे मृत जानवरों के शवों को तेजी से साफ करते हैं।
पिंजोर जटायु केंद्र का योगदान
कार्यक्रम से पहले केंद्रीय मंत्री ने पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (जेसीबीसी) का दौरा किया और वहां चल रही गतिविधियों का जायजा लिया। हरियाणा वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) की संयुक्त पहल से विकसित यह केंद्र सफेद पूंछ वाले, लंबी चोंच वाले और पतली चोंच वाले गिद्धों के संरक्षण प्रजनन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान जेसीबीसी ने कुल 356 गिद्धों को आश्रय दिया और 35 नए चूजों का सफल प्रजनन कराया है। इसके अलावा, 87 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया तथा 22 संस्थानों के 1,222 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
भविष्य की रणनीतियां और सामुदायिक भागीदारी
विशेषज्ञों और वन अधिकारियों का मानना है कि गिद्धों की आबादी में 1990 के दशक से आई गिरावट का मुख्य कारण खाद्य श्रृंखला में व्यवधान और दर्द निवारक दवाओं का उपयोग रहा है। कार्यशाला के दौरान नीति निर्माताओं ने पशु चिकित्सकों, पशुपालकों और स्थानीय समुदायों से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया ताकि गिद्ध-सुरक्षित पशु चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यक्रम के दौरान ‘जटायु की कहानी: भारत के गिद्धों का संरक्षण’ नामक एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जिसमें इस प्रजाति के संरक्षण के पूरे सफर का दस्तावेजीकरण किया गया है।
- पंचकुला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 का आयोजन किया गया।
- पिंजोर के जेसीबीसी केंद्र ने 2025-26 में 35 चूजों का सफल प्रजनन कराया।
- कार्यक्रम में ‘जटायु की कहानी’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन हुआ।
- गिद्ध संरक्षण के लिए सुरक्षित पशु चिकित्सा और आवास उपलब्धता पर जोर दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 का आयोजन कहां किया गया था। उत्तर। यह कार्यक्रम हरियाणा के पंचकुला में आयोजित किया गया था।
प्रश्न? पिंजोर स्थित जटायु केंद्र ने 2025-26 में कितने चूजों का प्रजनन कराया। उत्तर। इस अवधि के दौरान केंद्र ने सफलतापूर्वक 35 चूजों का प्रजनन कराया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






