
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कोलकाता में छठे आरआईएसई सम्मेलन के दौरान उद्योग जगत और अनुसंधान संस्थानों से परियोजना के पहले दिन से ही मिलकर काम करने की अपील की है।
मुख्य बातें
- कोलकाता स्थित सीएसआईआर-आईआईसीबी में छठा आरआईएसई सम्मेलन आयोजित किया गया।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने उद्योग और अनुसंधान के बीच नए साझेदारी मॉडल का आह्वान किया।
- सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ मृदा तत्वों और स्वदेशी तकनीकों पर चर्चा हुई।
- बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स ने सर्पदंश विषरोधक के स्वदेशी उत्पादन को पुनर्जीवित करने का मुद्दा उठाया।
पीआईबी के अनुसार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने 06 सितंबर 2026 को कोलकाता स्थित सीएसआईआर-आईआईसीबी में आयोजित छठे आरआईएसई सम्मेलन के दौरान उद्योग और अनुसंधान के बीच सहयोग के तौर-तरीकों में मूलभूत बदलाव का आह्वान किया है। उन्होंने उद्योग जगत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वैज्ञानिकों से संवाद करते हुए कहा कि व्यावसायिक इकाइयों को प्रयोगशालाओं के साथ पहले दिन से ही मिलकर काम करना चाहिए। मंत्री ने जोर देकर कहा कि संभावित वाणिज्यिक साझेदारों की पहचान परियोजना की योजना बनाने के शुरुआती चरण में ही कर ली जानी चाहिए।
उद्योग और अनुसंधान की साझेदारी पर जोर
उद्योग और अनुसंधान के बीच शुरुआती तालमेल से बाजार की आवश्यकताएं और व्यावहारिक पहलू प्रौद्योगिकी विकास को सही दिशा देते हैं। प्रारंभिक चरण में उद्योग की भागीदारी रहने से डिजाइन, पर्यावरणीय स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला की जरूरतों से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव मिलते हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी तकनीक बाजार में सिर्फ इसलिए नहीं आनी चाहिए कि बाद में उपयोगकर्ताओं की जरूरत के हिसाब से उसमें बदलाव करना पड़े।
कोलकाता के इस सम्मेलन में उद्योग प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष विशिष्ट प्रौद्योगिकियों और उनसे जुड़ी चुनौतियों को रखा। महत्वपूर्ण खनिज और स्वदेशी प्रौद्योगिकी इस चर्चा का प्रमुख केंद्र रहे। प्रतिभागियों ने दुर्लभ मृदा तत्वों के निष्कर्षण, स्थायी चुंबकों, पुनर्चक्रण और लिथियम के लाभकारीकरण पर विचार-विमर्श किया। इसके अलावा वैनेडियम तथा टाइटेनियम जैसे रणनीतिक खनिजों के पुनर्प्राप्ति विषयों को भी उठाया गया।
रणनीतिक खनिज और तकनीकी सहयोग
उद्योग प्रतिनिधियों ने इन प्रौद्योगिकियों को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए सीएसआईआर प्रयोगशालाओं से तकनीकी मार्गदर्शन की मांग की है। पूर्वी भारत में दुर्लभ मृदा तत्वों के अन्वेषण की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सरकारी वैज्ञानिक एजेंसियों में विकसित क्षमताओं का अधिकतम लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
- कोलकाता में आयोजित छठे आरआईएसई सम्मेलन में उद्योग और अनुसंधान पर चर्चा हुई।
- महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों के अन्वेषण पर जोर दिया गया।
- फाउंड्री क्षेत्र के लिए साझा अनुसंधान एवं विकास सुविधा स्थापित करने का सुझाव दिया गया।
- बंगाल केमिकल्स द्वारा सर्पदंश विषरोधक के स्वदेशी उत्पादन पर बात हुई।
बैठक के दौरान फाउंड्री क्षेत्र के लिए एक साझा अनुसंधान एवं विकास सुविधा स्थापित करने का सुझाव भी सामने आया। मंत्री ने इस्पात क्षेत्र के उद्यमों से सहयोग करने का आह्वान किया और कहा कि सरकार इस तरह के मंच को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार है। बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स ने पूर्वी भारत की विशिष्ट प्रजातियों के आधार पर सर्पदंश विषरोधक के स्वदेशी उत्पादन को पुनर्जीवित करने का मुद्दा उठाया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? छठा आरआईएसई सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया था?
उत्तर। छठा आरआईएसई सम्मेलन कोलकाता स्थित सीएसआईआर-आईआईसीबी में आयोजित किया गया था।
प्रश्न? उद्योग और अनुसंधान के नए मॉडल के लिए किसने आह्वान किया है?
उत्तर। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने इस नए साझेदारी मॉडल का आह्वान किया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






