मंगलवार, अक्टूबर 27, 2026

ब्रिक्स संसदीय मंच: ओम बिरला ने नैतिक तकनीक और डिजिटल संसद पर दिया जोर

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ब्रिक्स संसदीय मंच

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पारदर्शी तकनीक, डिजिटल संसद और यूएई, चीन व ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।

मुख्य बातें

  • लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित किया।
  • प्रौद्योगिकी के उपयोग में मानवीय निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को आवश्यक बताया।
  • भारतीय संसद में डिजिटल संसद, नेवा (NeVA) और 22 भाषाओं में अनुवाद व्यवस्था का उल्लेख किया।
  • मंच से इतर संयुक्त अरब अमीरात, चीन और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं आयोजित की गईं।

नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दुनिया भर के विधायी निकायों से नैतिक, उत्तरदायी और पारदर्शी तकनीक को बढ़ावा देने की अपील की है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लोक सभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि तकनीक का विकास और उपयोग हमेशा मानवीय मूल्यों, गरिमा और निरंतर मानवीय निगरानी के अधीन ही होना चाहिए।

ब्रिक्स संसदीय मंच में डिजिटल तकनीक और मानवीय मूल्य

ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के पूर्ण सत्र के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि तकनीक का प्रसार नागरिकों के सशक्तीकरण के लिए होना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल साधनों का उपयोग करते समय मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मानदंडों और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जानी आवश्यक है।

ओम बिरला ने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) समूह में शामिल देश विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन देशों की संसदों पर यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे अपनी विधायी संप्रभुता को बनाए रखते हुए एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ उठाएं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, उस पर अंतिम नियंत्रण और निगरानी इंसान की ही होनी चाहिए।

संसदीय कार्यप्रणाली में भारत के डिजिटल नवाचार

सत्र के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ने भारतीय संसद द्वारा अपनाई गई कई आधुनिक और डिजिटल पहलों को वैश्विक पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि भारत ने विधायी कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और आम जनता की पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल संसद के मॉडल को लागू किया है।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म: सांसदों को प्रश्नों, उत्तरों और सरकारी विभागों की त्वरित प्रतिक्रियाओं तक ऑनलाइन पहुंच प्रदान की गई है।
  • बहुभाषी व्यवस्था: दैनिक कार्यसूची (List of Business) वर्तमान में 10 भाषाओं में उपलब्ध कराई जा रही है और सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को शामिल करने पर काम जारी है।
  • एकसाथ अनुवाद: सदन की कार्यवाही के दौरान सभी 22 भाषाओं में एक साथ (सिमल्टेंयस) अनुवाद की तकनीक उपलब्ध है।
  • पुरालेख डिजिटलीकरण: स्वतंत्रता-पूर्व और स्वतंत्रता-पश्चात के संसदीय वाद-विवादों का मेटाडेटा और वीडियो-सर्च सुविधाओं के साथ डिजिटलीकरण किया गया है।
  • राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA): ‘एक राष्ट्र, एक विधाई मंच’ के माध्यम से देश भर की विधानसभाओं को जोड़ा जा रहा है, जिससे कागजरहित शासन और सीधी लाइव स्ट्रीमिंग संभव हुई है।

द्विपक्षीय वार्ताएं: यूएई, चीन और ईरान के साथ बैठकें

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ने कई देशों के संसदीय प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय संवाद भी किया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की फेडरल नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष साकिर घोबाश के साथ हुई बैठक में ‘विकसित भारत’ और ‘वी द यूएई 2031’ की साझी संकल्पनाओं पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने ऑनलाइन एश्योरेंस मॉनिटरिंग सिस्टम, समिति के कामकाज और डिजिटल संसद में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के उपाध्यक्ष झेंग जियानबांग के साथ बातचीत में ओम बिरला ने कहा कि पड़ोसी देश होने के नाते भारत और चीन की यह साझी जिम्मेदारी है कि वे अपनी सीमाओं पर शांति और सद्भाव बनाए रखें। उन्होंने संवाद और आपसी सम्मान के जरिए मतभेदों को सुलझाने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक में सहयोग पर बल दिया।

इसके अलावा ईरान की इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के प्रेसीडियम सदस्य डॉ. अहमद नादेरी से मुलाकात के दौरान चाबहार बंदरगाह के विकास और पश्चिमी एशिया में शांति बनाए रखने पर चर्चा हुई। ईरान ने भारत द्वारा भेजी गई दवाओं और सहायता सामग्री के लिए आभार प्रकट किया।

इसका असर: आम नागरिकों और वैश्विक शासन पर प्रभाव

भारत की डिजिटल उपलब्धियों का जिक्र करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की वैश्विक सफलता को रेखांकित किया। भारत में तकनीक के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की व्यवस्था ने बिचौलियों को खत्म कर सीधे नागरिकों के बैंक खातों में धनराशि पहुंचाना सुनिश्चित किया है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगी है।

संसदीय प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से आम जनता को कानून बनने की प्रक्रिया और अपने जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन को सीधे देखने का अवसर मिल रहा है। ‘नेवा’ और ‘डिजिटल संसद’ जैसी योजनाएं देश की हर विधानसभा को एक मंच पर लाकर लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सुलभ बना रही हैं।

ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 की भूमिका और भविष्य की दिशा

ब्रिक्स संसदीय मंच की स्थापना सदस्य देशों के बीच विधायी सहयोग, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और रणनीतिक विचारों के आदान-प्रदान के लिए की गई है। इस वर्ष के सम्मेलन में ‘संस्थानों की मजबूती और बेहतर भविष्य’ के विषय पर केंद्रित चर्चाएं की गईं।

ओम बिरला ने अपने संबोधन में विश्वास जताया कि संसदीय कूटनीति के माध्यम से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में भी मदद मिलती है। पारदर्शी और उत्तरदायी शासन का यह भारतीय मॉडल दुनिया के अन्य उभरते देशों के लिए भी एक उदाहरण पेश कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन कहां किया गया?
उत्तर: 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन नई दिल्ली में किया गया, जिसकी अध्यक्षता और संबोधन लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।

प्रश्न: भारतीय संसद में बहुभाषी सुविधा के तहत क्या बदलाव किए गए हैं?
उत्तर: दैनिक कार्यसूची को 10 भाषाओं में दिया जा रहा है और संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में एक साथ अनुवाद की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

प्रश्न: राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: NeVA का उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक विधाई मंच’ के तहत देश की सभी विधानसभाओं को डिजिटल रूप से जोड़कर कागजरहित शासन और पारदर्शी कार्यवाही सुनिश्चित करना है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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