शनिवार, सितम्बर 19, 2026

चेन्नई में 17वें कथकली महोत्सव का भव्य आगाज, संस्कृति मंत्रालय का आयोजन

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कथकली महोत्सव

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में कलाक्षेत्र फाउंडेशन द्वारा चेन्नई में 17वें कथकली महोत्सव का शुभारंभ किया गया है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देश के तीन प्रतिष्ठित संस्थान अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

मुख्य बातें

  • 17वें कथकली महोत्सव का आयोजन चेन्नई के तिरुवनमियूर स्थित कलाक्षेत्र फाउंडेशन में किया जा रहा है।
  • यह तीन दिवसीय उत्सव 18 सितंबर से 20 सितंबर 2026 तक आयोजित हो रहा है, जिसका विषय ‘कथा रस संगम’ है।
  • इस महोत्सव में सदानम अकादमी, केरल कलामंडलम और मार्गी थिएटर जैसे तीन प्रमुख संस्थान हिस्सा ले रहे हैं।
  • उद्घाटन समारोह में संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव के.के. मिश्रा और कलाक्षेत्र फाउंडेशन के निदेशक सुरेश कुमार चिक्कला उपस्थित रहे।

कथकली महोत्सव का शुभारंभ आधिकारिक तौर पर चेन्नई के तिरुवनमियूर स्थित भारत कलाक्षेत्र सभागार में कर दिया गया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में कलाक्षेत्र फाउंडेशन द्वारा इस 17वें आयोजन को बेहद भव्य रूप दिया गया है। इस तीन दिवसीय सांस्कृतिक समागम में देश भर के शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों के लिए खास प्रस्तुतियां तय की गई हैं, जो दक्षिण भारत की समृद्ध परंपरा को और मजबूती देती हैं।

कथकली महोत्सव 2026 क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

कथकली महोत्सव 2026 एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का शास्त्रीय नृत्य उत्सव है, जिसका मुख्य विषय “कथा रस संगम – कहानियों के सार का संगम” रखा गया है। पीआईबी के अनुसार, यह अनूठा मंच सदानम अकादमी, केरल कलामंडलम और मार्गी थिएटर जैसे तीन प्रमुख कथकली संस्थानों को एक साथ लाता है, जिससे 18 से 20 सितंबर 2026 तक तीन विशिष्ट और अनूठी प्रस्तुतियां दर्शकों के सामने आ सकें।

इस भव्य आयोजन की शुरुआत सदानम अकादमी की ओर से प्रस्तुत “मंदोदरी” नाटक से हुई। रामायण की कथा पर आधारित इस नृत्य नाटक में रावण के जीवन के अंतिम क्षणों और उसकी मृत्यु के बाद मंदोदरी की मार्मिक प्रतिक्रिया को अत्यंत सजीव ढंग से दर्शाया गया। उद्घाटन सत्र में संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव, भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी के.के. मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान कलाक्षेत्र फाउंडेशन के निदेशक सुरेश कुमार चिक्कला भी मंच पर मौजूद थे।

तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा

यह महोत्सव अपनी अनूठी विषय-वस्तु और प्रसिद्ध कथाओं के मंचन के लिए विशेष पहचान बना रहा है। कार्यक्रम की पूरी श्रृंखला इस प्रकार है:

  • 18 सितंबर: सदानम अकादमी द्वारा रामायण पर आधारित “मंदोदरी” की प्रस्तुति।
  • 19 सितंबर: केरल कलामंडलम द्वारा अर्नेस्ट हेमिंग्वे के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित “द ओल्ड मैन एंड द सी” की प्रस्तुति।
  • 20 सितंबर: मार्गी थिएटर द्वारा राजा रुगमंगदा की भक्ति पर आधारित “रुगमंगदा चरितम” की प्रस्तुति।
  • दैनिक सत्र: तीनों दिन सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक रुक्मिणी अरंगम में विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।

कलाक्षेत्र फाउंडेशन का ऐतिहासिक योगदान और पृष्ठभूमि

इस प्रतिष्ठित आयोजन के स्थल कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना साल 1936 में रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा की गई थी। चेन्नई के थिरुवनमियूर में स्थित यह संस्थान भारत की शास्त्रीय कलाओं, पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अभ्यास और प्रसार में ऐतिहासिक भूमिका निभाता आया है। फाउंडेशन ने मुख्य रूप से भरतनाट्यम के विकास और उसकी शुद्धता को बनाए रखने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। शिक्षा और प्रदर्शन के माध्यम से यह संस्थान पारंपरिक संगीत, नृत्य और प्राचीन शिल्प परंपराओं को लगातार नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।

इसका असर और शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों के लिए महत्व

इस तरह के आयोजनों से देश की पारंपरिक कलाओं को नया जीवन और मंच मिलता है। सामान्य दर्शकों और छात्रों के लिए यह महोत्सव भारतीय लोक एवं शास्त्रीय कलाओं की गहराइयों को समझने का एक बेहतरीन अवसर है। सुबह के सत्रों में आयोजित होने वाले व्याख्यान-प्रदर्शन छात्रों को बारीकियों से रूबरू कराते हैं। इस तीन दिवसीय आयोजन के जरिए केरल की प्रसिद्ध नृत्य-नाटक शैली कथकली को दक्षिण भारत के सांस्कृतिक केंद्र चेन्नई में व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का सीधा अवसर मिल रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? 17वें कथकली महोत्सव का आयोजन कहां किया जा रहा है? उत्तर। इस महोत्सव का आयोजन चेन्नई के तिरुवनमियूर स्थित भारत कलाक्षेत्र सभागार में किया जा रहा है।

प्रश्न? इस वर्ष के कथकली महोत्सव का विषय क्या है? उत्तर। इस तीन दिवसीय उत्सव का मुख्य विषय “कथा रस संगम – कहानियों के सार का संगम” है।

प्रश्न? कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना कब और किसने की थी? उत्तर। कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना 1936 में रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा की गई थी।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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