
पीआईबी के अनुसार, राजस्थान के जैसलमेर में चार नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षियों को डेजर्ट नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ दिया गया है।
मुख्य बातें
- अक्टूबर 2026 में राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में चार नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ा गया।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 30 वर्षों में इस प्रजाति की आबादी में 75 प्रतिशत की गिरावट आई है।
- अक्टूबर 2026 तक सैम और रामदेवरा की सुविधाओं में कुल 96 पक्षी दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 40 जंगली मूल के अंडों से हैं।
- दिसंबर 2024 में राष्ट्रीय सीएएमपीए ने पांच साल की संरक्षण कार्य योजना के लिए 77.05 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
पीआईबी (पत्र सूचना कार्यालय) के अनुसार, अक्टूबर 2026 में राजस्थान के जैसलमेर में सैम गांव के पास डेजर्ट नेशनल पार्क में चार नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षियों को जंगल में छोड़ा गया है। ये पक्षी सैम और रामदेवरा स्थित संरक्षण-प्रजनन सुविधा केंद्रों से खुली हवा में छोड़े जाने के लिए निर्धारित 10 पक्षियों का हिस्सा हैं। पिछले एक दशक से चल रहे संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम ने अब एक नया मुकाम हासिल कर लिया है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ने का महत्व
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है, जिसे बचाने के लिए सरकार और वन्यजीव संस्थान लगातार प्रयास कर रहे हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान की 2016-17 की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में इस पक्षी की आबादी में 75 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आवास का नुकसान और मानव-प्रेरित दबाव इस गिरावट के मुख्य कारण रहे हैं, जिसके कारण कैप्टिव आबादी स्थापित करना अनिवार्य हो गया था।
संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम का इतिहास और बजट
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत इस संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम को वर्ष 2016 में पांच साल के लिए 33.85 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी। इसके बाद दिसंबर 2024 में राष्ट्रीय सीएएमपीए ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और लेसर फ्लोरिकन को कवर करने वाली पांच साल की योजना के लिए 77.05 करोड़ रुपये मंजूर किए। अक्टूबर 2026 तक, इन प्रजनन केंद्रों में कुल 96 पक्षी थे, जिनमें 40 जंगली मूल के अंडों से और 56 कैप्टिव पैदा हुए थे।
जम्पस्टार्ट दृष्टिकोण और गुजरात में सफलता
संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठा ‘जम्पस्टार्ट दृष्टिकोण’ अपनाया गया, खासकर गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जहां केवल तीन मादा पक्षी बची थीं और कोई नर नहीं था। राजस्थान के सैम केंद्र से एक व्यवहार्य अंडे को पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 770 किलोमीटर दूर नलिया, गुजरात ले जाया गया। इस अंडे को एक जंगली मादा के घोंसले में रखा गया, जहां चार दिन बाद चूजे का जन्म हुआ। इस तकनीक से राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजे पैदा हुए हैं।
प्राकृतिक आवास और रीवाइल्डिंग सुविधाएं
रामदेवरा में कैप्टिव नस्ल के पक्षियों को तैयार करने के लिए एक समर्पित रीवाइल्डिंग एवियरी बनाई गई है, जो 160 मीटर लंबी, 64 मीटर चौड़ी और 14 मीटर ऊंची स्तंभ-रहित संरचना है। डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर लगभग 200 वर्ग किलोमीटर बाड़ वाले घास के मैदान के बाड़े स्थापित किए गए हैं। सॉफ्ट-रलीज सुविधा के माध्यम से चयनित पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाता है ताकि वे स्वतंत्र जीवन जी सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षियों को जंगल में कहाँ छोड़ा गया है? उत्तर। अक्टूबर 2026 में राजस्थान के जैसलमेर में सैम गांव के पास डेजर्ट नेशनल पार्क में चार नर पक्षियों को छोड़ा गया।
प्रश्न? इस संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई थी? उत्तर। इस संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम को वर्ष 2016 में मंजूरी दी गई थी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






