शुक्रवार, सितम्बर 4, 2026

आईटीआई के बाद क्या करें? जॉब, अप्रेंटिसशिप और पढ़ाई के 5 रास्ते

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आईटीआई के बाद

आईटीआई पास करने के बाद आगे की पढ़ाई, अप्रेंटिसशिप और नौकरियों के सबसे व्यावहारिक विकल्पों की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

  • NAPS पोर्टल पर पंजीकरण करके सरकारी या निजी क्षेत्र में 1 साल की अप्रेंटिसशिप करें।
  • लेटरल एंट्री परीक्षा देकर सीधे पॉलीटेक्निक डिप्लोमा के द्वितीय वर्ष (3rd Semester) में प्रवेश लें।
  • भारतीय रेलवे, बीएचईएल, डीआरडीओ और राज्य बिजली बोर्डों में तकनीशियन पदों पर आवेदन करें।
  • 10वीं के बाद 2 साल का आईटीआई करने वाले छात्र एनआईओएस से 12वीं की समकक्षता प्राप्त कर सकते हैं।

आईटीआई के बाद छात्र रेलवे, सरकारी उपक्रमों (PSU), अप्रेंटिसशिप, सीधे पॉलीटेक्निक डिप्लोमा के दूसरे वर्ष में प्रवेश या निजी क्षेत्र में तकनीशियन के रूप में करियर शुरू कर सकते हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) से तकनीकी ट्रेड की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए रोजगार और उच्च शिक्षा दोनों के रास्ते खुलते हैं। सही जानकारी के अभाव में कई छात्र गलत राह चुन लेते हैं, इसलिए अपने ट्रेड और लक्ष्य के हिसाब से अगला कदम उठाना आवश्यक है।

आईटीआई के बाद क्या करें?

आईटीआई के बाद करियर बनाने के लिए चार मुख्य विकल्प उपलब्ध हैं। उम्मीदवार अप्रेंटिसशिप (NAPS) से व्यावहारिक अनुभव ले सकते हैं, लेटरल एंट्री द्वारा पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कर सकते हैं, रेलवे या रक्षा क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर सकते हैं, या खुद का तकनीकी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। ट्रेड के आधार पर प्राइवेट कंपनियों में तकनीशियन पद पर तुरंत नौकरी भी पाई जा सकती है।

आईटीआई के बाद अप्रेंटिसशिप (NAPS) का रास्ता

व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाने और उद्योग के वास्तविक माहौल को समझने के लिए अप्रेंटिसशिप सबसे अच्छा माध्यम है। भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप संवर्धन योजना (NAPS) के तहत आईटीआई पास उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी जाती है। पोर्टल apprenticeshipindia.gov.in पर जाकर मुफ्त पंजीकरण किया जा सकता है।

रेलवे, बीएचईएल (BHEL), एनटीपीसी (NTPC), ओएनजीसी (ONGC) और इंडियन ऑयल जैसे सरकारी उपक्रम हर साल हजारों पदों पर अप्रेंटिस भर्ती निकालते हैं। प्रशिक्षण के दौरान हर महीने निर्धारित स्टाइपेंड मिलता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग (NCVT) द्वारा नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट (NAC) जारी किया जाता है। कई सरकारी नौकरियों में एनएसी सर्टिफिकेट धारकों को सीधी छूट या अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।

आईटीआई के बाद पॉलीटेक्निक डिप्लोमा (लेटरल एंट्री)

यदि आप इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च पद हासिल करना चाहते हैं, तो डिप्लोमा की पढ़ाई करना एक सही निर्णय है। आईटीआई के बाद छात्र पॉलीटेक्निक डिप्लोमा के द्वितीय वर्ष (तीसरे सेमेस्टर) में सीधे प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इसे लेटरल एंट्री कहा जाता है। सामान्यतः 3 साल का डिप्लोमा पाठ्यक्रम आपके लिए केवल 2 साल का रह जाता है।

राज्यों में आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं जैसे जेईईसीयूपी (JEECUP – यूपी), बीसीईसीई (BCECE – बिहार) या संबंधित राज्य बोर्ड की परीक्षाओं के माध्यम से दाखिला मिलता है। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिशियन ट्रेड से आईटीआई करने वाले छात्र इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में और फिटर ट्रेड वाले छात्र मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला ले सकते हैं। डिप्लोमा पूरा करने के बाद आप विभिन्न विभागों में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद के लिए पात्र हो जाते हैं।

आईटीआई के बाद सरकारी नौकरियों के अवसर

तकनीकी योग्यता वाले युवाओं के लिए सरकारी क्षेत्र में लगातार रिक्तियां आती रहती हैं। भर्ती प्रक्रिया में ट्रेड थ्योरी और सामान्य योग्यता की परीक्षा होती है।

  • भारतीय रेलवे: असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) और तकनीशियन (Technician Grade III) के पदों पर सबसे ज्यादा आईटीआई उम्मीदवारों का चयन होता है।
  • रक्षा और अनुसंधान संगठन: डीआरडीओ (DRDO), इसरो (ISRO), ऑर्डनेंस फैक्टरी और भारतीय नौसेना में नेवल अप्रेंटिस व तकनीशियन के पद।
  • ऊर्जा और बिजली बोर्ड: राज्य बिजली वितरण निगमों में लाइनमैन, स्विचबोर्ड अटेंडेंट और तकनीशियन।
  • पीएसयू (PSU): सेलिंग (SAIL), गेल (GAIL), कोल इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में टेक्नीशियन ट्रेनी।

आईटीआई के बाद निजी क्षेत्र में करियर और स्वरोजगार

निजी उद्योगों में कुशल कारीगरों की मांग हमेशा बनी रहती है। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, एलएंडटी, सैमसंग और डिक्सन जैसी निर्माण व ऑटोमोबाइल कंपनियां कैंपस इंटरव्यू या वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से सीधी भर्ती करती हैं। शुरुआती स्तर पर असेंबली लाइन ऑपरेटर, मेंटेनेंस टेक्नीशियन या क्वालिटी चेकर के रूप में काम मिलता है।

यदि आपकी रुचि खुद का काम शुरू करने में है, तो आईटीआई की पढ़ाई स्वरोजगार के लिए बहुत कारगर है। इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, आरएसी (एयर कंडीशनर/रेफ्रिजरेटर), मोटर मेकैनिक और वेल्डर ट्रेड के छात्र अपनी खुद की वर्कशॉप, मरम्मत केंद्र या कांट्रैक्टिंग एजेंसी खोल सकते हैं। सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना या मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजनाओं के तहत बैंक से आसान दरों पर ऋण भी प्राप्त किया जा सकता है।

आईटीआई के बाद सही विकल्प चुनने का चरण-दर-चरण तरीका

अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार करियर तय करने के लिए इस प्रक्रिया का पालन करें:

  1. अपनी आईटीआई ट्रेड की मार्कशीट और नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (NTC) डाउनलोड करके सुरक्षित रखें।
  2. आधिकारिक NAPS पोर्टल (apprenticeshipindia.gov.in) पर अपना प्रोफाइल 100% पूरा करें और ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित करें।
  3. यदि उच्च शिक्षा चाहिए, तो राज्य पॉलीटेक्निक लेटरल एंट्री परीक्षा का फॉर्म भरें और तैयारी शुरू करें।
  4. सरकारी नौकरी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे RRB, DRDO) पर अधिसूचनाएं ट्रैक करें।
  5. प्राइवेट जॉब के लिए अपना अपडेटेड बायोडाटा (Resume) तैयार करें और जॉब पोर्टल्स या प्लेसमेंट सेल से संपर्क करें।

मुख्य ट्रेड के अनुसार आईटीआई के बाद करियर के विकल्प

विभिन्न आईटीआई ट्रेड के अनुसार करियर के अवसर अलग-अलग होते हैं:

  • इलेक्ट्रिशियन: पावर प्लांट, वायरिंग ठेकेदारी, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, और मेंटेनेंस।
  • फिटर: मशीन असेंबली, रेलवे वर्कशॉप, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और पाइपिंग वर्क।
  • सीओपीए (COPA): डेटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर लैब सहायक, साइबर कैफे और बेसिक वेब डिजाइनिंग।
  • वेल्डर: शिपयार्ड, स्ट्रक्चरल फैब्रिकेशन, गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स और ऑटोमोबाइल बॉडी बिल्डिंग।
  • मेकैनिक डीजल/मोटर व्हीकल: ऑटो सर्विस सेंटर, राज्य सड़क परिवहन निगम और वाहन वर्कशॉप।

आईटीआई के बाद आवेदन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

किसी भी भर्ती, अप्रेंटिसशिप या कॉलेज दाखिले के समय इन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • 10वीं/12वीं की अंकतालिका और उत्तीर्ण प्रमाणपत्र
  • आईटीआई मार्कशीट और एनसीवीटी (NCVT) या एससीवीटी (SCVT) प्रमाणपत्र
  • आधार कार्ड और पैन कार्ड
  • जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • सक्रिय बैंक खाता विवरण और पासबुक की प्रति
  • हाल ही की पासपोर्ट आकार की तस्वीरें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न: क्या आईटीआई के बाद सीधे 12वीं की मान्यता मिल सकती है?
उत्तर: हां, 10वीं के बाद 2 साल का आईटीआई कोर्स पूरा करने वाले छात्र एनआईओएस (NIOS) या राज्य ओपन बोर्ड से केवल एक या दो भाषा विषय की परीक्षा देकर 12वीं के समकक्ष प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं।

प्रश्न: क्या आईटीआई के बाद पॉलीटेक्निक डिप्लोमा करना सही फैसला है?
उत्तर: यदि आप भविष्य में जूनियर इंजीनियर (JE) या सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति चाहते हैं, तो लेटरल एंट्री से 2 साल का डिप्लोमा करना बेहद फायदेमंद होता है।

प्रश्न: अप्रेंटिसशिप में हर महीने कितना स्टाइपेंड मिलता है?
उत्तर: नियमों के अनुसार, ट्रेड और संस्थान के आधार पर अप्रेंटिस को प्रति माह 7,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये या इससे अधिक का स्टाइपेंड दिया जाता है।

प्रश्न: अप्रेंटिसशिप पंजीकरण के लिए कौन सी आधिकारिक वेबसाइट है?
उत्तर: केंद्र सरकार का आधिकारिक अप्रेंटिसशिप पोर्टल apprenticeshipindia.gov.in है, जहां सभी उम्मीदवारों को पंजीकरण करना अनिवार्य है।

प्रवेश नियम, पात्रता और पोर्टल की प्रक्रियाएं समय-समय पर या राज्यों के अनुसार बदल सकती हैं; किसी भी आवेदन से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई नवीनतम सूचना ज़रूर जांचें।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://www.apprenticeshipindia.gov.in

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

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