
कोलकाता में आयोजित छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने टियर-2 और टियर-3 शहरों की नवाचार क्षमता को रेखांकित किया।
मुख्य बातें
- कोलकाता में छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन 6-7 सितंबर को हुआ।
- पीआईबी के अनुसार, भारत के 50-60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों से बाहर के हैं।
- सम्मेलन में 8 समझौता ज्ञापनों और 4 प्रौद्योगिकी हस्तांतरणों पर काम हुआ।
- कार्यक्रम में लगभग 150 स्टार्टअप्स और 300 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि आरआईएसई कॉन्क्लेव भारत के टियर-2 और टियर-3 स्टार्टअप पावरहाउस पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। पीआईबी के अनुसार, कोलकाता में आयोजित छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में उन्होंने छोटे शहरों के नवप्रवर्तकों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। सरकार स्वदेशी तकनीकों को प्रयोगशाला से सीधे बाजार तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण कर रही है ताकि देश के दूरदराज के क्षेत्रों में छिपी प्रतिभा को उचित मंच मिल सके।
आरआईएसई कॉन्क्लेव और छोटे शहरों की भूमिका
आरआईएसई कॉन्क्लेव के माध्यम से सरकार देश के महानगरों से आगे निकलकर छोटे शहरों के युवाओं तक पहुंच रही है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश के 50 से 60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप बड़े महानगरों से ताल्लुक नहीं रखते हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा उद्यमी बड़े शहरों के अपने समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं और कई क्षेत्रों में उनसे आगे निकल रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थानों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे पारंपरिक प्रौद्योगिकी केंद्रों से बाहर निकलकर इन उभरते हुए उद्यमियों तक पहुंचें।
चार सीएसआईआर प्रयोगशालाओं का 4एम ढांचा
कोलकाता स्थित सीएसआईआर-आईआईसीबी में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में चार प्रमुख सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने मिलकर हिस्सा लिया। यह आयोजन खनिज, औषधि, सामग्री और मशीनरी के 4एम ढांचे पर आधारित था। इस मंच पर स्टार्टअप्स, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने एक साथ आकर वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक रूप देने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान लगभग 150 स्टार्टअप्स और 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने अपनी तकनीकों का प्रदर्शन किया।
तकनीकी सत्र और एमओयू
- छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव में आठ पैनल चर्चाएं हुईं जिनमें 67 विशेषज्ञ शामिल रहे।
- स्वास्थ्य सेवा, उन्नत सामग्री और डीकार्बोनाइजेशन जैसे विषयों पर व्यापक मंथन किया गया।
- कार्यक्रम के दौरान आठ समझौता ज्ञापनों और चार प्रौद्योगिकी हस्तांतरणों को अंतिम रूप दिया गया।
- स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए कई नए उत्पादों का भी शुभारंभ हुआ।
इतिहास और भविष्य की दिशा
कोलकाता का चयन इस आयोजन के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस शहर की एक समृद्ध वैज्ञानिक विरासत रही है। डॉ. सी.वी. रमन और डॉ. बिधान चंद्र रॉय जैसे मनीषियों की भूमि पर आयोजित यह सम्मेलन बंगाल की ऐतिहासिक बौद्धिक क्षमता को आधुनिक तकनीक और उद्यमिता से जोड़ रहा है। सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान और विकास कोष तथा एएनआरएफ की पहलों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। आरआईएसई कॉन्क्लेव के ये प्रयास विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन कहाँ किया गया है?
उत्तर। छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन कोलकाता में सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ केमिकल बायोलॉजी (आईआईसीबी) में किया गया है।
प्रश्न? इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। इसका मुख्य उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना तथा विज्ञान, स्टार्टअप और उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाना है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






