
भारतीय रिज़र्व बैंक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में हुए बदलावों के मद्देनजर सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने 19 अक्टूबर 2026 को यह सर्कुलर जारी किया है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ISIL और अल-कायदा प्रतिबंध सूची में 3 प्रविष्टियों में संशोधन किया गया है।
- संशोधित सूची में मुनीर अल-मतास्सादेक, नूर वली महसूद और संगठन तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) शामिल हैं।
- सभी वाणिज्यिक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को UAPA अधिनियम 1967 की धारा 51A का सख्ती से पालन करना होगा।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 19 अक्टूबर 2026 को एक नया सर्कुलर जारी करते हुए सभी वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। RBI निर्देश 2026 के तहत वित्तीय संस्थानों को अपनी मौजूदा ग्राहक जानकारी और खातों की नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
RBI निर्देश 2026: UNSC प्रतिबंध सूची में क्या बदला है?
भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत आईएसआईएल (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध सूची में तीन प्रविष्टियों को संशोधित किया गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने सभी विनियमित संस्थाओं को सतर्क किया है। इन संशोधनों में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के संदेह वाले व्यक्तियों और संगठनों के विवरण अपडेट किए गए हैं।
- मुनीर अल-मतास्सादेक (Morocco के नागरिक) से जुड़े रिकॉर्ड में संशोधन किया गया है।
- नूर वली महसूद, जो तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान का नेतृत्व करता है, उसकी प्रविष्टि अपडेट हुई है।
- संगठन तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) की प्रविष्टि को भी सुरक्षा परिषद की सूची में संशोधित किया गया है।
- सभी वित्तीय संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन सूचियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या इकाई का उनके पास कोई खाता न हो।
गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत निर्देश
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 51A के तहत सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर यह कानूनी दायित्व है कि वे प्रतिबंधित आतंकवादियों या संगठनों से जुड़ी संपत्तियों को तुरंत फ्रीज करें। रिज़र्व बैंक ने अपने ‘अपने ग्राहक को जानें’ (KYC) निर्देशों के तहत स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करना अनिवार्य है। केंद्रीय बैंक के महाप्रबंधक आर. सतीश द्वारा जारी इस अधिसूचना में सभी वित्तीय घरानों से सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
इसका असर आम आदमी और वित्तीय संस्थाओं पर क्या होगा?
इस प्रकार के नियामक आदेशों से आम नागरिकों पर सीधा कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए अनुपालन का दायरा बेहद सख्त हो जाता है। बैंकों को अपने सिस्टम में हर नए और पुराने खाते की क्रॉस-चेकिंग संयुक्त राष्ट्र और गृह मंत्रालय द्वारा जारी प्रतिबंधित सूचियों के साथ करनी होती है। यदि किसी बैंक को संदिग्ध खाता मिलता है, तो उसे तुरंत UAPA के प्रावधानों के तहत धन फ्रीज करने और आवश्यक कानूनी कदम उठाने होते हैं। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रविष्टि को सूची से हटवाना चाहता है, तो उसके लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र ओंबड्समैन के समक्ष आवेदन करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसे भारतीय गृह मंत्रालय के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? RBI निर्देश 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंधित सूचियों का भारतीय वित्तीय प्रणाली में कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना है ताकि आतंकवाद से जुड़े वित्तपोषण को रोका जा सके।
प्रश्न? UAPA की धारा 51A के तहत वित्तीय संस्थानों की क्या जिम्मेदारी है?
उत्तर। विनियमित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके पास किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्था का खाता या संपत्ति न हो, जिसका नाम UNSC की आतंकवादी सूची में शामिल है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






