सोमवार, अक्टूबर 26, 2026

जहाज निर्माण में भारत बनेगा वैश्विक दिग्गज, सर्बानंद सोनोवाल पहुंचे कोरिया

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जहाज निर्माण

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल दक्षिण कोरिया के चार दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं, जहां वे समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण में भारतीय अवसरों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया का चार दिवसीय आधिकारिक दौरा शुरू किया।
  • भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 जहाज निर्माण राष्ट्रों में शामिल होना है।
  • बुसान में सैमसंग हैवी इंडस्ट्रीज और हान्वा ओशन जैसे समूहों में कार्यरत भारतीय विशेषज्ञों से संवाद किया।
  • सितंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नीतिगत प्रोत्साहनों से उद्योग को बड़ा समर्थन मिला है।
  • विश्व समुद्री दिवस के अवसर पर बुसान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंत्री-स्तरीय गोलमेज बैठक में भाग लेंगे।

भारत में जहाज निर्माण उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के उद्देश्य से केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल दक्षिण कोरिया के चार दिवसीय दौरे पर बुसान पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान वे कोरियाई उद्योग जगत और वैश्विक निवेशकों के समक्ष भारत के समुद्री क्षेत्र में उपलब्ध असीम अवसरों को प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, दोनों देश पोत निर्माण, समुद्री लॉजिस्टिक्स और तटीय बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाकर भारत को वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच पोत निर्माता देशों में शामिल करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहे हैं।

भारत में जहाज निर्माण क्षेत्र में क्या हैं नए अवसर?

भारत में जहाज निर्माण और पोत मरम्मत के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आ रहा है। देश का लक्ष्य वर्ष 2047 तक वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच जहाज निर्माता राष्ट्रों में जगह बनाना है। केंद्र सरकार के नीतिगत प्रोत्साहनों और विदेशी साझेदारियों के माध्यम से भारतीय यार्डों की उत्पादकता बढ़ाने, अत्याधुनिक समुद्री तकनीक लाने और कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

अपनी यात्रा की शुरुआत दक्षिण कोरिया के समुद्री उद्योग के केंद्र बुसान से करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कोरियाई पोत निर्माण उद्योग में काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों, डिजाइनरों और पेशेवरों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत गौरांगलाल दास भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सैमसंग हैवी इंडस्ट्रीज, हान्वा ओशन, एचडी ह्यूंडई, डीएनवी और भारतीय पोत परिवहन रजिस्टर (IRS) जैसी प्रमुख वैश्विक और भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

दक्षिण कोरिया दौरे से जहाज निर्माण को मिलेगी नई गति

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे उन्नत शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम में भारतीय विशेषज्ञों की मौजूदगी देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने पेशेवरों से आग्रह किया कि वे अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों द्वारा अपनाई गई ‘वॉयेजेस’ (Voyages) रूपरेखा को केवल एक द्विपक्षीय समझौते के रूप में न देखें। यह रूपरेखा पोत परिवहन, समुद्री लॉजिस्टिक्स और पोत निर्माण में साझा प्रगति का मजबूत आधार है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘समुद्री भारत विज़न 2030’ और ‘समुद्री अमृत काल विज़न 2047’ के तहत भारत का स्पष्ट उद्देश्य समुद्री विनिर्माण, मरम्मत और लॉजिस्टिक्स का वैश्विक केंद्र बनना है। इस दिशा में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2025 में इस क्षेत्र के विकास के लिए नीतिगत प्रोत्साहनों की एक विस्तृत श्रृंखला को हरी झंडी दी थी, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

तकनीक और कौशल का आदान-प्रदान: भारत की भावी जरूरतें

भारत में समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ ही विशेषज्ञ मानव संसाधन की मांग तेजी से बढ़ रही है। पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत को बड़ी संख्या में पोत निर्माताओं, समुद्री इंजीनियरों, नेवल आर्किटेक्ट्स, डिजाइनरों, वेल्डरों और प्रोजेक्ट प्रबंधकों की आवश्यकता होगी।

दक्षिण कोरिया में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों से आग्रह किया गया कि वे वहां अर्जित अपने दीर्घकालिक अनुभव और तकनीकी दक्षता का लाभ भारत को दें। वे या तो भारत लौटकर अपनी सेवाएं दे सकते हैं या कोरिया में रहते हुए ही भारतीय पोत निर्माण कंपनियों के साथ सहयोग स्थापित कर सकते हैं। मंत्री सोनोवाल ने भारतीय और कोरियाई उद्योगों के बीच नेटवर्क स्थापित करने तथा ‘भारत जहाज प्रौद्योगिकी केंद्र’ एवं ‘भारत-कोरिया अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी’ के बीच कौशल विकास साझेदारी को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

वैश्विक शिपबिल्डिंग सुधार के लिए तीन प्रमुख बिंदु

सर्बानंद सोनोवाल ने भारतीय समुदाय और उद्योग विशेषज्ञों से मुख्य रूप से तीन विषयों पर व्यावहारिक सुझाव एवं रणनीतियां मांगी हैं:

  • उत्पादकता में वृद्धि: भारतीय जहाज निर्माण यार्डों की कार्यक्षमता और परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन में कैसे सुधार किया जाए।
  • कुशल कार्यबल का निर्माण: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारतीय युवाओं को पोत निर्माण और समुद्री इंजीनियरिंग में कैसे प्रशिक्षित किया जाए।
  • तकनीकी साझेदारी: भारतीय और कोरियाई कंपनियां अनुसंधान, विनिर्माण और नवाचार में मिलकर किस प्रकार काम कर सकती हैं।

अपनी इस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री विश्व समुद्री दिवस के अवसर पर बुसान में आयोजित उच्चस्तरीय मंत्री-स्तरीय गोलमेज बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख समुद्री राष्ट्रों के मंत्रियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव भी शामिल हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त सोनोवाल वैश्विक पोत निर्माण उद्योग के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, समुद्री शोध संस्थानों और थिंक-टैंक के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।

यह भी जानें: भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है समुद्री क्षेत्र का विकास?

भारत की लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा है और देश का 95 प्रतिशत व्यापार मात्रा के हिसाब से तथा 70 प्रतिशत मूल्य के हिसाब से समुद्री मार्गों से ही होता है। इसके बावजूद, वैश्विक पोत निर्माण बाजार में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में काफी कम है। वर्तमान में अधिकांश भारतीय जहाजों का निर्माण या मरम्मत विदेशी यार्डों में होती है, जिससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है।

यदि भारत घरेलू स्तर पर अत्याधुनिक पोत निर्माण क्षमता विकसित कर लेता है, तो इससे न केवल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देश के भीतर लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। भारी उद्योग, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को भी इससे सीधा संबल मिलेगा। यही कारण है कि केंद्र सरकार दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके अपने समुद्री ढांचे को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का दक्षिण कोरिया दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह दौरा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच जहाज निर्माण, समुद्री लॉजिस्टिक्स और पोत तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा वर्ष 2047 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल करने के लक्ष्य से आयोजित किया गया है।

प्रश्न: भारत का ‘समुद्री अमृत काल विज़न 2047’ क्या है?
उत्तर: समुद्री अमृत काल विज़न 2047 केंद्र सरकार का एक दीर्घकालिक रोडमैप है, जिसका उद्देश्य भारत के बंदरगाहों, पोत निर्माण यार्डों, पोत मरम्मत सुविधाओं और समुद्री व्यापार बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करके देश को वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाना है।

प्रश्न: ‘वॉयेजेस’ (Voyages) रूपरेखा क्या है?
उत्तर: वॉयेजेस भारत और दक्षिण कोरिया के बीच अप्रैल में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान स्वीकृत की गई एक द्विपक्षीय रूपरेखा है, जो दोनों देशों के बीच शिपबिल्डिंग, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स में तकनीकी व औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देती है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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