
पीआईबी के अनुसार, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंजाब के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध है और कम उत्पादन की वजह ईंधन की कमी नहीं है।
मुख्य बातें
- पीआईबी के अनुसार, 04 सितंबर 2026 तक पंजाब के राज्य संयंत्रों में कोयले का भंडार मानक आवश्यकता का लगभग 117 प्रतिशत था।
- पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के तीन ताप विद्युत संयंत्रों की कुल क्षमता 2,300 मेगावाट है।
- अगस्त 2026 के दौरान पीएसपीसीएल संयंत्रों का औसत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) लगभग 42 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
पंजाब कोयला आपूर्ति को लेकर हालिया मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। पीआईबी के अनुसार, पंजाब के ताप विद्युत संयंत्रों में बिजली उत्पादन में कमी का कारण ईंधन की कमी नहीं है। कोयला मंत्रालय ने बताया है कि राज्य के बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराया गया है। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) देश भर में बिजली उत्पादन के लिए निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
पंजाब कोयला आपूर्ति और केंद्र का समर्थन
पंजाब कोयला आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कैप्टिव खदान उत्पादन शुरू होने के बाद स्वतंत्र विद्युत संयंत्रों (आईपीपी) को कोयले की आवाजाही को सुगम बनाया है। पीएसपीसीएल की कैप्टिव पचवारा सेंट्रल कोल माइन से आईपीपी को कोयले की आपूर्ति झारखंड राज्य को वैधानिक भुगतान दायित्व की पूर्ति के अधीन सक्षम की गई है। पचवारा सेंट्रल कोल माइन से कोयले का उपयोग नाभा पावर लिमिटेड राजपुरा और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड मनसा जैसे आईपीपी द्वारा निर्दिष्ट अंतिम उपयोग संयंत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद वार्षिक उत्पादन के 50 प्रतिशत तक करने की अनुमति है।
संयंत्रों का प्रदर्शन और कोयला भंडार
पीएसपीसीएल तीन ताप विद्युत संयंत्रों का संचालन करती है जिनमें गुरु हरगोबिंद लेहरा मोहब्बत, गोइंदवाल साहिब और रोपड़ ताप विद्युत संयंत्र शामिल हैं। इनकी संयुक्त क्षमता 2,300 मेगावाट है। 04 सितंबर 2026 तक, पीएसपीसीएल के इन संयंत्रों में कोयले का भंडार मानक आवश्यकता का लगभग 117 प्रतिशत था। इस पर्याप्त भंडार के बावजूद, अगस्त 2026 के दौरान इन संयंत्रों का औसत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) केवल लगभग 42 प्रतिशत था। इसके विपरीत, पंजाब स्थित आईपीपी नाभा पावर लिमिटेड ने इसी अवधि में लगभग 93 प्रतिशत का पीएलएफ हासिल किया।
कोयला निकासी और भविष्य की राह
कोल इंडिया की सहायक कंपनियों ने पंजाब स्थित आईपीपी को सक्रिय रूप से कोयले की पेशकश की है, हालांकि बुकिंग और निकासी में विलंब देखा गया है। सीसीएल ने 30 मार्च 2026 को आरसीआर मोड के तहत एनपीएल और टीएसपीएल को 5 लाख टन कोयले की पेशकश की थी, जिसमें से केवल 4.1 लाख टन की बुकिंग हुई। कोयला मंत्रालय दोहराता है कि केंद्र सरकार ने पीएसपीसीएल की कैप्टिव खदानों से पंजाब के आईपीपी तक कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? पंजाब के बिजली संयंत्रों में कम उत्पादन की मुख्य वजह क्या थी? उत्तर। पीआईबी के अनुसार अगस्त 2026 में कम उत्पादन का कारण कोयले की कमी नहीं बल्कि संयंत्रों का कम प्लांट लोड फैक्टर था क्योंकि कोयला भंडार पर्याप्त से अधिक था।
प्रश्न? पचवारा सेंट्रल कोल माइन से किसे कोयला मिलता है? उत्तर। इससे नाभा पावर लिमिटेड और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड जैसे आईपीपी को कोयला आपूर्ति सक्षम की गई है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






